‘सलवार खोलना..’: सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक संवेदनशीलता गाइडलाइंस मंजूर, CJI सूर्यकांत का निर्देश- अदालतें सख्ती से पालन करें – supreme court approves judicial sensitivity guidelines cji bench to courts strictly adhere


यौन अपराध से जुड़े मामलों में अदालतों की असंवेदनशील टिप्पणियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइंस को मंजूरी दे दी है। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने निर्देश दिया है कि न्यायिक संवेदनशीलता गाइडलाइंस का पालन सभी अदालतें करेंगी।

Supreme Court approves judicial sensitivity guidelines
यौन अपराध पर असंवेदनशील अदालती टिप्पणियों पर गाइडलाइंस को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी (फोटो-एनबीटी)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराध से जुड़े मुकदमों में न्यायिक संवेदनशीलता बनाए रखने को लेकर तैयार की गई नेशनल गाइडलाइंस को मंजूरी दे दी है। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने देश की सभी अदालतों को निर्देश दिया है कि वह मंजूर की गई गाइडलाइंस या हैंडबुक में दिए गए दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

न्यायिक संवेदनशीलता के लिए गाइडलाइंस

यौन अपराध से जुड़े केस में न्यायिक संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए नेशनल जुडिशल एकेडमी की एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई।

कमेटी ने बहुत ही शानदार काम किया है।

सीजेआई सूर्यकांत

न्यायिक आदेश का हिस्सा बनेगी गाइडलाइंस

  • लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि मंजूर की गई गाइडलाइंस या हैंडबुक को सुप्रीम कोर्ट, देश के सभी हाई कोर्ट के साथ-साथ जिला अदालतों की वेबसाइट (जहां यह उपलब्ध हैं) पर अपलोड किया जाएगा।
  • यह गाइडलाइंस नेशनल जुडिशल एकेडमी समेत सभी प्रदेश न्यायिक अकादमियों में भी वितरित किया जाएगा।
  • यह गाइडलाइंस नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और विभिन्न यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में भी सर्कुलेट किए जाएंगे।
  • बाद में यह जानकारी भी दी गई कि सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृत गाइडलाइंस को न्यायिक आदेश का हिस्सा बनाया जाएगा।

एफआईआर या चार्जशीट के समय भी पालन

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है, ‘सभी राज्यों के डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को यह भी निर्देश दिया जाता है कि सभी पुलिस स्टेशनों को ये जरूरी दिशा-निर्देश जारी करें कि एफआईआर या चार्जशीट दायर करते समय हैंडबुक में बताई गई बातों का पालन करें।’ गाइडलाइन की विस्तृत जानकारी इसके अपलोड होने पर सामने आएगी।

इलाहाबाद कोर्ट के आदेश के बाद गाइडलाइंस

  • नेशनल जुडिशल एकेडमी की यह रिपोर्ट 17 मार्च, 2025 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश से पैदा हुई परिस्थितियों में स्वत: संज्ञान के केस में तैयार की गई है।
  • इस मामले में अदालत ने टिप्पणी की थी कि लड़की के पजामे का नाड़ा खोलना और उसके ब्रेस्ट को पकड़ना रेप की कोशिश के दायरे में नहीं आता।
  • एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार सीनियर वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसी घटनाएं आए दिन होने लगी हैं।
  • मसलन, 9 जुलाई को ही पटना हाई कोर्ट ने एक ऐसा ही आदेश दिया है।
  • इसमें पटना हाई कोर्ट ने यौन अपराध के एक केस में कहा कि महिला का सलवार खोलना और उसकी छाती को दबाना रेप की कोशिश नहीं थी।

पटना हाई कोर्ट की टिप्पणी पर सीजेआई नाराज

पटना हाई कोर्ट के आदेश की ओर इशारा करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जजों की भी ड्यूटी है कि वे कुछ रिसर्च भी करें। उन्होंने कहा, ‘स्टाफ कुछ भी नहीं कर रहे हैं।’

रेप की कोशिश के आरोप से दी थी मुक्ति

पटना हाई कोर्ट के जज जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति ने महिला का सलवार खोल दिया और उसकी छाती दबा दी, तो यह महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध होगा, रेप का नहीं, जिसमें कि ज्यादा सजा का प्रावधान है। आरोपी को रेप की कोशिश के दोष से मु्क्त करते हुए हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी।

अंजन कुमार

लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। अंजन अप्रैल 2025 में नवभारत टाइम्स ऑनलाइन से जुड़े और बीते 10 वर्षों से डिजिटल मीडिया में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती वर्षों में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करियर का आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से किया और 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। इस कार्यकाल में इन्होंने सहारा समय नेशनल न्यूज चैनल पर 2006 में कन्या भ्रूण हत्या पर किए गए एक ऐतिहासिक स्टिंग ऑपरेशन पर बने’कोख में कत्ल’ प्रोग्राम सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर ‘मुर्दा, मवेशी, माफिया’ प्रोग्राम सीरिज को भी पेश किया, जो दिल्ली-एनसीआर में मरे हुए मवेशियों का मांस बेचने वाली माफिया के खतरनाक स्टिंग ऑपरेशन पर आधारित था। ये 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2004 के आम चुनावों से लेकर 2024 के आम चुनावों और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।और पढ़ें