J-20 vs AMCA: चीन ने भारत की तरफ मोड़ दिए J-20 जेट्स, नई दिल्ली के पास एक भी स्टील्थ लड़ाकू विमान नहीं – chinese j-20 jets deployed in tibet near border as india amca stealth fighters a decade in operation challenge to f-35 and su-57


India Stealth Fighters Dream: भारत के सामने प्रतिद्वंद्वी चीन के रूप में बड़ा खतरा मंडरा रहा है। स्टील्थ फाइटर जेट्स के मामले में भारत के पास अभी एक भी नहीं है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के जंगी बेड़ में स्टील्थ J-20 फाइटर की संख्या 500 के पार हो सकती है।

J-20 vs AMCA
भारत का AMCA बनाम J-20 लड़ाकू विमान
नई दिल्ली: भारत की ओर एक बड़ा खतरा आकार ले रहा है। दरअसल, पूरी तरह स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाले लड़ाकू विमानों के मामले में भारत के पास एक भी नहीं है। जबकि चीन इस मामले में काफी बढ़त ले चुका है। पूरे एशिया में चीन स्टील्थ फाइटर्स के मामले में काफी आगे है। चिंता की बात यह है कि चीन ने भारत के बेहद करीब यानी तिब्बत में J-20 स्टील्थ फाइटर्स की तैनाती की है।

चीन के पास 500 ऑपरेशनल J-20 स्टील्थ फाइटर

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक चौंकाने वाले नए अनुमान से पता चलता है कि स्टील्थ फाइटर जैसे अहम क्षेत्र में चीन के मुकाबले भारत की क्षमता में जो कमी है, वह अब एक बड़ी ऑपरेशनल इमरजेंसी बन गई है। चीन की सेना पर नजर रखने वाले अनुभवी विशेषज्ञ एंड्रियास रूप्रेक्ट ने अमेरिकी डिफेंस जर्नल ‘द वॉर जोन’ में लिखा है कि चीन के पास पहले से ही लगभग 500 ऑपरेशनल J-20 ‘माइटी ड्रैगन’ स्टील्थ फाइटर हो सकते हैं, जो उसका सबसे एडवांस्ड जेट है।

भारत के पास एक भी स्टील्थ फाइटर नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, अहम बात यह है कि इन आंकड़ों से पता चलता है कि चीन ने दुनिया के सबसे जटिल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट में से एक का प्रोडक्शन इतने बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है कि वह अमेरिका से भी आगे निकल गया है। भारत के लिए, यह ऑपरेशनल स्तर पर खतरे की एक गंभीर घंटी है। वजह यह है कि भारत के पास ऑपरेशनल स्टील्थ फाइटर की संख्या एकदम शून्य है।

भारतीय वायुसेना में राफेल क्या स्टील्थ है

भारतीय वायुसेना में शामिल राफेल पूरी तरह से स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाला लड़ाकू विमान नहीं है। यह आंशिक तौर पर ही है। यह विमान ताकतवर तो है, मगर यह 4.5 जनरेशन वाला विमान है। भारत को यह विमान फ्रांस से मिला है। वहीं, रूस का Su-57 भी कोई आदर्श स्टील्थ फाइटर नहीं है। स्टील्थ फाइटर जेट्स को दुश्मन के रडार को पूरी तरह से चकमा दे सकते हैं।

भारत की सीमा के पास चीन के J-20 फाइटर्स की तैनाती

  • NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपने कुछ J-20 यूनिट्स को तिब्बत में भारत की सीमा के पास तैनात किया है। J-20 पांचवीं पीढ़ी का एडवांस स्टील्थ लड़ाकू घातक विमान है, जिसे चीन के PLAAF के हिसाब से रडार से बचने, भारी सुरक्षा वाले एयरस्पेस में घुसने, सबसे पहले हमला करने और हमले के बाद भी सुरक्षित रहने के लिए डिजाइन किया गया है।
  • आधुनिक युद्ध में स्टील्थ फाइटर युद्धक्षेत्र की दिशा तय करने वाले अहम हथियार हैं। ये सबसे पहले दुश्मन के इलाके वाले हवाई क्षेत्र में घुसते हैं, दुश्मन के फाइटर जेट और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाते हैं। अहम ठिकानों पर हमला करते हैं और बाकी एयर फ़ोर्स के ऑपरेशन के लिए रास्ता बनाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर ने एक साफ सबक दिया। भविष्य में भारत जिस तरह से युद्ध लड़ना चाहता है, उसमें हवाई ताकत की भूमिका अहम है।

भारत का स्टील्थ फाइटर AMCA 10 साल दूर

  • भारत का बन रहा स्टील्थ फाइटर AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्रॉफ्ट) अभी ऑपरेशनल सर्विस में आने में एक दशक दूर है। अनुमानित रूप से यह 2035 तक भारती वायुसेना में शामिल हो सकता है।
  • वहीं, भारत को ऑफर दे रहे रूस का Su-57 न तो कोई आदर्श स्टील्थ फाइटर है और न ही भारत के संसाधनों का सबसे अच्छा इस्तेमाल, फिर भी यह हमारे लिए इमरजेंसी में इंपोर्ट करने का एकमात्र विकल्प हो सकता है।

भारत का AMCA जब तक आएगा, तब तक चीन काफी आगे

  • यूरोप के FCAS छठी पीढ़ी के प्रोग्राम में शामिल होने में भी लंबे समय की दिलचस्पी है। लेकिन यह अगले दशक का प्रोजेक्ट है, न कि उस युद्ध के लिए जो कल ही छिड़ सकता है। लेकिन सच तो यह है कि जब तक AMCA सर्विस में आएगा, तब तक चीन के पास शायद एक हजार J-20 हो सकते हैं। साथ ही छठी पीढ़ी के दो फाइटर फ्लीट भी तैयार हो रहे होंगे।
  • भारत AMCA काे अगले 10 साल के हिसाब से विकसित कर रहा है, ताकि उसमें F-35 जैसी कमजोरियां न हों। वह अगले 10 साल में उन्नत तकनीक को लैस करते हुए चल रहा है, ताकि 2035 तक यह दुनिया के हर स्टील्थ फाइटर जेट्स से मुकाबला कर सके।

भारत को इस मामले में क्या करना चाहिए

  • भारत ज्यादा काबिल स्टील्थ-विरोधी एयर डिफेंस, सेंसर और डिटेक्शन नेटवर्क में निवेश कर रहा है। इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि स्टील्थ एयरक्राफ्ट को मिलने वाले कुछ फायदों को कम किया जा सके और अपने पास वैसे ही फ्लीट की कमी की भरपाई कुछ हद तक की जा सके।
  • भारत रूस, फ्रांस और दूसरे देशों से एडवांस फाइटर जेट्स के लिए समझौते कर रहा है। मगर, ये भी पूरी तरह स्टील्थ फाइटर की कैटेगरी में नहीं हैं। हालांकि, अमेरिका ने भारत को अपने ताकतवर और महंगे स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 को देने की पेशकश की थी, मगर भारत ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है।

दिनेश मिश्र

लेखक के बारे मेंदिनेश मिश्रदिनेश मिश्र, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर और एक्सप्लेनर एक्सपर्ट हैं। वे अप्रैल-2024 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। दिनेश मिश्र NBT डिजिटल में एक्सप्लेनर और स्पेशल स्टोरीज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ये एक्सप्लेनर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय, बिजनेस और एंटरटेनमेंट समेत किसी भी कैटेगरी की खबरों से जुडे होते हैं, जिसमें दिनेश मिश्र रणनीतिक रूप से डीप डाइव, रिसर्च, वैल्यु एड, एक्सपर्ट कमेंट्स जैसी जरूरी बातें शामिल होती हैं। इन एक्सप्लेनर को लेकर वीडियो भी करते हैं। साथ ही NBT डिजिटल के स्थायी कॉलम मंडे मोटिवेशन, ट्यूजडे ट्रीविया और वेडनेसडे बिग टिकट के लिए डीप डाइव रोचक स्टोरी भी लिखते हैं। वह हर एक्सप्लेनर स्टोरी में सटीक संपादन के साथ-साथ रियल टाइम का ध्यान रखते हैं। इसके अलावा, वे गूगल ट्रेंड से जुड़ी स्टोरीज भी करते आए हैं, जो अहम टास्क है।

दिनेश मिश्र ने प्रयागराज महाकुंभ की ग्राउंड कवरेज की है। साथ ही 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान खबरों को डेस्क और ग्राउंड दोनों से कवर किया है। 2025 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ स्टेट असेंबली इलेक्शंस (हालिया महाराष्ट्र और बिहार चुनाव) के दौरान भी डेस्क से ओपिनियन पीस लिखने के साथ-साथ रियल टाइम एक्सप्लेनर भी किए। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ एनबीटी फैक्ट चेक भी करते रहे हैं।

दिनेश मिश्र अपने करीब 16 साल के कॅरियर के दौरान प्रिंट मीडिया और डिजिटल मीडिया में डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग और इंटरव्यू करने के साथ अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते आए हैं। हिंदी और गीत-संगीत में दखल रखने वाले दिनेश मिश्र ने कई किताबों की समीक्षा भी की। दिनेश मिश्र ने जाने-माने गीतकार गुलजार और गोपालदास नीरज का इंटरव्यू किया, हिंदी के महान कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के अनुभवों को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की। दिनेश मिश्र ने शोले के निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी का इंटरव्यू भी किया। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का इमरजेंसी के अनुभव पर इंटरव्यू किए और 1996 से लेकर 2001 तक अमेरिका में भारत के राजदूत रहे नरेश चंद्रा का भी इंटरव्यू किया है। इसके अलावा, हिंदी के बड़े लेखक गिरिराज किशोर और विश्वनाथ त्रिपाठी का इंटरव्यू भी किए।

नेशनल-इंटरनेशनल, बिजनेस और एंटरटेनमेंट की खबरों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर नजर रहती है। पहली प्राथमिकता है किसी भी खबर की सच्चाई के साथ विश्लेषण करना। इसके बाद उसका असर कहां और कितना पड़ेगा, इसे लेकर भी अवेयर रहते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव
दिनेश मिश्र का पत्रकारिता का कॅरियर हिंदी के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार दैनिक जागरण, नोएडा के सेंट्रल डेस्क के साथ साल 2010 में शुरू हुआ। इसके बाद से यह सफर 2013 में अमर उजाला, नोएडा से होता हुआ 2016 में राजस्थान पत्रिका के नेशनल इंटीग्रेटेड कंटेंट स्टेशन, नोएडा तक पहुंचा, जहां अखबार के साथ-साथ डिजिटल, टीवी और तीनों ही प्लेटफॉर्म पर एकसाथ काम किए। इसके बाद दिनेश मिश्र ने फिर 2019 में अमर उजाला में लौटे, जहां से 2021 में दैनिक भास्कर के डीबी डिजिटल में काम किया और एक्सप्लेनर और डीप डाइव-रिसर्च और स्पेशल स्टोरीज की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अप्रैल, 2024 में दिनेश मिश्र देश के प्रतिष्ठित मीडिया समूह टाइम्स ऑफ इंडिया के नवभारत टाइम्स से जुड़े।

दिनेश मिश्र ने कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, हरियाणा से पत्रकारिता से एमए किया। उससे पहले महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उससे भी पहले वो समाज शास्त्र से भी एमए कर चुके हैं। दिनेश मिश्र ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रतिष्ठित सिविल सेवा की मुख्य परीक्षा भी दी है और उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन की कई परीक्षाएं भी दीं। इसके अलावा, मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एमपावरमेंट के एक रिसर्च प्रोग्राम 6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स इन जेरियाट्रिक केयर भी किया है।… और पढ़ें