मानसून सत्र में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार भारतीय रेलवे ने 2014 से 2026 तक 5.56 लाख से ज्यादा भर्तियां की हैं।
भारत में सरकारी नौकरी का मतलब अक्सर रेलवे की नौकरी ही माना जाता है। देश के करोड़ों युवाओं का सपना होता है कि वे किसी तरह भारतीय रेलवे का हिस्सा बन जाएं और अपनी जिंदगी संवार लें। इसी सपने और रोजगार के गरमागरम मुद्दे पर मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एक बेहद अहम जानकारी सामने आई है। 22 जुलाई 2026 को रेल मंत्रालय ने संसद में जो आंकड़े पेश किए जिन से उन लाखों-करोड़ों युवाओं के लिए एक बड़ी राहत भी मिली हैं, जो दिन-रात रेलवे की परीक्षाओं की तैयारी में अपना पसीना बहा रहे हैं। मगर इस बीच आंकड़ों पर गौर करें तो कुछ हैरान करने वाली भी बात सामने आई है। सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 से लेकर 30 जून 2026 तक रेलवे ने कुल 5.56 लाख लोगों को रोजगार दिया है। अगर आप इस आंकड़े को गहराई से समझें तो पता चलेगा कि सरकार ने महज कुछ ही सालों में भर्तियों की रफ्तार में जबरदस्त इजाफा किया है। पिछले साल अप्रैल में जब सरकार ने ये आंकड़े सदन में रखे थे, तब 2014 से 2023-24 तक भर्तियों का आंकड़ा 5.02 लाख था। लेकिन अब महज ढाई साल (2023-24 के अंत से 2026 के मध्य) के भीतर ही रेलवे ने अपने खाते में करीब 54,000 नई भर्तियां और जोड़ ली हैं। वहीं अगर इसकी तुलना पुरानी सरकार यानी 2004-05 से 2013-14 के बीच के दस सालों से करें, तो उस दौरान कुल 4.11 लाख भर्तियां ही हुई थीं। यह पुराना बेंचमार्क आज भी अपनी जगह पर कायम है, लेकिन 2014 के बाद का ग्राफ तेजी से ऊपर की तरफ भाग रहा है।
एनुअल कैलेंडर ने बदल दी पूरी तस्वीर
आखिर अचानक से भर्तियों की इस रफ्तार में इतनी तेजी कैसे आ गई? इसका सीधा सा जवाब रेल मंत्रालय ने एनुअल कैलेंडर यानी वार्षिक कैलेंडर सिस्टम को बताया है। साल 2024 में ग्रुप सी की भर्तियों के लिए इस नए सिस्टम को लागू किया गया था और सच कहा जाए तो इसने पूरी व्यवस्था को पटरी पर ला दिया है। इसके जरिए नौकरी की चाहत रखने वाले उम्मीदवारों को अब एक तय वक्त पता होता है, एग्जाम की तारीखों को लेकर कोई कन्फ्यूजन नहीं रहता और नोटिफिकेशन से लेकर जॉइनिंग तक का काम बड़ी तेजी से होता है। इसी कैलेंडर के दम पर साल 2024, 2025 और 2026 को मिलाकर अब तक कुल 1,61,889 नॉन-गैजेटेड पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।
अगर हम सिर्फ साल 2024 की बात करें, तो यह भर्तियों के लिहाज से सबसे बंपर साल रहा। इस दौरान 10 सेंट्रलाइज्ड एंप्लॉयमेंट नोटिफिकेशन जारी किए गए, जिनमें 92,116 पदों पर वैकेंसी निकाली गई। इनमें असिस्टेंट लोको पायलट (एएलपी), टेक्नीशियन, आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर, कांस्टेबल, जूनियर इंजीनियर और ट्रैक मेंटेनर जैसे अहम पद शामिल थे। आपको यह जानकर शायद हैरानी होगी कि इन पदों के लिए पूरे देश से 3.58 करोड़ युवाओं ने आवेदन किया। सिर्फ लेवल-1 के एग्जाम में ही 1.08 करोड़ उम्मीदवार शामिल हुए। पिछले साल यानी 2025 में भी नौ अलग-अलग नोटिफिकेशन के जरिए 51,970 पदों पर भर्तियां निकाली गईं। इनमें असिस्टेंट लोको पायलट के 10,970 पदों से लेकर लेवल-1 के 22,195 पद शामिल थे। इसके लिए पहले चरण के कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) हो चुके हैं, जिसमें 90.9 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई।
इस साल 2026 की बात करें, तो अब तक तीन नोटिफिकेशन जारी हो चुके हैं, जिनके जरिए 17,803 पदों पर भर्तियां होनी हैं। इनमें मार्च में 11,127 असिस्टेंट लोको पायलट, मई में 6,557 टेक्नीशियन और जून में 119 सेक्शन कंट्रोलर के पद शामिल हैं। चूंकि ये भर्तियां हाल ही में निकली हैं, इसलिए अभी इनके एग्जाम होने बाकी हैं।
जबरदस्त है कॉम्पिटिशन
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन तमाम आंकड़ों के पीछे एक बहुत बड़ी सच्चाई भी छिपी है और वह भारत में सरकारी नौकरी पाने की मारामारी है। 2024 में हर एक पद के लिए औसतन 389 उम्मीदवार कतार में खड़े थे। सबसे ज्यादा तगड़ा कॉम्पिटिशन आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर (RPF SI) के पदों के लिए दिखा, जहां 452 वैकेंसी के लिए 15.35 लाख से ज्यादा आवेदन आए। आसान शब्दों में कहें तो एक सीट के लिए 3,400 लोगों के बीच कांटे की टक्कर थी। एनटीपीसी अंडर-ग्रेजुएट (NTPC-UG) पदों का भी यही हाल था, जहां एक पद के लिए करीब 1,837 उम्मीदवारों ने दावा ठोका। यही हाल 2025 में भी रहा। सेक्शन कंट्रोलर के महज 368 पदों के लिए 4.33 लाख लोगों ने फॉर्म भर दिया, यानी एक सीट के लिए 1,179 लोगों के बीच मुकाबला।
पेपर लीक पर सरकार का बड़ा दावा
मौजूदा वक्त की बात करें तो 2026-27 के मौजूदा साल में (30 जून तक) टेक्नीशियन, जूनियर इंजीनियर और पैरामेडिकल स्टाफ जैसे पदों के लिए 3,300 से ज्यादा उम्मीदवारों के पैनल फाइनल किए जा चुके हैं। इनमें से ज्यादातर पद रेलवे की सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। आरक्षण के मुद्दे पर सरकार ने सदन में साफ किया है कि एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के तहत पूरा फायदा दिया जा रहा है। इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट पर रखे जाने वाले कर्मचारियों को लेकर भी मंत्रालय ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि यह सिर्फ एक कामचलाऊ और अस्थायी व्यवस्था है, ताकि रेलवे का काम बिना रुके सुचारू रूप से चलता रहे। इसे स्थायी नौकरी की जगह लेने वाला कदम बिल्कुल न माना जाए। सबसे बड़ी और राहत की बात जो मंत्रालय ने आखिर में कही, वो यह है कि करोड़ों उम्मीदवारों और पंद्रह अलग-अलग भाषाओं में 100 से ज्यादा शहरों में परीक्षा कराने के बावजूद इस पूरे भर्ती चक्र में पेपर लीक या किसी भी तरह की धांधली का कोई मामला सामने नहीं आया है।