Indian Youth Martyred In Russia Ukraine,रूस-यूक्रेन युद्ध में यूपी के 11 युवकों की अब तक मौत, कई के तो कंकाल तक नहीं मिले, वर्दी का हुआ अंतिम संस्कार – 11 youths from azamgarh and mau die in russia ukraine war – Azamgarh News


रूस-यूक्रेन युद्ध में एजेंट की लापरवाही से आजमगढ़ और मऊ के 11 युवक मौत की भेंट चढ़ गए। किसी का कंकाल पहुंचा तो किसी की वर्दी और टोपी का अंतिम संस्कार हुआ।

हाइलाइट्स

  • 2024 में दिल्ली के एजेंट ने रूस भेजा था
  • 4 युवाओं का वर्दी, टोपी में हुआ अंतिम संस्कार
  • कुल 13 युवाओं को रूस भेज गया था
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आजमगढ़ और मऊ से रूस गए युवक
सौरभ राय, आजमगढ़: यूरोप में लंबे समय से युद्ध की ज्वाला में धधक रहे रूस और यूक्रेन की आंच से सुदूर स्थित भारत के उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल का मऊ और आजमगढ़ जिला भी अब अछूता नहीं रहा है। जी हां, लंबे समय से चल रहे इस युद्ध में आजमगढ़ और मऊ के अब तक कुल 11 युवक रशिया के तरफ से लड़ते हुए शहीद हो चुके हैं। रोजी-रोटी के तलाश में एजेंट के चक्कर में पड़ कर इन युवाओं ने न सिर्फ अपनी जान गंवा दी, बल्कि इनमें से कुछ के परिवारों को तो इनके कंकाल तक भी अंतिम संस्कार के लिए नसीब नहीं हो सके।

मिली जानकारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध में जनपद मऊ के 4 और आजमगढ़ के 7 युवाओं के मौत की पुष्टि अब तक हो चुकी है, जबकि एक अन्य युवा अभी भी लापता है। 2024 में दिल्ली के एजेंट द्वारा शुरू किए गए इस खूनी खेल में पिछले दिनों जब इन दोनों जनपदों में 4 युवाओं के परिजनों को उनकी वर्दी, टोपी और बैज मिले तो सबकी आंखें नम हो गईं। परिजनों ने उसी टोपी, बैज और वर्दी का अंतिम संस्कार भी किया।

कैसे शुरू हुआ था मौत के कुंए में धकेलने का खूनी खेल?

परिजनों की माने तो जनवरी 2024 में मऊ के विनोद यादव ने आजमगढ़ और मऊ के कुल तेरह युवाओं को रसिया में नौकरी दिलाने के नाम पर अपने भरोसे में लिया। परिजनों ने बताया कि विनोद ने उनसे कहा था कि उन्हें रसिया में दो लाख रुपये प्रतिमाह के हिसाब से प्लम्बर और सुरक्षा गार्ड की नौकरी मिल जाएगी। जिसके बाद से रोजी रोटी की तलाश कर सभी युवाओं ने हामी भर दी। इसके बाद विनोद ने सभी का पासपोर्ट बनवाया और उनकी मुलाकात दिल्ली के एक अन्य एजेंट सुमित से करवाई। जहां सुमित ने उन सभी से पैसे लिए उन्हें नौकरी का झांसा देकर रशिया के लिए रवाना कर दिया।
रूस पहुंचने के बाद मास्को में एक पंद्रह दिन की ट्रेनिंग हुई, फिर ट्रेनिंग के बाद उन सभी को रूस-यूक्रेन युद्ध में अलग-अलग जगहों पर भेज दिया। रशिया जाने वालों में मऊ का एजेंट विनोद यादव भी शामिल था। परिजनों की मानें तो रशिया पहुंचने के बाद एक दो महीनों तक उनकी बात भी होती रही, लेकिन इसके बाद जब उनसे बातचीत बंद हुई तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी।

4 और युवाओं के मृत्यु प्रमाण पत्र रूस से पहुंचे भारत

फिर कुछ समय बाद धीरे-धीरे जब रशिया से मऊ के श्यामसुंदर, सुनील, आजमगढ़ के कन्हैया यादव, अजहरुद्दीन ख़ान, रामचंद्र, अरविंद कुमार के शव, अवशेष और मऊ निवासी बृजेश यादव और आजमगढ़ के राकेश कुमार के घायल अवस्था में वापस लौटने के बाद से अन्य लोगों के परिजनों की चिंताएं भी बढ़ गईं। इसी बीच पंजाब के जालंधर निवासी जगदीप कुमार अपने भाई की मौत की खबर सुनकर उनका शव लेने रशिया पहुंचे। जहां पर मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से उन्हें आजमगढ़ जोगेंद्र यादव, धीरेंद्र कुमार, अरविंद और मऊ के विनोद यादव के मौत की जानकारी मिली। शव उपलब्ध न होने पर दूतावास ने चारों की वर्दी, टोपी, बैज, रूसी ध्वज और मृत्यु प्रमाण पत्र उन्हें सौंप दिए। जिसके बाद जगदीप ने इन निशानियों को उनके परिजनों को सौंपा।

लोगों ने की ऐसे एजेंटों को फांसी देने की अपील

परिजनों के द्वारा टोपी, वर्दी, बैज का अंतिम संस्कार देख क्षेत्र के तमाम लोगों की आंखें भर आईं। हर किसी की अंतरात्मा अंदर से रो पड़ी। एक तरफ जहां लोगों ने कहा कि ऐसा पैसा हमें नहीं चाहिए, जो हमें अपनों से दूर कर दे, तो वहीं दूसरी तरफ लोगों ने सरकार से ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की ऐसी अनहोनी से बचा जा सके।

विवेक मिश्रा

लेखक के बारे मेंविवेक मिश्राविवेक कुमार मिश्रा (Vivek Kumar Mishra) नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन (NBT.Com) में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर (Senior Digital Content Producer) हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-सियासी हलचल पर नजर रखते हैं। यूपी राजनीतिक विश्लेषण, उत्तर प्रदेश में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं। उत्तर प्रदेश में अपराध, प्रशासन, डेवलपमेंट, यूपी सरकारी योजनाओं पर फोकस रखते हैं। उत्तराखंड की राजनीति हलचल, विश्लेषण, अपराध और घटनाक्रम पर भी विवेक कुमार मिश्रा फोकस रखते हैं।

अनुभव
यूपी के लखनऊ, मुरादाबाद, आगरा और नोएडा में हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया में काम कर चुके हैं। दिसंबर 2020 से नवभारत टाइम्स ऑनलाइन के साथ जुड़े हैं। पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसमें डेस्क और फील्ड दोनों में काम किया है।

शिक्षा
राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय से स्नातक किया है। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) में परास्नातक किया हुआ है। विवेक कुमार मिश्रा मूल रूप से यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं।… और पढ़ें