NSE का नया CAS सिस्टम: आज से बदल गया क्लोजिंग का तरीका, ट्रेडर्स के लिए जरूरी गाइड
आज, गुरुवार 13 अगस्त 2026 को वीकली एक्सपायरी के साथ ही NSE का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू हो गया है। इससे शेयर बाजार में क्लोजिंग प्राइस तय होने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब सेटलमेंट पुराने वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) के बजाय नए CAS इक्विलिब्रिया प्राइस के आधार पर होगा। कैश मार्केट दोपहर 3:15 बजे इस नए सिस्टम में शिफ्ट हो जाएगा, जबकि ऑक्शन प्रक्रिया के दौरान फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग दोपहर 3:40 बजे तक चालू रहेगी।
नए सिस्टम के तहत तीन चरणों की प्रक्रिया होगी, जिससे कम समय में भारी ट्रेडिंग और लिक्विडिटी का असर दिखेगा। दोपहर 3:15 से 3:20 बजे का समय continuous ट्रेडिंग से ट्रांसफर का होगा। इसके बाद 3:20 से 3:25 बजे के बीच ऑर्डर प्लेस करने और उनमें बदलाव करने की विंडो मिलेगी। 3:25 बजे के बाद कभी भी ‘रैंडम क्लोज’ के जरिए CAS मैच पूरा होगा। ध्यान रखें, 3:25 बजे के बाद मार्केट ऑर्डर लगाने से बचें क्योंकि अचानक प्राइस गैप आ सकता है। वहीं ऑक्शन के दौरान स्टॉक फ्यूचर्स पर ±3 फीसदी का रिस्क बैंड लागू हो सकता है।

CAS टाइमलाइन: जानें सेटलमेंट के पुराने और नए नियम
पुराने नियम में क्लोजिंग प्राइस निकालने के लिए आखिरी 30 मिनट के VWAP का इस्तेमाल होता था। लेकिन नए CAS सिस्टम में ऑक्शन मैचिंग के जरिए एक सिंगल इक्विलिब्रिया प्राइस तय होगा। अब स्टॉक डेरिवेटिव्स का एक्सपायरी सेटलमेंट इसी नए क्लोजिंग प्राइस के आधार पर होगा। वहीं इंडेक्स की क्लोजिंग उसमें शामिल शेयरों के CAS प्राइस से तय होगी। 3:20 से 3:25 बजे के बीच एक साथ भारी ऑर्डर आने से तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में आखिरी वक्त की वोलैटिलिटी से बचने के लिए लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करना ही ज्यादा सुरक्षित रहेगा।
| पहलुओं की तुलना | पुराना नियम | नया CAS नियम |
|---|---|---|
| क्लोजिंग प्राइस की गणना | 30-मिनट का VWAP | CAS इक्विलिब्रिया प्राइस |
| अहम विंडो (समय) | दोपहर 3:30 बजे तक लगातार ट्रेडिंग | 3:20–3:25 बजे ऑर्डर एंट्री |
| एक्सपायरी प्राइस का जरिया | अंडरलाइंग का VWAP क्लोज | अंडरलाइंग का CAS क्लोज |
| 3:25 बजे के बाद F&O ट्रेडिंग | लागू नहीं (नियम नहीं था) | दोपहर 3:40 बजे तक इजाजत |
| क्लोजिंग पर स्लिपेज का जोखिम | आम तौर पर कम | रैंडम क्लोज के पास अधिक जोखिम |
NSE के नए सिस्टम में आज की एक्सपायरी के लिए रिटेल ट्रेडर्स की चेकलिस्ट
ट्रांसफर के दौरान होने वाले अचानक झटकों से बचने के लिए अपनी इंट्राडे पोजीशन दोपहर 3:15 बजे से पहले ही स्क्वायर-ऑफ कर लें। अगर पोजीशन होल्ड रखनी है, तो समय रहते इंट्राडे को डिलीवरी या नॉर्मल मार्जिन में कन्वर्ट कर लें। दोपहर 3:24 बजे तक सभी पेंडिंग और पुराने GTT ऑर्डर्स कैंसिल कर दें। 3:25 बजे के बाद मार्केट ऑर्डर के बजाय लिमिट या स्टॉप-लिमिट ऑर्डर का ही इस्तेमाल करें। CAS की तैयारी और ऑर्डर कैंसिलेशन का स्टेटस अपने ब्रोकर ऐप पर दोबारा जांच लें। दोपहर 3:40 बजे तक अपनी हेज्ड पोजीशन बनाए रखें और उसके बाद ही सौदों का मिलान करें।
ब्याज दर का गणित: बैंक FD बनाम ट्रेडिंग की लागत
| विवरण | औसत सालाना दर | आज यह क्यों जरूरी है |
|---|---|---|
| बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) | 6%–8% | खाली पड़े कैश पर रिटर्न का पैमाना |
| ब्रोकर मार्जिन/डेबिट ब्याज | 10%–18% | कैश से ज्यादा पोजीशन रखने की लागत |
| मार्जिन शॉर्टफॉल पेनल्टी | 15%+ (सालाना) | CAS के दौरान ऑर्डर फेल होने पर नुकसान |
| नोट | दरें केवल उदाहरण के लिए हैं; सही जानकारी अपने ब्रोकर और बैंक से लें | |
इंडेक्स बनाम स्टॉक डेरिवेटिव्स: टाइमिंग और प्राइस बैंड्स का गणित
इंडेक्स और स्टॉक डेरिवेटिव्स दोनों के लिए ट्रेडिंग बंद होने का कट-ऑफ टाइम आज दोपहर 3:40 बजे रहेगा। आखिरी समय में भारी उतार-चढ़ाव रोकने के लिए स्टॉक्स पर ±3 फीसदी का प्रोटेक्टिव प्राइस बैंड लागू हो सकता है। चूंकि इंडेक्स की क्लोजिंग उसमें शामिल शेयरों के भाव पर निर्भर करती है, इसलिए एक भी शेयर में देरी का असर पूरे इंडेक्स पर दिख सकता है। CAS के दौरान लिक्विडिटी अक्सर कैश मार्केट से निकलकर फ्यूचर्स की तरफ शिफ्ट होती है। इसलिए सतर्क रहें, हर लेग के रिस्क को समझकर चलें और अगले दिन के लिए कोलैटरल व प्लेज की समीक्षा जरूर कर लें।