राम मंदिर की हुंडियों से कितनी रकम उड़ी? क्यों कभी पता नहीं चल पाएगी हकीकत, तगड़ी थी प्लानिंग, Uttar-pradesh Hindi News


अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ा खुलासा! आखिर क्यों कभी पता नहीं चल पाएगा कि हुंडियों से कितनी रकम चोरी हुई? जानें कैसे अनुकल्प और अविनाश ने ट्रस्ट का भरोसा जीत रचा पूरा खेल।

अयोध्या के राम मंदिर की हुंडियों यानी दानपात्रों से चोरी की गई रकम का सटीक आंकड़ा जुटा पाना न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि लगभग नामुमकिन है। राम मंदिर दान चोरी मामले के जानकार सूत्रों ने बताया है कि गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कम से कम चार ऐसे हैं, जो काफी पहले से राम मंदिर में काम कर रहे थे। ये तब से वहां मौजूद थे, जब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा कैश मैनेजमेंट के लिए हायर की गई प्राइवेट एजेंसी ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ की एंट्री भी नहीं हुई थी।

कैसे हुई आरोपियों की एंट्री?

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन चार मुख्य आरोपियों ने दान के पैसों के गबन में सीधी भूमिका निभाई, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे शामिल हैं। जब महाकुंभ 2025 के दौरान राम मंदिर की हुंडियों में अतिरिक्त पैसा आने लगा, तब एसबीआई के पास काम के लिए तुरंत मैनपावर उपलब्ध नहीं थी।

इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों ने उन वालंटियर्स की पहचान शुरू की, जिन्होंने अतीत में अहम कार्यक्रमों के दौरान अच्छा काम किया था। इसी दौरान इन चारों को कई अन्य वालंटियर्स के साथ काम पर रखा गया था।

अनुकल्प ने जीता था चंपत राय और अनिल मिश्रा का भरोसा

खबर के मुताबिक, आरोपी अनुकल्प मिश्रा मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण, पहली और दूसरी वर्षगांठ के समारोहों और दीपोत्सव जैसे प्रमुख आयोजनों में शामिल था। समय के साथ वह अहम बैठकों का नियमित चेहरा बन गया और उसने चंपत राय व अनिल मिश्रा का भरोसा जीत लिया।

इसी का फायदा उठाकर अनुकल्प ने अपने जानकारों की पहचान ट्रस्ट के पदाधिकारियों से कराई। नकद गिनने का काम बांटे जाने से काफी पहले ही उसने इनकी नियुक्ति करवा दी थी। दशकों से भगवा संगठनों से जुड़े होने के चलते, ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने भी एक अनुमान के आधार पर इन वालंटियर्स को नकदी गिनने की जिम्मेदारी सौंप दी थी।

एजेंसी के आने से पहले ही जमा चुके थे जड़ें

एसबीआई ने दान बॉक्स से इकट्ठा होने वाले कैश को मैनेज करने के लिए वाराणसी की निजी एजेंसी ‘सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज’ को बाद में जिम्मेदारी सौंपी। कंपनी ने कैश काउंटिंग के लिए 40 अन्य युवाओं को तैनात किया और उनके साथ उन वालंटियर्स को भी काउंटिंग एजेंट बना दिया गया, जो पहले से ही वहां नकदी संभाल रहे थे।

किस आरोपी से कितनी हुई रिकवरी?

पुलिस अब तक आरोपियों के पास से लगभग 80 लाख रुपये बरामद कर चुकी है। इसका ब्योरा इस प्रकार है:

अविनाश शुक्ला: 20.39 लाख रुपये (सबसे अधिक) और आभूषण

करुणेश पांडे: 18.63 लाख रुपये

अनुकल्प मिश्रा: 16.82 लाख रुपये

लवकुश मिश्रा: 14.25 लाख रुपये

रमाशंकर मिश्रा: 7.32 लाख रुपये

मनीष यादव: 2 लाख रुपये

बाकी बचे दो गिरफ्तार आरोपी- राम शंकर यादव (उर्फ टीनू) और सुभाष श्रीवास्तव सीधे तौर पर कैश काउंटिंग में शामिल नहीं थे। मंदिर से जुड़े एक अंदरूनी सूत्र की बातों की पुष्टि करते हुए, पुलिस की जांच मुख्य रूप से अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश की चौकड़ी पर ही टिकी हुई है, क्योंकि पुलिस इन्हीं की रिमांड मांग रही थी।

लापरवाही और चेकिंग के अभाव में हुई चोरी

इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखने वाले एडवोकेट प्रांशु अग्रवाल बताते हैं कि यह मामला नैतिक पतन का उदाहरण है। उन्होंने कहा, “कैश से घिरे होने के कारण लालच ने उन्हें भ्रष्ट कर दिया और समय के साथ उनके मूल्य गिर गए।”

अग्रवाल ने ट्रस्ट और बैंक के पदाधिकारियों की लापरवाही को भी जिम्मेदार ठहराया। उनके मुताबिक, “महत्वपूर्ण मामलों में लापरवाही और कैजुअल रवैया अपनाने के लिए पदाधिकारियों पर निश्चित रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। इंटरनल कंट्रोल और चेकिंग के अभाव ने ही इस अपराध को बढ़ावा दिया। यही वजह है कि चुराए गए पैसों की सटीक रकम और यह काम कितने समय तक चला, यह कभी तय नहीं किया जा सकेगा।”



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