आदिल हसन, रांची। करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से 34वें राष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार किया गया होटवार का खेल गांव आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। मुख्य एथलेटिक्स स्टेडियम के बाहर इतना पानी जमा है कि लोग तंज कस रहे हैं कि यहां अब एथलेटिक्स नहीं, मछली पालन शुरू कर देना चाहिए।
दूसरी ओर, बारिश के दौरान हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम की छत से झरने की तरह पानी टपकता रहा और वुडेन कोर्ट पर पानी भर गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि झारखंड सरकार और सीसीएल हर साल खेल गांव के रखरखाव पर 15 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करती हैं, इसके बावजूद विश्वस्तरीय खेल परिसर की यह दुर्दशा आखिर क्यों?
खेल गांव का रखरखाव सीसीएल के अधीन गठित एलएमसी (लोकल मैनेजमेंट कमेटी) कर रही है। इसके लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग है।
मुख्य एथलेटिक्स स्टेडियम के चारों ओर जलजमाव है, जबकि इंडोर स्टेडियम की छत बारिश में टपक रही है। खिलाड़ियों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सिंथेटिक ट्रैक, वुडेन कोर्ट और अन्य खेल सुविधाओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।
यह पहली बार नहीं है जब खेल गांव की बदहाली चर्चा में आई है। पिछले कई वर्षों से रांची के विभिन्न समाचार पत्रों में खेल गांव की जर्जर होती खेल सुविधाओं, टूटती संरचनाओं, जल निकासी की समस्या, रखरखाव में लापरवाही और खिलाड़ियों की परेशानियों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता रहा है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सका।

सीएम भी लगा चुके हैं फटकार
बीते सप्ताह झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन टिकैत उमराव सिंह शूटिंग रेंज पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने खराब रखरखाव पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और खेल परिसरों को बेहतर स्थिति में रखने के निर्देश दिए।
लेकिन मुख्यमंत्री की नाराजगी के कुछ ही दिनों बाद एथलेटिक्स स्टेडियम के बाहर जलजमाव और इंडोर स्टेडियम की टपकती छत यह बता रही है कि हालात अब भी नहीं बदले हैं।
रखरखाव पर हर साल 15 करोड़ खर्च
खेल गांव झारखंड की सबसे बड़ी खेल परिसंपत्ति है। यदि हर साल 15 करोड़ रुपये से अधिक रखरखाव पर खर्च होने के बावजूद खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो खर्च की गुणवत्ता और निगरानी दोनों की समीक्षा जरूरी है। करोड़ों रुपये की इस खेल अधोसंरचना को उपेक्षा के कारण बर्बाद होने से बचाने के लिए जवाबदेही तय करनी होगी।