SEBI का बड़ा एक्शन: Axis Mutual Fund Front Running Case में 7 साल का बैन, क्या है मामला? | SEBI Cracks Down on Axis Mutual Fund Front Running Case, Final Order Issued in ₹30.55 Crore Illegal Profit Matter


SEBI का बड़ा एक्शन: Axis Mutual Fund Front Running Case में 7 साल का बैन, क्या है मामला?

SEBI ने भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित मामलों में से एक Axis Mutual Fund Front Running Case में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। 146 पन्नों के विस्तृत आदेश में सेबी ने कई आरोपियों पर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया है और उन्हें कई वर्षों तक शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। सेबी का आरोप है कि म्यूचुअल फंड के बड़े ट्रेड्स से जुड़ी गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग कर लगभग ₹30.55 करोड़ का कथित गैरकानूनी मुनाफा कमाया गया।

SEBI

SEBI के अनुसार यह मामला सितंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच हुए ट्रेड्स से जुड़ा है। जांच में आरोप लगाया गया कि उस समय Axis Mutual Fund के पूर्व चीफ डीलर वीरेश जोशी के पास बड़े संस्थागत ट्रेड्स की गोपनीय जानकारी होती थी।

आरोप है कि यह जानकारी दुबई में बैठे ट्रेडर बृजेश कुरानी तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद कथित तौर पर कई ट्रेडिंग अकाउंट्स के माध्यम से बाजार में पहले से खरीद और बिक्री कर करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया गया।

Front Running शेयर बाजार में होने वाला एक गैरकानूनी तरीका है। जब किसी व्यक्ति को पहले से यह जानकारी मिल जाती है कि कोई बड़ा निवेशक या म्यूचुअल फंड किसी शेयर में भारी खरीद या बिक्री करने वाला है, तो वह उसी जानकारी का फायदा उठाकर पहले खुद ट्रेड कर लेता है। बाद में जब बड़े निवेशक का ऑर्डर बाजार में आता है और शेयर की कीमत बदलती है, तब वह अपने शेयर बेचकर या खरीदकर मुनाफा कमा लेता है। भारत में Front Running पूरी तरह प्रतिबंधित है।

SEBI की जांच में क्या सामने आया?

सेबी की जांच के अनुसार यह मामला किसी शिकायत से नहीं बल्कि उसके Surveillance System के जरिए सामने आया। सिस्टम ने Axis Mutual Fund के कुछ ट्रेड्स में असामान्य पैटर्न पकड़ा, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू हुई। जांच में कॉल रिकॉर्ड्स, WhatsApp चैट्स, ट्रेडिंग पैटर्न, बैंकिंग ट्रेल और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। SEBI का दावा है कि कथित नेटवर्क अलग-अलग लोगों के ट्रेडिंग अकाउंट्स का इस्तेमाल कर एक जैसी रणनीति अपनाता था।

SEBI के मुताबिक

  • Mutual Fund की खरीद से पहले शेयर खरीदना।
  • Mutual Fund की खरीद के बाद ऊंची कीमत पर शेयर बेचना।
  • Mutual Fund की बिक्री से पहले शेयर बेचना।
  • बाद में कम कीमत पर दोबारा खरीदना।

रेगुलेटर ने इसे Buy-Buy-Sell और Sell-Sell-Buy ट्रेडिंग पैटर्न बताया है।

कितनी हुई कथित गैरकानूनी कमाई?

SEBI के अनुसार पूरे नेटवर्क ने लगभग ₹30.55 करोड़ का कथित गैरकानूनी लाभ कमाया। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा Visa Capital Partners के माध्यम से आया, जहां लगभग ₹14 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया। SEBI ने इस राशि को Investor Protection and Education Fund (IPEF) में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है। साथ ही 12% वार्षिक ब्याज भी जमा करने को कहा गया है।

किस पर क्या कार्रवाई हुई?

SEBI के अंतिम आदेश के अनुसार

  • वीरेश जोशी पर ₹3 करोड़ का जुर्माना, 7 साल का मार्केट बैन।
  • बृजेश कुरानी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना, 7 साल का मार्केट बैन।
  • दो अन्य आरोपियों पर 5 साल का प्रतिबंध, अन्य आरोपियों पर 3 साल का मार्केट बैन।

पूर्व चीफ डीलर वीरेश जोशी ने, हालांकि सभी आरोपों से इनकार किया है।

उन्होंने कहा कि वे केवल फंड मैनेजर के निर्देशों के अनुसार ट्रेड्स को निष्पादित करते थे। कौन-सा शेयर खरीदना या बेचना है, इसका निर्णय उनका नहीं होता था। उन्होंने सेबी की जांच और सबूतों पर भी सवाल उठाए हैं।

यह मामला बताता है कि भारतीय शेयर बाजार में गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग बेहद गंभीर अपराध माना जाता है। SEBI ने अपने अंतिम आदेश के जरिए साफ संकेत दिया है कि यदि कोई भी व्यक्ति इनसाइडर जानकारी या गोपनीय ट्रेडिंग डेटा का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी नियामकीय कार्रवाई की जाएगी।

अब इस मामले में आगे कानूनी चुनौती आती है या नहीं, इस पर बाजार की नजर बनी रहेगी।



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