RBI MPC बैठक: दिवाली से पहले EMI का झटका? ब्याज दरों पर बड़ा फैसला जल्द | RBI MPC Meeting October 2026: Will Interest Rates And EMI Increase? Impact On Loans Explained


RBI MPC बैठक: दिवाली से पहले EMI का झटका? ब्याज दरों पर बड़ा फैसला जल्द

मुंबई, 4 अक्टूबर: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच होने जा रही है, जिसका फैसला 7 अक्टूबर की सुबह आएगा। महंगाई का बढ़ता जोखिम देखते हुए बाज़ार को उम्मीद है कि 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। अगर आरबीआई दरें बढ़ाता है, तो लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ जाएगी, बाज़ार में नकदी कम होगी और सरकारी बॉन्ड यील्ड में तुरंत तेज़ी देखने को मिलेगी। यानी दिवाली से ठीक पहले कर्ज़ लेना महंगा होना तय माना जा रहा है।

आरबीआई ने अगस्त में पॉलिसी रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर न्यूट्रल रुख के साथ स्थिर रखा था। हालांकि, अब कई एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि 7 अक्टूबर को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी की जा सकती है। वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि दरों में बढ़ोतरी का यह सिलसिला 2027 तक खिंच सकता है। अगर दरों में यह बदलाव होता है, तो साल के अंत में रीप्राइजिंग से पहले बैंकों, एनबीएफसी (NBFCs) और सरकारी बैंकों के कर्ज पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

RBI MPC Meeting October 2026: Will Interest Rates and EMI Increase? Impact on Loans Explained

RBI MPC: ईएमआई और ब्याज दरों का असर

ब्याज दर में बढ़ोतरी का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है। एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) से जुड़े लोन हर तीन महीने में रीसेट होते हैं, इसलिए फ्लोटिंग होम लोन ग्राहकों को दरें बढ़ने का झटका जल्दी लगेगा। वहीं मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) वाले लोन तय तारीखों पर रीसेट होते हैं, जो आमतौर पर सालाना या उससे कम अवधि के होते हैं। अच्छी बात यह है कि इंडिविजुअल फ्लोटिंग लोन पर कोई प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं लगती, जिससे आप बिना किसी चार्ज के पार्ट-पेमेंट कर सकते हैं। नीचे दी गई टेबल 20 साल की अवधि के लोन के हिसाब से बनाई गई है:

लोन की रकम मौजूदा EMI (9.00%) 25 bps बढ़ोतरी के बाद EMI (9.25%) हर महीने जेब पर असर
₹30 लाख ₹26,991 ₹27,492 ₹501
₹50 लाख ₹44,985 ₹45,820 ₹835
₹75 लाख ₹67,478 ₹68,730 ₹1,252

RBI MPC: लिक्विडिटी और बॉन्ड यील्ड का गणित

अगर आरबीआई वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन या ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के जरिए खरीदारी या बिक्री का सहारा लेता है, तो बाज़ार में नकदी (लिक्विडिटी) कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा सीआरआर (CRR) और एसएलआर (SLR) जैसे ढांचागत विकल्प भी आरबीआई के पास मौजूद हैं। बाज़ार के जानकारों के मुताबिक, 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.0 से 7.25 फीसदी के आसपास ट्रेड कर सकती है। वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपये के 97 के स्तर की ओर फिसलने से फंडिंग की लागत पर दबाव और बढ़ गया है।

RBI MPC: महंगाई और मानसून का खतरा

आखिर ब्याज दरें बढ़ाने की नौबत क्यों आ रही है? विश्लेषकों का कहना है कि महंगे कच्चे तेल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कड़े रुख और बारिश की मार झेल रही खरीफ फसलों के कारण महंगाई का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून दहाई अंक (double-digit) के घाटे के साथ खत्म हुआ है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी होने के आसार हैं। यही वजह है कि ज्यादातर पोल अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने और उसके बाद दिसंबर में भी बढ़ोतरी की ओर इशारा कर रहे हैं।

RBI MPC: लोन लेने वालों के लिए जरूरी बातें

अपने लोन की रीसेट डेट और बेंचमार्क ज़रूर चेक करें। अगर आपका लोन EBLR से जुड़ा है, तो मानकर चलें कि ब्याज दर में बढ़ोतरी का असर आप पर जल्दी पड़ेगा। अगर आपकी मौजूदा ब्याज दर बहुत ज्यादा नहीं है, तो रीफाइनेंस कराने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में लोन का भुगतान (Prepay) करना बेहतर रहेगा। फिक्स्ड रेट पर स्विच करने से ब्याज दरों में बार-बार बदलाव का जोखिम तो कम होता है, लेकिन इसमें एक्स्ट्रा फीस और लॉक-इन पीरियड की शर्त हो सकती है। ध्यान रखें कि इंडिविजुअल फ्लोटिंग रेट लोन पर प्रीपेमेंट पेनल्टी लगाना सख्त मना है, इसलिए अपने बैंक से इस नियम का पालन करने को कहें।



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