NEET से पहले भी परीक्षाएं रही दागदार (Etv Bharat)
रायपुर : देशभर में नीट पेपर लीक को लेकर मचे बवाल के बीच छत्तीसगढ़ की भर्ती परीक्षाओं का विवादित इतिहास एक बार फिर चर्चा में है. पिछले दो दशकों में राज्य की कई भर्ती परीक्षाएं पेपर लीक, कथित पक्षपात, फर्जी अभ्यर्थियों, उत्तर कुंजी विवाद और चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों से घिरती रही हैं. CGPSC भर्ती विवाद पर सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसे बेहद गंभीर अपराध मानते हुए कड़ी टिप्पणी की थी.अब राज्य सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव करते हुए आवेदन से नियुक्ति तक पूरी व्यवस्था को समयबद्ध, पारदर्शी और ऑनलाइन करने का फैसला लिया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या नए नियम वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाओं पर विराम लगा पाएंगे?
भर्ती परीक्षा का इतिहास,विवाद और सवाल
छत्तीसगढ़ में भर्ती परीक्षाओं पर विवाद कोई नई बात नहीं है. राज्य गठन के बाद से ही अलग-अलग विभागों की कई चयन प्रक्रियाएं सवालों के घेरे में रही हैं. कभी पेपर लीक के आरोप लगे तो कभी मेरिट सूची और उत्तर कुंजी पर विवाद हुआ. कहीं फर्जी अभ्यर्थियों की बात सामने आई तो कहीं चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठे.इन घटनाओं ने सरकारी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता को लगातार प्रभावित किया.
व्यापम परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सबसे ज्यादा सवाल
छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल की आयोजित कई भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में समय-समय पर प्रश्नपत्र सुरक्षा, फर्जी परीक्षार्थियों, अनुचित साधनों के इस्तेमाल और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप सामने आए. कई मामलों में पुलिस जांच हुई, गिरफ्तारियां हुईं और इसके बाद बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी समेत सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया. इसके बावजूद परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए.
शिक्षक भर्ती से लेकर पटवारी तक, कई परीक्षाएं बनीं विवाद की वजह
शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में मेरिट सूची, दस्तावेज सत्यापन, पात्रता और आरक्षण को लेकर अनेक विवाद सामने आए.कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, इसके बाद कुछ मामलों में संशोधित चयन सूची जारी करनी पड़ी. इसी तरह पुलिस आरक्षक भर्ती, आबकारी आरक्षक भर्ती, पटवारी भर्ती, सब-इंजीनियर और अन्य तकनीकी विभागों की परीक्षाओं में भी उत्तर कुंजी, शारीरिक दक्षता परीक्षण, प्रश्नपत्र की गोपनीयता और चयन प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। कई मामलों में जांच समितियां गठित करनी पड़ीं और परिणामों की समीक्षा भी हुई.
CGPSC पर सवाल (Etv Bharat)
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सोशल मीडिया पर वायरल पेपर और बढ़ता अविश्वास
हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के कथित प्रश्नपत्र सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर परीक्षा से पहले वायरल होने के दावे किए गए. हालांकि हर मामले में वास्तविक पेपर लीक की पुष्टि नहीं हुई और कई वायरल सामग्री फर्जी या पुरानी भी निकली, लेकिन इन घटनाओं ने युवाओं के बीच भर्ती प्रणाली को लेकर अविश्वास और चिंता को और गहरा किया.
सबसे प्रतिष्ठित संस्था CGPSC भी सवालों के घेरे में
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2021 की राज्य सेवा परीक्षा राज्य के सबसे चर्चित भर्ती विवादों में शामिल रही. चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों के बाद सीबीआई ने तत्कालीन सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव को गिरफ्तार किया. इस मामले में उनके पुत्र का नाम भी सामने आया.आरोप ये था कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं.
परीक्षाओं को लेकर लग रहे आरोप (Etv Bharat)
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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, पेपर लीक हत्या से भी जघन्य अपराध
CGPSC मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का पेपर लीक करना हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है, क्योंकि इससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित होता है. अदालत ने माना कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखना संबंधित अधिकारियों का सबसे बड़ा दायित्व है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही पूरे समाज के साथ अन्याय है.
संस्थाओं की विश्वसनीयता लगातार कमजोर हुई
राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार राम अवतार तिवारी का मानना है कि रोजगार देने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता लगातार कम होती गई है. उनके अनुसार 2002 के पीएससी विवाद से लेकर व्यापम, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती और पटवारी भर्ती तक कई मामलों ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है. उनका कहना है कि जब चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं तो प्रतिभाशाली युवाओं के मन में व्यवस्था के प्रति आक्रोश पैदा होता है.
सीमित अवसर में चयन प्रक्रिया हो पारदर्शी (Etv Bharat)
भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की आशंका ने बढ़ाई चिंताराम अवतार तिवारी का कहना है कि भर्ती संस्थाओं में यदि व्यक्तिगत स्वार्थ, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है तो योग्य उम्मीदवारों का मनोबल टूटता है.सरकारी नौकरियों के सीमित अवसरों के बीच यदि चयन प्रक्रिया भी विवादों में घिर जाए तो उसका असर केवल अभ्यर्थियों पर नहीं, बल्कि पूरे समाज के विश्वास पर पड़ता है.
NEET से पहले भी परीक्षाएं रही दागदार (Etv Bharat)
सरकार का बड़ा फैसला, भर्ती प्रक्रिया में अब व्यापक बदलावलगातार विवादों के बाद राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मण्डल नियम, 2026 लागू कर भर्ती प्रक्रिया में बड़े सुधार किए हैं.नए नियमों के तहत आवेदन से लेकर नियुक्ति तक हर प्रक्रिया को ऑनलाइन, समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है. प्रत्येक विभाग ऑनलाइन रिक्तियां भेजेगा और हर साल अगस्त में भर्ती कैलेंडर जारी किया जाएगा.ऑनलाइन आवेदन से लेकर उत्तर कुंजी तक पूरी प्रक्रिया डिजिटलअब सभी अभ्यर्थियों के लिए आधार आधारित प्रोफाइल पंजीयन अनिवार्य होगा.सभी लिखित परीक्षाएं MCQ आधारित होंगी.परीक्षा के बाद पहले मॉडल उत्तर कुंजी जारी होगी, फिर ऑनलाइन आपत्तियां ली जाएंगी और विशेषज्ञ समिति द्वारा उनका निराकरण करने के बाद अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा. इससे उत्तर कुंजी को लेकर होने वाले विवाद कम होने की उम्मीद है.
भर्ती प्रक्रिया में अब बड़ा बदलाव (Etv Bharat)
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कौशल परीक्षा, दस्तावेज सत्यापन और नियुक्ति की तय समय-सीमा
जिन पदों पर कौशल या शारीरिक दक्षता परीक्षा होगी, वहां यह केवल अर्हकारी होगी और उसके अंक अंतिम मेरिट में नहीं जुड़ेंगे. अंतिम चयन सूची जारी होने के बाद अभ्यर्थियों को 15 दिनों में दस्तावेज अपलोड करने होंगे.विभाग एक महीने में सत्यापन करेगा और दस दिनों के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करना अनिवार्य होगा. चयनित अभ्यर्थी को 30 दिनों के भीतर कार्यभार ग्रहण करना होगा.
अब नहीं बनेगी वेटिंग लिस्ट, जवाबदेही होगी तय
नए नियमों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अंतिम चयन सूची के बाद कोई वेटिंग लिस्ट जारी नहीं होगी. यदि विभाग समय-सीमा का पालन नहीं करता तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया.इससे भर्ती प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने की संभावना कम होगी.
अब भर्ती के बाद नहीं बनेगी वेटिंग लिस्ट (Etv Bharat)
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पेपर लीक और नकल पर सख्त कानून लागू
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी परीक्षाओं में छत्तीसगढ़ (लोक भर्ती एवं व्यावसायिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2026 का कड़ाई से पालन किया जाएगा. पेपर लीक, नकल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग या अन्य किसी भी प्रकार की परीक्षा संबंधी अनियमितता पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
क्या अब लौटेगा युवाओं का भरोसा?
छत्तीसगढ़ की भर्ती व्यवस्था का इतिहास बताता है कि विवाद किसी एक परीक्षा या एक संस्था तक सीमित नहीं रहे.पीएससी से लेकर व्यापम, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती और अन्य चयन प्रक्रियाओं तक समय-समय पर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं.सरकार ने नए नियमों के जरिए व्यवस्था बदलने का प्रयास जरूर किया है, लेकिन उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उनका ईमानदारी और सख्ती से पालन कितना होता है. यदि नियम प्रभावी ढंग से लागू हुए तो भर्ती व्यवस्था में भरोसा लौट सकता है, अन्यथा यह सवाल बना रहेगा कि आखिर छत्तीसगढ़ में पेपर लीक और भर्ती गड़बड़ियों का सिलसिला कब टूटेगा.
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