हर बार कोई फिल्म आती है और हर बार वो अपनी लाजवाब एक्टिंग से अपने चाहने वालों का दिल जीत लेते हैं। आज उनका जीवन जितना भी रोशन हो, लेकिन बचपन में उनके गांव में बिजली तक नहीं हुआ करती। पंकज ने हर दिन देखें है। यही कारण है कि वे बेहद विनम्र रहते हैं और स्क्रीन पर जितनी बार भी दिखते हैं, बेहद सादगी के साथ नजर आते हैं। उनका जीवन और उनका संघर्ष भी किसी मोटिवेशन से कम नहीं है।
1. हर चीज की एक वजह होती!
पंकज ने एक इंटरव्यू में किस्सा सुनाया था कि बचपन में उनके पिता चाहते थे कि घर में ट्रैक्टर आ जाए। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण ट्रैक्टर नहीं आ पाया। अगर ट्रैक्टर आ जाता, तो वो कभी फिल्मों में काम नहीं करते। बल्कि ट्रैक्टर चला रहे होते। उनका यह किस्सा हमें यह सिखाता है कि ‘जीवन में हर चीज किसी वजह से ही होती है।’
2. आपका दिमाग आपके शरीर का CEO है!
पंकज ने एक पोडकास्ट में दिमाग को दुनिया का सबसे बेहतरीन कंप्यूटर और सबसे बेहतरीन एप बताया। उनका कहना था कि सारी सफलता-असफलता, डर, परेशानी, डिप्रेशन, सब कुछ दिमाग का खेल है। इसलिए अपने दिमाग को ट्रेन करिए।
3. सारा खेल समय का है!
एक इंटरव्यू में पंकज कहते हैं कि ‘सारा खेल समय का होता है, अगर जीवन में कुछ सही न हो रहा हो, तो निराश मत होना। कुछ बड़े की तैयारी है।’
4. आप कब जीतते हो?
पंकज अपने बारे में कहते हैं कि ‘मुझे अपमानित करना मुश्किल है, चाहे जितना चिढ़ा लो, कुछ भी कर लो।’ उनका मानना है कि ‘अगर सामने वाला आपको उकसाता रहे और आप न उकसो न, तब उसे ज्यादा तकलीफ होती है।’
5. अपने जीवन में कोई कही भी…
पंकज कहते हैं कि ‘जीवन की पटकथा यानि स्क्रिप्ट बहुत ही अनापेक्षित है, इसे एंजॉय करो। ईमानदारी के साथ काम करते रहना। कोई भी कभी-भी कही भी अपने जीवन में पहुंच सकता है।’
6. जल्दी सफल होने की इच्छा ही परेशानी है!
पंकज का यह विचार सफल होने की प्रक्रिया को भी महसूस और जीना सिखाता है। कई बार जल्दी सफलता मिल जाने पर लोगों को उसकी कदर नहीं होती। उनके हिसाब से जल्दी सफल होने की इच्छा ही परेशानी है!
7. धैर्य रखो!
अगर किसी एक शब्द में पंकज और उनके संघर्ष को परिभाषित किया जाए, तो वह ‘धैर्य’ है। अपने इंटरव्यूज से लेकर पोडाकास्ट तक में वो अक्सर इस शब्द पर विस्तार से बात करते हैं। वह हमेशा लोगों को धैर्य रखने की सलाह देते हैं।
8. सफलता का शॉटर्कट नहीं है!
पंकज का हमेशा से इस बात में विश्वास करते हैं कि ‘सफलता का कोई शॉटर्कट नहीं होता, धैर्य रखना पड़ता है।’
9. इरादे साफ हो, तो मंजिल देर-सवेर मिलती जरूर है!
त्रिपाठी का मानना है कि ‘अगर इरादे साफ हो, तो मंजिल देर-सवेर मिलती जरूर है!’ यानि आप जो भी काम कर रहे हैं, उसे नेक इरादे के साथ करते रहिए।
10. जीवन क्या है?
इस सवाल पर पंकज का जवाब होता है कि जीवन ‘कुछ न जानने से शुरू करके बहुत जानने की यात्रा है।’ इस बीच करियर, पैसा, फेम, प्यार, परिवार सब आता है।
Extras: 2004 में पंकज त्रिपाठी ने NSD (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) से ग्रेजुएशन किया और 2004-10 के बीच एक रुपये भी नहीं कमाए।
