यौन अपराध से जुड़े मामलों में अदालतों की असंवेदनशील टिप्पणियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइंस को मंजूरी दे दी है। सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने निर्देश दिया है कि न्यायिक संवेदनशीलता गाइडलाइंस का पालन सभी अदालतें करेंगी।

न्यायिक संवेदनशीलता के लिए गाइडलाइंस
यौन अपराध से जुड़े केस में न्यायिक संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए नेशनल जुडिशल एकेडमी की एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार (14 जुलाई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई।
कमेटी ने बहुत ही शानदार काम किया है।
सीजेआई सूर्यकांत
न्यायिक आदेश का हिस्सा बनेगी गाइडलाइंस
- लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि मंजूर की गई गाइडलाइंस या हैंडबुक को सुप्रीम कोर्ट, देश के सभी हाई कोर्ट के साथ-साथ जिला अदालतों की वेबसाइट (जहां यह उपलब्ध हैं) पर अपलोड किया जाएगा।
- यह गाइडलाइंस नेशनल जुडिशल एकेडमी समेत सभी प्रदेश न्यायिक अकादमियों में भी वितरित किया जाएगा।
- यह गाइडलाइंस नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और विभिन्न यूनिवर्सिटी के लॉ डिपार्टमेंट में भी सर्कुलेट किए जाएंगे।
- बाद में यह जानकारी भी दी गई कि सुप्रीम कोर्ट से स्वीकृत गाइडलाइंस को न्यायिक आदेश का हिस्सा बनाया जाएगा।
एफआईआर या चार्जशीट के समय भी पालन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है, ‘सभी राज्यों के डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को यह भी निर्देश दिया जाता है कि सभी पुलिस स्टेशनों को ये जरूरी दिशा-निर्देश जारी करें कि एफआईआर या चार्जशीट दायर करते समय हैंडबुक में बताई गई बातों का पालन करें।’ गाइडलाइन की विस्तृत जानकारी इसके अपलोड होने पर सामने आएगी।
इलाहाबाद कोर्ट के आदेश के बाद गाइडलाइंस
- नेशनल जुडिशल एकेडमी की यह रिपोर्ट 17 मार्च, 2025 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश से पैदा हुई परिस्थितियों में स्वत: संज्ञान के केस में तैयार की गई है।
- इस मामले में अदालत ने टिप्पणी की थी कि लड़की के पजामे का नाड़ा खोलना और उसके ब्रेस्ट को पकड़ना रेप की कोशिश के दायरे में नहीं आता।
- एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार सीनियर वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसी घटनाएं आए दिन होने लगी हैं।
- मसलन, 9 जुलाई को ही पटना हाई कोर्ट ने एक ऐसा ही आदेश दिया है।
- इसमें पटना हाई कोर्ट ने यौन अपराध के एक केस में कहा कि महिला का सलवार खोलना और उसकी छाती को दबाना रेप की कोशिश नहीं थी।
पटना हाई कोर्ट की टिप्पणी पर सीजेआई नाराज
पटना हाई कोर्ट के आदेश की ओर इशारा करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जजों की भी ड्यूटी है कि वे कुछ रिसर्च भी करें। उन्होंने कहा, ‘स्टाफ कुछ भी नहीं कर रहे हैं।’
रेप की कोशिश के आरोप से दी थी मुक्ति
पटना हाई कोर्ट के जज जस्टिस पूर्णेंदु सिंह ने कहा था कि अगर किसी व्यक्ति ने महिला का सलवार खोल दिया और उसकी छाती दबा दी, तो यह महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध होगा, रेप का नहीं, जिसमें कि ज्यादा सजा का प्रावधान है। आरोपी को रेप की कोशिश के दोष से मु्क्त करते हुए हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी।
