Patna High Court News:पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश कुमार मनीष की एकलपीठ ने दरभंगा निवासी अजीत कुमार मंडल की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति आर्थिक संकट से परिवार को उबारने के लिए दी जाने वाली सीमित राहत है।

अनुकंपा नियुक्ति उत्तराधिकार का अधिकार नहीं: हाई कोर्ट
मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट जस्टिस कुमार मनीष की एकलपीठ ने दरभंगा निवासी अजीत कुमार मंडल की याचिका को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा- ‘अनुकंपा पर मिलने वाली नौकरी उत्तराधिकार का अधिकार नहीं है, बल्कि यह केवल कर्मचारी की असमय मृत्यु से उत्पन्न हुए आकस्मिक आर्थिक संकट से परिवार को उबारने के लिए दी जाने वाली एक सीमित राहत है।’
अनुकंपा नियुक्ति का क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ता अजीत कुमार मंडल के बड़े भाई दरभंगा जिले के किरतपुर प्रखंड कार्यालय में अनुसेवक (चपरासी) के पद पर कार्यरत थे, जिनकी वर्ष 2012 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अजीत मंडल ने अनुकंपा पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। वर्ष 2016 में जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति ने उनके आवेदन को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि परिवार का एक अन्य सदस्य पहले से ही सरकारी नौकरी में है।
जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति के फैसले को लेकर अजीत मंडल ने हाई कोर्ट का ‘दरवाजा खटखटाया’। अजीत मंडल ने हाई कोर्ट में अनुकंपा नौकरी के लिए अपील करते हुए अपनी याचिका में दलील दी कि सरकारी सेवा में मौजूद उनका दूसरा भाई अलग रहता है। परिवार को किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं देता है।
समिति का फैसला कानूनी रूप से सही: हाई कोर्ट
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने इस दलील का विरोध किया और संबंधित सरकारी प्रावधानों व आदेशों का हवाला दिया। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता का एक अन्य भाई पहले से सरकारी सेवा में है। साथ ही परिवार के पास अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति या अचानक आए वित्तीय संकट का कोई ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
हाई कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति की ओर से वर्ष 2016 में लिए गए फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है, और अजीत मंडल की याचिका को खारिज कर दिया।
