IPO की होड़: अभी दांव लगाएं या लिस्टिंग का इंतजार करें? जानें निवेश का सही गणित
सोमवार, 17 अगस्त से शुक्रवार, 21 अगस्त के बीच कई कंपनियों के IPO बाजार में दस्तक देने जा रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल है कि क्या अभी दांव लगाएं या लिस्टिंग के बाद उतार-चढ़ाव थमने का इंतजार करें। हालांकि, कोई भी फैसला लेने से पहले सोमवार सुबह शेयर बाजारों (Exchanges) से जारी होने वाले अपडेट में वास्तविक आईपीओ और उनके प्राइस बैंड की पुष्टि जरूर कर लें।
आईपीओ में अलॉटमेंट मिलेगा या नहीं, यह काफी हद तक रिटेल कोटे पर निर्भर करता है, जो आमतौर पर कुल शेयरों का 35 प्रतिशत होता है। मोटे तौर पर समझें तो अलॉटमेंट की संभावना उपलब्ध लॉट की संख्या को कुल सही रिटेल आवेदनों से विभाजित करके निकाली जाती है। उदाहरण के लिए, 2 लाख लॉट और 10 लाख आवेदनों का मतलब है कि हर 5 में से 1 आवेदक को अलॉटमेंट मिलने की उम्मीद है। वहीं नॉन-इंसटीट्यूशनल बिड्स (NII) में अलॉटमेंट लॉटरी से नहीं, बल्कि सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों के हिसाब से तय होता है।

IPO की होड़: अभी दांव लगाएं या लिस्टिंग के बाद खरीदें?
आईपीओ में पहले ही आवेदन करने से लिस्टिंग के दिन बड़ा मुनाफा मिल सकता है, लेकिन इसमें कीमत और मांग से जुड़ा जोखिम भी रहता है। दूसरी तरफ, लिस्टिंग के बाद शेयर खरीदने से कंपनी की असली मार्केट डिमांड समझ आती है, हालांकि तब तक शुरुआती उछाल का मौका हाथ से निकल सकता है। इसलिए किसी भी कंपनी का चुनाव करते समय उसके कैश फ्लो, कर्ज, रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के वैल्यूएशन को जरूर परखें।
UPI कट-ऑफ, ASBA का तरीका और सोमवार की चेकलिस्ट
ज्यादातर बैंक शाम 4:30 से 5:00 बजे के आसपास IPO UPI मैंडेट अप्रूवल बंद कर देते हैं। इसलिए समय रहते अप्रूवल दें, क्योंकि आखिरी दिन पेंडिंग रिक्वेस्ट लैप्स हो सकती हैं। हमेशा अपने पैन (PAN) से जुड़े बैंक खाते के UPI का ही इस्तेमाल करें। अगर ASBA के जरिए अप्लाई कर रहे हैं, तो नेटबैंकिंग में ब्लॉक अमाउंट की पुष्टि जरूर करें। ध्यान रखें कि KYC नाम पूरी तरह मैच होना चाहिए; एक पैन से केवल एक ही रिटेल आवेदन मान्य है और किसी तीसरे पक्ष के UPI का इस्तेमाल न करें।
| निवेश माध्यम | अनुमानित सालाना दर | Rs 2,00,000 पर 10 दिन का ब्याज |
|---|---|---|
| सेविंग्स अकाउंट (ASBA में ब्लॉक फंड) | 3.0% | Rs 164 |
| बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (3 महीने) | 7.0% | Rs 384 |
अलॉटमेंट की संभावना, रिफंड और T+ टाइमलाइन
अब ज्यादातर मेनबोर्ड IPO इश्यू बंद होने के बाद T+3 के छोटे साइकिल पर काम करते हैं। इसके तहत इश्यू बंद होने के तुरंत बाद अलॉटमेंट फाइनल हो जाता है और अगले वर्किंग डे पर UPI अनब्लॉक हो जाता है। आप रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जाकर अपने आवेदन नंबर और पैन के जरिए स्टेटस चेक कर सकते हैं।
IPO की भागदौड़ से बेहतर विकल्प है SIP
अगर आप आईपीओ की आपाधापी से बचना चाहते हैं, तो ब्रॉड इंडेक्स फंड्स में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) एक ज्यादा स्थिर और तनावमुक्त विकल्प है। यह आईपीओ मार्केट के समय से जुड़े जोखिम को भी कम करता है। अगर आपके पास कंपनियों पर रिसर्च करने का समय नहीं है, तो ऑटोमेटेड मंथली SIP शुरू करें और केवल चुनिंदा IPOs में ही सोच-समझकर दांव लगाएं।