
उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार के प्रस्ताव पर सभी पक्ष सहमत हों, तो समाधान निकाला जाएगा। सरकार ने कहा कि पिछले कई सालों से सेवा कर रहे शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी तथा मेधा सूची में पात्र उम्मीदवारों को नियुक्त किया जाएगा।

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि ‘यदि राज्य सरकार द्वारा पेश प्रस्ताव पर सभी पक्षों में सहमति बनती है तो शीर्ष अदालत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करके समाधान निकालेगा।’ उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को शीर्ष अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि ‘ इस भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त के बाद पिछले कई सालों से सेवा कर रहे किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाएगी, और उच्च न्यायालय के फैसले के हिसाब से तैयार मेधा सूची में पात्र पाए गए उम्मीदवारों को मौजूदा खाली पदों पर नियुक्ति की जाएगी।’
सरकारी प्रस्ताव पर सहमति
जस्टिस दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने संक्षिप्त दलीलें सुनने के बाद सभी पक्षों को राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर सभी पक्षों सहमति बनाने का सुझाव दिया। पीठ ने कहा कि यदि सभी पक्ष सरकार के इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं तो यह अदालत संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय करने के लिए दखल देते हुए मुद्दे का समाधान निकालेगा। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को सहमति बनाने और इस बारे में शुक्रवार तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 4 अगस्त तक स्थगित करते हुए कहा कि ‘यदि सभी पक्षकारों में सहमति बनती है तो यह अदालत अगली सुनवाई पर अनुच्छेद 142 के तहत इस विवाद का समाधान कर सकता है।’ जस्टिस दत्ता ने यह भी साफ कर दिया कि यदि पक्षकारों में सहमति नहीं बनती है तो उच्च न्यायालय के अगस्त, 2024 के फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई जारी रखेगा। सुप्रीम कोर्ट ने उन पक्षकारों को अपनी लिखित नोट भी बुधवार को पेश करने के लिए कहा है जो अब तक दाखिल नहीं किया है। पीठ ने कहा कि मामले में हर पक्ष के 5 अधिवक्ताओं कारे विस्तार से बहस करने की अनुमति दी जाएगी।
आरक्षण लागू करने में सरकार की भूमिका
उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों (जो छह साल से नौकरी कर रहे हैं) की ओर पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल पिछले छह सालों से शिक्षक के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने पीठ से कहा कि यदि उन्हें अचानक सेवा से हटाया जाता है तो वे बेरोजगार हो जाएंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि चूंकि भर्ती सरकार ने की थीं, ऐसे में आरक्षण लागू करने में सरकार की गलतियों का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतने देता चाहिए। दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग श्रेणी के उम्मीदवारोंल की ओरा से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोस्वामी ने शीर्ष अदालत से कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए तय 27 फीसदी और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 21 फीसदी आरक्षण को उचित तरीके से लागू किया जाना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से उच्च न्यायालय के 13 अगस्त 2024 के फैसले को बहाल रखने की मांग की। उच्च न्यायालय ने आरक्षण को लागू करने में हुई गलतियों के मद्देनजर चयन को रद्द करते हुए राज्य सरकार को नये सिरे से मेधा सूची जारी करने की आदेश दिया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगा दी थी।
पुनः मेधा सूची तैयार करने की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा में सरकार ने कहा है कि ‘यदि उच्च न्यायालय के 13 अगस्त 2024 के फैसले के मुताबिक तैयार की गई मेधा सूची में नए उम्मीदवार योग्य पाए जाते हैं तो उन्हें मौजूदा खाली पदों पर नियुक्त किया जाएगा।’ हालांकि सरकार ने यह कवायद सिर्फ 69 हजार शिक्षकों की नियुक्ति मामले तक सीमित रहेगा और भविष्य में होने वाले किसी भर्ती में इसका कोई लाभ नहीं दिया जाएगा। सरकार ने शीर्ष अदालत में 8270 ऐसे अभ्यर्थियों की संशोधित सूची भी पेश की है जो अभी सेवा में नहीं हैं। राज्य सरकार ने कहा कि 19 मई को आदेश के बाद, राज्य के सक्षम अधिकारियों ने उच्च न्यायालय के 13 अगस्त 2024 के फैसले के अनुसार मेधा सूची को दोबारा तैयार करने सहित कई विस्तृत प्रक्रियाएं पूरी कीं। हलफनामा में कहा गया कि मौजूदा कार्यवाही में 20 जुलाई को एक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें कहा गया है कि भर्ती पूर्ण हो चुकी है और जिन जो लोग 2020 में नियुक्त हो चुके हैं, उन्हें हटाए बगैर, आरक्षित श्रेणी के पात्र लोगों को मौजूदा खाली पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
✦सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती मामले में क्या कहा?−
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य सरकार द्वारा पेश प्रस्ताव पर सभी पक्षों में सहमति बनती है तो समाधान निकाला जाएगा।
✦उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या हलफनामा पेश किया?+