महीनों से जेल में बंद उमर खालिद को जमानत क्‍यों नहीं? CJI सूर्यकांत ने बताया – cji justice surya kant on uapa delhi riots case umar khalid in jail


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जेल में बंद उमर खालिद को जमानत क्‍यों नहीं? CJI सूर्यकांत UAPA पर क्‍या बोले

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CJI Surya Kant News: दिल्‍ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद महीनों से जेल में बंद हैं. खालिद को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) के तहत आरोपी बनाया गया है. लंबे समय से जेल में बंद उमर खालिद को जमानत भी नहीं मिल रही है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने इन तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी है.

जेल में बंद उमर खालिद को जमानत क्‍यों नहीं? CJI सूर्यकांत UAPA पर क्‍या बोलेZoom

CJI जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA से जुड़े मामलों की सुनवाई में देरी पर अपनी राय रखी है. उमर खालिद को इसी कानून के तहत आरोपी बनाया गया है.

CJI Surya Kant News: भारत में न्‍याय प्रणाली की सुस्‍त रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दशकों के बाद भी अदालती फैसले नहीं आते हैं. सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट तक में हजारों-लाखों की तादाद में मुकदमे लंबित हैं. टाइम-बाउंड तरीके से मामलों का निपटारा न होने की वजह से आम याची लंबे समय तक कोर्ट-कचहरी का चक्‍कर लगाने को मजबूर होते हैं. देश में कुछ कानून ऐसे भी हैं, जिनमें जमानत मिलना भी टेढ़ी खीर है. गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) उनमें से एक है. दिल्‍ली दंगा मामले के आरोपी उमर खालिद को UAPA के प्रावधानों के तहत आरोपी बनया गया है. खालिद महीनों से जेल में बंद हैं, पर उन्‍हें जमानत नहीं मिल पा रही है. भारत के प्रधान न्‍यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने UAPA के साथ ही सुनवाई में लेट-लतीफी पर अपनी राय रखी है.

देश में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने पर अक्‍सर ही सवाल उठते रहते हैं. खासकर दिल्ली दंगा मामलों में लंबित ट्रायल और लंबे समय से विचाराधीन कैदियों को जमानत नहीं मिलने को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठे हैं. इन सबके बीच CJI सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसे मामलों का शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का सबसे प्रभावी समाधान है. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपी वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में बंद हैं. इसके बावजूद उन्‍हें जामनत नहीं मिल रही है. उमर खालिद को जमानत न मिलने का मुद्दा अक्‍सर ही उठता रहता है. सीजेआई सूर्यकांत ने किसी विशेष मामले या व्यक्ति का नाम लिए बिना कहा कि यह ऐसा विषय है, जिस पर न्यायपालिका को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है.

स्‍पेशल कोर्ट से उम्‍मीद

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है. उन्होंने बताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिये केंद्र सरकार को यूएपीए, पीएमएलए और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्स्टेंसेज (एनडीपीएस) कानून से जुड़े मामलों की सुवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने के लिए प्रेरित किया गया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमति जताई है और इन कानूनों के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सीजेआई के अनुसार, यदि इन अदालतों के माध्यम से मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर या यथासंभव शीघ्र किया जा सके, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद और जमानत से जुड़े विवाद स्वतः समाप्त हो जाएंगे.

CJI सूर्यकांत को किस बात का विश्‍वास

सीजेआई सूर्यकांत ने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में इन विशेष अदालतों के कारण मुकदमों की सुनवाई तेज होगी और इससे उन आरोपियों की शिकायतों का भी समाधान होगा, जो लंबे समय से ट्रायल पूरा न होने के कारण जेल में हैं. उनका कहना था कि अंतिम रूप से साक्ष्यों का ज्‍यूडिशियल ट्रायल और मुकदमे का निष्कर्ष ही यह तय करेगा कि आरोप कितने टिकाऊ हैं और इसी प्रक्रिया से न्याय सुनिश्चित होगा. दिल्ली दंगों और अन्य यूएपीए मामलों में कई आरोपी वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में हैं. इन मामलों में ट्रायल की धीमी गति और जमानत को लेकर समय-समय पर न्यायपालिका की भूमिका पर बहस होती रही है. ऐसे में सीजेआई सूर्यकांत का यह बयान संकेत देता है कि न्यायपालिका अब विशेष अदालतों के माध्यम से इन संवेदनशील मामलों की सुनवाई में तेजी लाने पर जोर दे रही है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और टाइम-बाउंड बन सके.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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