भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में CM सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान, परिवार को मिलेगी सरकारी नौकरी और मदद – bharat tiwari encounter case cm samrat chaudhary announcement family receive government job and assistance


Bharat Bhushan Tiwari: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सीएम सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर परिवार को सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद दी जाएगी। सीएम ने एक्स पर लिखकर बताया है।

Bharat Tiwari encounter
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला(फोटोनवभारतटाइम्स.कॉम)
आरा: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने परिवार को आर्थिक सहायता और मुआवजा देने का ऐलान किया है। सीएम ने एक्स पर लिखते हुए बताया है कि परिवार को न्यायिक जांच आयोग के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर परिवार को एक सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लिखा है कि न्यायिक जांच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी। ध्यान रहे कि कुछ दिनों पहले भरत तिवारी का परिवार मुख्यमंत्री से मिला था और न्याय की गुहार लगाई थी। अब मुख्यमंत्री की ओर से उनके परिवार को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी की बात कही गई है।

17 जून, 2026 को हुआ था एनकाउंटर

भरत तिवारी का भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस ने एनकाउंटर किया था। भरत तिवारी को तीन गोली मारने की बात कही गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पांच गोली मारने की पुष्टि हुई। हंगामा और परिवार की मांग के बाद बिहार सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया। न्यायिक जांच आयोग के समझ भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और उनकी माता आशा देवी का बयान दर्ज हो चुका है। आयोग के समक्ष भरत तिवारी के परिजनों और उनके भाई का भी बयान दर्ज हो चुका है।

तारीखों के आईने में भरत तिवारी एनकाउंटर

24 जून और 25 जून, 2026 एनकाउंटर के आठ दिन बाद भोजपुर एसपी राज भरत तिवारी के घर पहुंचते हैं।
26 जून, 2026 सम्राट सरकार रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में जांच का ऐलान करती है।
28 जून, 2026 कोर्ट की अनुमति के बाद थानेदार निलंबित होते हैं, एसटीएफ जवान और भरत तिवारी के पास बरामद पिस्टल की जांच होती है।
29 जून, 2026 राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से मामले पर संज्ञान लिया जाता है। मुख्य सचिव को एक्शन लेने का निर्देश दिया जाता है।
24 जुलाई, 2026 भरत तिवारी का परिवार सीएम सम्राट चौधरी के कार्यालय में पटना पहुंचकर मुलाकात करता है।
31 जुलाई, 2026 एनकाउंटर में शामिल एक जवान अक्षय कुमार को पुलिस गिरफ्तार करती है।

एसटीएफ जवान अक्षय की हो चुकी है गिरफ्तारी

ध्यान रहे कि इस मामले में सरकार लगातार एक्शन ले रही है। पुलिस ने गोली चलाने वाले एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को बहुत पहले गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी 24 जुलाई को भरत तिवारी के परिवार के मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद हुई। आरोप है कि अक्षय कुमार ने ही पहली गोली भरत तिवारी पर चलाई थी। मुख्यमंत्री से भरत तिवारी के मिलने वाले परिवार में उनकी माता, बहन और भाभी शामिल रहीं। उस मुलाकात के बाद पुलिस ने एक्शन लिया और अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया।

भरत तिवारी एनकाउंटर और अब- तक का घटनाक्रम

17 जून, 2026 को पिस्तौल लहराने और पुलिस को धमकी देने का मामला बताकर भरत तिवारी के हथियार डाल देने के बाद पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया।
एनकाउंटर के दौरान भरत तिवारी फेसबुक पर लाइव रहे। उसमें साफ दिखा कि उन्होंने हथियार डाल दिया है। उसके बाद पुलिस ने उनका एनकाउंटर किया।
घटना के बाद पूरे भोजपुर में जनाक्रोश फैल गया। गलत एनकाउंटर बताते हुए न्याय की मांग को लेकर लोग सड़कों पर उतर गए और सरकार को झुकना पड़ा।
सम्राट चौधरी सरकार ने मामले को लेकर न्यायिक जांच आयोग का गठन कर दिया। फिलहाल मामले की जांच न्यायिक आयोग की ओर से की जा रही है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। सीबीआई जांच की मांग हुई। कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार किया। भरत तिवारी की मां के आवेदन पर डीएसपी सहित कई पुलिसकर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा ऐलान

भरत तिवारी मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से अब बड़ा ऐलान किया गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक मदद के अलावा उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी। सीएम ने इससे संबंधित जानकारी एक्स पर लिखकर दी है। ध्यान रहे कि सरकार इस मामले में लगातार एक्टिव है। जांच जारी है और दोषियों को सजा दिलाने की बात कही जा रही है।

भरत तिवारी के परिवार की मांग क्या है?

सभी शामिल पदाधिकारियों पर सख्त एक्शन और उनकी गिरफ्तारी को सुनिश्चित किया जाए। बिलौटी गांव में भरत तिवारी की प्रतिभा बनाकर उसे लगाया जाए। इसमें सरकार की ओर से मदद मिले। भरत तिवारी को शहीद का दर्जा दिया जाए। सरकार की ओर से परिवार को एक करोड़ की मदद की जाए। जिस गांव के लिए भरत लड़ रहा था। उसका नाम भरत तिवारी जवइनिया गांव रख दिया जाए।

भरत तिवारी के परिवार को सीएम सम्राट चौधरी पर भरोसा भी है। उनका मानना है कि एसटीएफ जवान की गिफ्तारी के बाद उनकी आस जगी है। भरत तिवारी का कोी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। कोई मामला दर्ज नहीं था। उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

आशुतोष कुमार पांडेय

लेखक के बारे मेंआशुतोष कुमार पांडेयआशुतोष कुमार पांडेय, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में प्रिसिंपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। वे सितंबर- 2022 में टाइम्स ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। फिलवक्त आशुतोष NBT बिहार- झारखंड डिजिटल में डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इवनिंग शिफ्ट इंचार्ज भी हैं। क्षेत्रीय खबरों की प्लानिंग, सटीक संपादन, खबरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के अलावा फील्ड के साथियों से समन्वय स्थापित करने का काम करते हैं। आशुतोष राजनीति, क्राइम, ऑफ बीट स्टोरी, मानवीय संवेदना से जुड़ी खबरों और रेट्रो स्टोरी पर मजबूत पकड़ रखते हैं। 22 वर्षों के अपने पत्रकारीय करियर में 14वीं लोकसभा 2014 से लेकर 17वीं लोकसभा 2019, 13वीं बिहार विधानसभा 2005 से लेकर 18वीं बिहार विधानसभा चुनाव 2025 तक को डेस्क के साथ ग्राउंड पर जाकर कवर किया। इन 22 वर्षों के कार्यकाल में आशुतोष ने कई सियासी अनसुनी कहानियों को कुरेदा। सियासी किस्सों को चुटीले अंदाज में पेश किया। डिजिटल में ‘अतीत के पन्नों से’ एक सीरीज चलाई। कर्पूरी ठाकुर, लालू प्रसाद यादव, जयप्रकाश नारायण सहित बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों की अनसुनी कहानी लिखी। रेड लाइट एरिया पर विशेष रिपोर्ट का प्रकाशन।

आशुतोष ने इन 22 वर्षों में 12 वर्ष ग्राउंड रिपोर्टिंग को दिए। उनकी भारत- नेपाल सीमा पर ट्रेन से होने वाली तस्करी की एक्सक्लूसिव रिपोर्टिंग को ईटीवी ग्रुप के चेयरमैन रामोजी राव ने सराहा और प्रशस्ति पत्र से नवाजा। आशुतोष ने प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और डिजिटल मीडिया के तीनो फॉर्म में काम किया है। नेटवर्क 18 में बुलेटिन प्रोड्यूसर के तौर पर कार्य करते हुए आधे- आधे घंटे के कई चर्चित कार्यक्रम बनाए। जिसमें ‘चलो चलें अमरनाथ’ आज भी लोग पसंद करते हैं। आशुतोष ने लोकसभा चुनाव 2019 में उत्तर प्रदेश की 80 सीटों का एकांतिक प्रोफाइल इलेक्ट्रानिक मीडिया के लिए बनाया। जिसे नेटवर्क में काफी सराहा गया। आशुतोष खबरों के पीछे की कहानी को पकड़ने में माहिर हैं। उन्होंने छोटी से छोटी खबर को उसे न्यूज वैल्यू तक पहुंचाया। वे भारतीय राजनीति के मझे हुए खिलाड़ियों की कहानियों को किताबों से खोजकर निकालने के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने लालू प्रसाद यादव, कर्पूरी ठाकुर सहित कई नेताओं की जीवनी से अनसुनी कहानी खोजी और उसे रेट्रो स्टोरी का रूप दिया।

अनुभव-
डिजिटल, प्रिंट और इलेक्ट्रानिक पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय। 2001 में इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी दैनिक जनसत्ता के कोलकाता संस्करण में असाइमेंट बेस्ड फीचर राइटर से शुरुआत। बाद के दिनों में हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और आदर्शन समाचार पत्रिका में स्वतंत्र लेखन। 2003 में ईटीवी नेटवर्क में संवाददाता के तौर पर योगदान। 2009 में मौर्य टीवी में कार्य। उसके बाद हिंद्स्तान दैनिक मुजफ्फरपुर संस्करण में लोकल पेज इंचार्ज, फोकस टीवी, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय नई दिल्ली और प्रभात खबर डिजिटल, नेटवर्क 18 में काम करने का सौभाग्य मिल चुका है। बांग्ला थियेटर ‘अल्काप’ के आठ प्रोडक्शन में कार्य करने का अनुभव।

अवार्ड और पुरस्कार
2005 से 2009 के बीच 12 बेस्ट स्टोरी ऑफ द डे का पुरस्कार
मौर्य टीवी पटना में ऑफ बीट स्टोरी इंचार्ज के तौर पर सम्मान
LIB बिहार चैप्टर की ओर से प्रेरणास्रोत सम्मान
2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की ओर से ‘स्टोरी ऑफ द मंथ’ का पुरस्कार

साक्षात्कार-
आशुतोष ने अपने पत्रकारिता करियर में अब तक प्रमोद महाजन, अमर सिंह, जया प्रदा, राजनाथ सिंह, लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, मालिनी अवस्थी, कुनिका सदानंद, रवि किशन, मनोज तिवारी मृदुल और भरत शर्मा के अलावा गीतकार गुलजार, अभिनेता पीयूष मिश्रा, सौरभ शुक्ला, सतीश कौशिक सहित वरिष्ठ पत्रकार और पेड न्यूज के खिलाफ अभियान चलाने वाले पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर प्रभाष जोशी का इंटरव्यू कर चुके हैं।… और पढ़ें