विदेश में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, 58 कंपनियां ब्लैकलिस्ट करने के बाद क्या कर रही सरकार? संसद में दिया जवाब


नई दिल्ली। संसद में इस समय मॉनसून सत्र चल रहा है। और सदन में विदेश मंत्री ने विदेश में काम करने वाले भारतीय के बारे में एक अहम जानकारी शेयर की। ये जानकारी विदेशों में भारतीयों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और ‘जॉब सब्स्टीट्यूशन’ (जिसका मतलब है जिस काम के लिए बुलाया गया था, वो काम न देकर कोई और काम देना) के बारे में थी। कांग्रेस सांसद बिजेंद्र सिंह ओला ने इस बार में जानकारी मांगी थी और कहा था कि सरकार ये बताए कि वो विदेश में जाने वाले भारतीयों के हितों के कैसे सुरक्षित रख रही है।

कांग्रेस सांसद ने ये भी पूछा कि क्या सरकार विदेश में काम कर रहे हर भारतीय मज़दूर/वर्कर का उस देश में मौजूद भारतीय एम्बेसी/हाई कमीशन में ज़रूरी रजिस्ट्रेशन पक्का करने का प्रस्ताव रखती है, ताकि एम्प्लॉयर्स की क्रेडिबिलिटी पक्की हो सके और इमरजेंसी सिचुएशन में उन्हें तुरंत मदद मिल सके। इन सारे सवालों पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जवाब में बताया कि साल 2021 से 2026 के बीच विदेश में अलग काम दिए जाने से जुड़ी 131 शिकायतें दर्ज की गईं, जिन पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने 9 रिक्रूटिंग एजेंसियों (RAs) का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सस्पेंड कर दिया है और 58 विदेशी नियोक्ताओं (Employers) को ‘प्रायर अप्रूवल कैटेगरी’ (ब्लैकलिस्ट की श्रेणी) में डाल दिया है। आइए जानते हैं विदेश मंत्री ने और क्या कहा?

सवाल: विदेश में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी रोकने के लिए क्या कानून है?
जवाब: विदेश जाने वाले भारतीय मजदूरों (खासकर ECR पासपोर्ट धारकों) की सुरक्षा उत्सर्जन अधिनियम, 1983 (Emigration Act, 1983) के तहत की जाती है। किसी भी विदेशी कंपनी को भारतीय श्रमिकों को काम पर रखने के लिए भारत सरकार के eMigrate पोर्टल (emigrate.gov.in) पर रजिस्टर होना जरूरी है।

इसके अलावा किसी भी भारतीय मजदूर को बुलाने से पहले विदेशी कंपनी, भारतीय एजेंसी और मजदूर के बीच एक पारदर्शी एम्प्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट पर साइन होने जरूरी है, जिससे भारतीय एजेंसी और श्रमिकों को पता रहे कि वो बाहर किस काम के लिए जा रहे हैं। वहीं अगर किसी भी हालत में विदेशी कंपनी की ओर से इस समझौते का उल्लंघन होता है तो Protector General of Emigrants तुरंत इस पर कड़ा एक्शन लेंगे।

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सवाल: धोखाधड़ी के मामले में क्या सजा दी जाती है?
जवाब: धोखाधड़ी के मामले में Emigration Act, 1983 के नियम 10 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा दी जाती है। भारतीय रिक्रूटिंग एजेंसी की ओर से धोखाधड़ी होती है तो उसका लाइसेंस तुरंत सस्पेंड कर दिया जाता है, साथ ही बैंक में जमा की गई गारंटी भी जब्त कर ली जाती है।

वहीं अगर विदेशी कंपनी किसी भी तरीके से धोखाधड़ी करती पाइ जाती है तो उसे ‘प्रायर अप्रूवल कैटेगरी’ (PAC) में डाल दिया जाता है, जिससे वे बिना सरकारी मंजूरी के भारतीय श्रमिकों की भर्ती नहीं कर सकतीं। विदेश मंत्री नें संसद में बताया कि साल 2021 से 2026 के बीच यूएई, कुवैत, सऊदी अरब, कतर और जॉर्डन जैसी जगहों की 58 कंपनियों पर ये प्रतिबंध लगाया जा चुका है।

सवाल: काम की तलाश में विदेश जाने वाली महिलाओं के लिए क्या नियम हैं?
जवाब: विदेशों में महिला प्रवासियों की सुरक्षा के लिए भी खास प्रावधान हैं। अगर कोई ECR पासपोर्ट धारक महिला, छोटे-मोटे काम के लिए विदेश जाना चाहती है तो वो कम से कम 30 साल की होनी चाहिए। नर्सों को छोड़कर 30 साल से कम की महिलाएं ऐसे कामों के लिए विदेश नहीं जा सकती।

वहीं संसद में ये भी बताया गया कि महिलाओं की भर्ती केवल राज्य के द्वारा चलाई जाने वाली सरकारी एजेंसियों या सीधे विदेशी नियोक्ता द्वारा ही हो सकती है। विदेश मंत्री ने ये भी बताया कि महिला कामगार को रखने वाली विदेशी कंपनी को संबंधित भारतीय दूतावास में $2,500 की वित्तीय गारंटी जमा करानी होती है।

सवाल: विदेश में काम करने वाले श्रमिकों के लिए कौन-सी बीमा योजना लागू है?
जवाब: ECR देशों में जाने वाले सभी ECR पासपोर्ट धारकों के लिए ‘प्रवासी भारतीय बीमा योजना’ (PBBY) जरूरी है। इसका प्रीमियम भी बहुत कम है, 2 साल के लिए ₹275 और 3 साल के लिए ₹375। जिसके तहत काम करने की साइट पर हुई दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता होने पर ₹10 लाख तक का बीमा कवर प्रदान किया जाता है। संसद में बताया कि साल 2006 से मार्च 2026 तक 87 लाख से अधिक (87,10,423) बीमा पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं।

सवाल: विदेश में इमरजेंसी या शिकायत होने पर श्रमिक कहां संपर्क कर सकते हैं?
जवाब: विदेश में फंसे या परेशान भारतीय नागरिक और श्रमिक मदद पोर्टल (MADAD), CPGRAMS और eMigrate पोर्टल के जरिए ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। वहीं मल्टी लिंगुअल 24×7 इमरजेंसी नंबर, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी शिकायत की जा सकती है। सरकार सभी विदेश जाने वाले नागरिकों को सलाह देती है कि वे संबंधित देश के भारतीय दूतावास/उच्चायोग के साथ अपना रजिस्ट्रेशन पहले से ही करवा लें ताकि भविष्य में कभी परेशानी न आए।

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