संसद के मॉनसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि शिवसेना यूबीटी और टीएमसी के बागी सांसदों के विलय की मंजूरी का विरोध किया गया है।
संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले ही हंगामे के आसार दिखने लगे हैं। रविवार को केंद्र की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्ष के सांसदों ने वॉकआउट कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में टीएमसी और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों को बुलाए जाने पर विपक्षी सांसद नाराज हो गए और वे बैठक छोड़कर चले गए। मॉनसून सत्र में वैधानिक एजेंडे पर बात करने के लिए यह बैठक बुलाई गई थी। बाद में बताया गया कि थोड़ी देर बाद विपक्ष के कई सांसद वापस लौटे और सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए।
बागी सांसदों के विलय पर विरोध
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि विपक्ष ने तृणमूल और शिवसेना (उबाठा) के बागी सांसदों पर स्पीकर के फैसले के विरोध में सर्वदलीय बैठक से बहिर्गमन का फैसला किया गया है। वहीं सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास ने कहा कि बागी तृणमूल सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाकर न्याय का उपहास किया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। साथ ही, एक कम चर्चित राजनीतिक दल ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के लिए लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था को भी स्वीकृति प्रदान की। शिवसेना(UBT ) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि पार्टी से बगावत करने वाले सभी सांसदों को अयोग्य ठहराया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और इसके 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। संसद के प्रत्येक सत्र से पहले होने वाली इस बैठक में सरकार आमतौर पर अपने विधायी कार्यक्रम की जानकारी देती है और सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में सहयोग का आग्रह करती है।
शिवसेना यूबीटी सांसद अरविंद सावंत ने कहा, संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि पार्टी बदलने वाले 6 सांसदों को मान्यता दी जाए। यह गैरकानूनी है और इसलीए हम इसका विरोध करते हैं।टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, किस आधार पर बागी सांसदों को संसदीय कार्य मंत्री ने बुलाया है। जबकि टीएमसी की संख्या अब भी 28 ही दिखाई जा रही है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद एन.डी. गुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात को ‘हाइजैक’ कर लिया गया है। इस संबंध में उनकी याचिका पर अभी विचार नहीं किया गया है। उन्होंने इसे अवैध बताया और कहा कि इन सांसदों को अलग और स्वतंत्र सीटें आवंटित करना गलत है। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बताया और कहा कि सरकार तथा सदन का प्रबंधन का रवैया लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने कहा किविपक्षी दलों ने इसी मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सर्वदलीय बैठक से सांकेतिक बहिर्गमन किया।