डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने बुधवार को कहा कि ई-20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान पहुंचने, कीड़े-मकोड़े आने, बीमा अमान्य होने या ईंधन में गन्ने का रस मिलाने जैसे हालिया दावे गुमराह करने वाले हैं और तथ्यों के हिसाब से गलत हैं।
एसोसिएशन ने अपील की कि एथनाल मिश्रित पेट्रोल पर सार्वजनिक चर्चा वैज्ञानिक सुबूतों, सत्यापित आंकड़ों और आधिकारिक स्पष्टीकरणों पर आधारित होनी चाहिए।
ई-20 पेट्रोल से वाहनों को नुकसान के दावे गलत
इस्मा ने कहा कि वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और सोसाइटी ऑफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स, फेडरेशन आफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री एवं आटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया समेत उद्योग जगत के संगठनों ने सार्वजनिक रूप से ई-20 का समर्थन किया है।
माइलेज में अंतर बहुत कम
उनका कहना है कि वाहन खराब होने की चिंताएं सुनी-सुनाई बातों, गलत जानकारी और गलतफहमी पर आधारित हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा कि जिस भी मामले में माइलेज में अंतर देखा गया, वह बहुत कम था, जबकि ई-20 पेट्रोल से उत्सर्जन कम करने, तेल आयात घटाने, विदेशी मुद्रा बचाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
किसानों की आय बढ़ाने में सहायक
इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि ई-20 को विज्ञान आधारित प्रक्रिया के जरिये पेश किया गया था और इसमें सरकार, तेल विपणन कंपनियां, वाहन निर्माता एवं टेस्टिंग एजेंसियां शामिल थीं। इसके असुरक्षित होने का दावा सुबूतों पर आधारित नहीं है।