ITR और टैक्स ऑडिट की डेडलाइन बढ़ी: अब इस तारीख तक भरें रिटर्न, जानें पूरी डिटेल | ITR And Tax Audit Deadline Extended 2026: Check New Dates For AY 2026-27


ITR और टैक्स ऑडिट की डेडलाइन बढ़ी: अब इस तारीख तक भरें रिटर्न, जानें पूरी डिटेल

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए ऑडिट मामलों से जुड़ी दो बड़ी डेडलाइंस बढ़ा दी हैं। अब टैक्स-ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 21 अक्टूबर 2026 और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की अंतिम तिथि 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। यह राहत उन टैक्सपेयर्स और फर्मों के पार्टनर्स को मिली है, जिनके खातों का ऑडिट होना जरूरी है। हालांकि, बिना ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स के लिए डेडलाइन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। याद रखें: ऑडिट के लिए 21 अक्टूबर और ITR के लिए 21 नवंबर नई तारीखें हैं।

अतिरिक्त समय मिलने से ऑडिट और ITR फाइलिंग का दबाव तो कम होगा, लेकिन ध्यान रखें कि ब्याज और लेट फीस के नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे। ई-फाइलिंग पोर्टल पर टैक्स-ऑडिट रिपोर्ट फॉर्म 3CA/3CB और 3CD में दाखिल करनी होगी। रिपोर्ट अपलोड करते समय पोर्टल ICAI से मिले यूनिक डॉक्यूमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर (UDIN) को वेरीफाई करता है। इसलिए, अपने डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) को समय रहते रिन्यू कराने की तैयारी कर लें।

ITR and Tax Audit Deadline Extended 2026: Check New Dates for AY 2026-27

ITR और टैक्स-ऑडिट की नई डेडलाइन: एक नजर में टाइमलाइन

काम/इवेंट नई तारीख किन्हें मिला फायदा
टैक्स-ऑडिट रिपोर्ट फाइलिंग 21 अक्टूबर 2026 जिन खातों का ऑडिट होना है
ऑडिट मामलों में ITR फाइलिंग 21 नवंबर 2026 ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स और पार्टनर्स

ब्याज, लेट फीस और ई-वेरिफिकेशन: नियम जानना जरूरी

अगर नियत तारीख तक बकाया टैक्स का भुगतान नहीं होता है, तो सेक्शन 234A के तहत साधारण ब्याज लगेगा। इसके अलावा, तय समय सीमा के बाद फाइलिंग करने पर सेक्शन 234F के तहत लेट फीस भी चुकानी होगी। रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। अगर यह विंडो मिस हो गई, तो फाइलिंग अमान्य हो सकती है और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। उदाहरण के लिए: अगर आप ₹20,000 का टैक्स बकाया रखकर 10 दिसंबर को रिटर्न भरते हैं, तो सेक्शन 234A के तहत ₹200 का ब्याज लगेगा।

चार्ज/पेनल्टी मुख्य नियम
234A का ब्याज बकाया सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पर 1% प्रति माह
234F की लेट फीस ₹5,000; आय ≤ ₹5 लाख होने पर ₹1,000
ई-वेरिफिकेशन फाइलिंग के 30 दिनों के भीतर पूरा करें
ई-वेरिफिकेशन के स्टेप्स जरूरी बातें
लॉगिन → e-File → Income Tax Returns → e-Verify EVC, आधार OTP या DSC का इस्तेमाल करें
एकनॉलेजमेंट संभालकर रखें ITR-V और बैंक चालान अपने पास सुरक्षित रखें
अगर 30 दिन की सीमा बीत जाए कंडोनेशन (Condonation) रिक्वेस्ट प्रोसेस अपनाएं

7 दिनों का एक्शन प्लान: CA और क्लाइंट ऐसे बांटें काम

आखिरी समय की आपाधापी से बचने के लिए इस हफ्ते ही काम का सही बंटवारा कर लें। CAs को चाहिए कि वे ट्रायल बैलेंस लॉक करें, GSTR-1/3B और फॉर्म 26AS का मिलान करें, TDS क्रेडिट दुरुस्त करें और रिपोर्ट अपलोड करने से पहले UDIN जेनरेट कर लें। वहीं क्लाइंट्स AIS-TIS एंट्रीज को चेक करें, जरूरी एडजस्टमेंट्स को अप्रूव करें, DSC और चालान शेयर करें और बकाया टैक्स पहले ही चुका दें। इससे आखिरी दिन पोर्टल के क्रैश होने और बेवजह के तनाव से बचा जा सकेगा।

अकाउंटेंट (CA) की जिम्मेदारी क्लाइंट की जिम्मेदारी
लेजर फ्रीज करें; 3CA/3CB-3CD पूरा करें खाते, सबूत और बैंक से वेरीफाइड चालान शेयर करें
GSTR-1/3B और 26AS का मिलान करें AIS-TIS चेक करें और गड़बड़ियों की जानकारी दें
UDIN बनाएं; DSC से साइन करें DSC/OTP के लिए एक्सेस विंडो मुहैया कराएं
बकाया टैक्स और ब्याज का हिसाब लगाएं फाइलिंग से पहले ही चालान का भुगतान करें

पुराना या नया टैक्स स्लैब: कौन सा विकल्प है आपके लिए बेहतर?

अगर आप सैलरीड टैक्सपेयर हैं और टैक्स रिजीम चुनने को लेकर असमंजस में हैं, तो समझ लें कि कम डिडक्शन (छूट) का दावा करने वालों के लिए नया टैक्स रिजीम आमतौर पर ज्यादा फायदेमंद रहता है। मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी ₹12 लाख है और आप धारा 80C के तहत सिर्फ ₹1.5 लाख की छूट क्लेम कर रहे हैं, तो मौजूदा स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन के हिसाब से नया रिजीम आपके पैसे बचाएगा। नीचे दिए गए आंकड़ों में 4 प्रतिशत सेस भी शामिल है।

स्थिति ओल्ड रिजीम टैक्स न्यू रिजीम टैक्स कौन सा बेहतर?
सैलरी ₹12 लाख; 80C ₹1.5 लाख लगभग ₹1,17,000 लगभग ₹85,800 न्यू रिजीम



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