रूस-यूक्रेन युद्ध में एजेंट की लापरवाही से आजमगढ़ और मऊ के 11 युवक मौत की भेंट चढ़ गए। किसी का कंकाल पहुंचा तो किसी की वर्दी और टोपी का अंतिम संस्कार हुआ।
हाइलाइट्स
- 2024 में दिल्ली के एजेंट ने रूस भेजा था
- 4 युवाओं का वर्दी, टोपी में हुआ अंतिम संस्कार
- कुल 13 युवाओं को रूस भेज गया था

मिली जानकारी के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध में जनपद मऊ के 4 और आजमगढ़ के 7 युवाओं के मौत की पुष्टि अब तक हो चुकी है, जबकि एक अन्य युवा अभी भी लापता है। 2024 में दिल्ली के एजेंट द्वारा शुरू किए गए इस खूनी खेल में पिछले दिनों जब इन दोनों जनपदों में 4 युवाओं के परिजनों को उनकी वर्दी, टोपी और बैज मिले तो सबकी आंखें नम हो गईं। परिजनों ने उसी टोपी, बैज और वर्दी का अंतिम संस्कार भी किया।
कैसे शुरू हुआ था मौत के कुंए में धकेलने का खूनी खेल?
परिजनों की माने तो जनवरी 2024 में मऊ के विनोद यादव ने आजमगढ़ और मऊ के कुल तेरह युवाओं को रसिया में नौकरी दिलाने के नाम पर अपने भरोसे में लिया। परिजनों ने बताया कि विनोद ने उनसे कहा था कि उन्हें रसिया में दो लाख रुपये प्रतिमाह के हिसाब से प्लम्बर और सुरक्षा गार्ड की नौकरी मिल जाएगी। जिसके बाद से रोजी रोटी की तलाश कर सभी युवाओं ने हामी भर दी। इसके बाद विनोद ने सभी का पासपोर्ट बनवाया और उनकी मुलाकात दिल्ली के एक अन्य एजेंट सुमित से करवाई। जहां सुमित ने उन सभी से पैसे लिए उन्हें नौकरी का झांसा देकर रशिया के लिए रवाना कर दिया।
रूस पहुंचने के बाद मास्को में एक पंद्रह दिन की ट्रेनिंग हुई, फिर ट्रेनिंग के बाद उन सभी को रूस-यूक्रेन युद्ध में अलग-अलग जगहों पर भेज दिया। रशिया जाने वालों में मऊ का एजेंट विनोद यादव भी शामिल था। परिजनों की मानें तो रशिया पहुंचने के बाद एक दो महीनों तक उनकी बात भी होती रही, लेकिन इसके बाद जब उनसे बातचीत बंद हुई तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी।
4 और युवाओं के मृत्यु प्रमाण पत्र रूस से पहुंचे भारत
फिर कुछ समय बाद धीरे-धीरे जब रशिया से मऊ के श्यामसुंदर, सुनील, आजमगढ़ के कन्हैया यादव, अजहरुद्दीन ख़ान, रामचंद्र, अरविंद कुमार के शव, अवशेष और मऊ निवासी बृजेश यादव और आजमगढ़ के राकेश कुमार के घायल अवस्था में वापस लौटने के बाद से अन्य लोगों के परिजनों की चिंताएं भी बढ़ गईं। इसी बीच पंजाब के जालंधर निवासी जगदीप कुमार अपने भाई की मौत की खबर सुनकर उनका शव लेने रशिया पहुंचे। जहां पर मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास से उन्हें आजमगढ़ जोगेंद्र यादव, धीरेंद्र कुमार, अरविंद और मऊ के विनोद यादव के मौत की जानकारी मिली। शव उपलब्ध न होने पर दूतावास ने चारों की वर्दी, टोपी, बैज, रूसी ध्वज और मृत्यु प्रमाण पत्र उन्हें सौंप दिए। जिसके बाद जगदीप ने इन निशानियों को उनके परिजनों को सौंपा।
लोगों ने की ऐसे एजेंटों को फांसी देने की अपील
परिजनों के द्वारा टोपी, वर्दी, बैज का अंतिम संस्कार देख क्षेत्र के तमाम लोगों की आंखें भर आईं। हर किसी की अंतरात्मा अंदर से रो पड़ी। एक तरफ जहां लोगों ने कहा कि ऐसा पैसा हमें नहीं चाहिए, जो हमें अपनों से दूर कर दे, तो वहीं दूसरी तरफ लोगों ने सरकार से ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की, जिससे भविष्य में किसी भी प्रकार की ऐसी अनहोनी से बचा जा सके।
