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भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार का बड़ा फैसला सामने आया है. अभी तक हुई न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार ने भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक मदद के साथ ही परिजन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है.
पटना: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. न्यायिक जांच के अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार द्वारा दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी दिए जाने की घोषणा की. इसकी जानकारी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी. भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में एक युवक का एनकाउंटर किया गया. इस एनकाउंटर का हल्ला पूरे बिहार में मचा. पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हुए. इससे सरकार पर भी जवाबदेही का भारी दबाव बना. इसके बाद अब सरकार ने भरत तिवारी के परिजन को नौकरी देने की घोषणा की है.
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हस्तक्षेप के बाद तेज हुई जांच
बता दें कि इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश था. पीड़ित परिवार ने पटना जाकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी और न्याय की गुहार लगाई थी. मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने के बाद इस मामले की जांच में तेजी आई. पुलिस ने आरोपी जवान की सरकारी सर्विस पिस्टल को पहले ही बैलिस्टिक और फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर पटना भेज दिया था, ताकि यह साफ हो सके कि भरत तिवारी को लगी गोली इसी हथियार से चली थी.
गिरफ्तारी से पहले क्या हुआ?
भरत तिवारी की मौत के बाद परिवार लगातार आरोपित पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा था. इसमें तत्कालीन जगदीशपुर SDPO राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और एसटीएफ जवान अक्षय कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए. मामले में पुलिस अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई भी हुई.
डेढ़ महीने लगे
घटना के करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस ने बिहार एसटीएफ (स्पेशल टास्क फोर्स) के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया. अक्षय कुमार ने ही 17 जून को बिलौटी गांव में आत्मसमर्पण कर चुके भरत तिवारी पर पहली गोली चलाई थी. भरत के परिजनों और सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो के बाद से ही इस एनकाउंटर पर लगातार सवाल उठ रहे थे. आरोपी जवान घटना के बाद से फरार चल रहा था, जिसे पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने तकनीकी सर्विलांस के आधार पर गिरफ्तार किया.
कौन है STF जवान अक्षय कुमार?
बता दें कि अक्षय कुमार बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF की विशेष ऑपरेशन ग्रुप टीम में तैनात जवान है. 17 जून 2026 को भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस टीम की कार्रवाई के दौरान वह भी मौजूद था. इसी कार्रवाई में भरत भूषण तिवारी को गोली लगी और बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस मामले में अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया गया.
पहली गोली चलाने का आरोप क्यों लगा?
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद परिवार ने आरोप लगाया था कि पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत ने अपनी पिस्टल पुलिस के कहने पर फेंक दी थी और सरेंडर कर दिया था. इसके बाद भी उस पर गोली चलाई गई. जांच में अक्षय कुमार पर भरत के ऊपर पहली गोली चलाने का आरोप सामने आया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के समय भरत सोशल मीडिया पर लाइव भी था और उसका वीडियो जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया.
बता दें कि घटना के बाद पुलिस का पक्ष यह रहा कि भरत तिवारी के पास हथियार था और पुलिस टीम के साथ मुठभेड़ की स्थिति बनी थी. वहीं परिवार ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि भरत ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण कर दिया था. इसी विरोधाभास के कारण यह मामला सामान्य पुलिस मुठभेड़ से आगे बढ़कर गंभीर जांच का विषय बन गया.
फेसबुक लाइव वीडियो से बदला पूरा केस
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब भरत तिवारी का एक सोशल मीडिया लाइव वीडियो सामने आया. इस वीडियो में साफ दिख रहा था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने अपनी पिस्टल फेंक दी थी और हाथ उठाकर आत्मसमर्पण कर दिया था. भरत तिवारी की मां आशा देवी और भाई चंदन तिवारी का आरोप है कि निहत्था होने और सरेंडर करने के बावजूद एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने उस पर पहली गोली दागी. परिजनों के अनुसार भरत को कुल 5 गोलियां मारी गईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
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