झारखंड लोक सेवा आयोग (Etv Bharat)
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी एक बार फिर गंभीर विवादों में घिर गया है. 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम जारी होने के बाद बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते को इस्तीफा देना पड़ा. सीआईडी ने जांच शुरू कर दी है और छापेमारी के सिलसिले में जेपीएससी कार्यालय, परीक्षा एजेंसी तथा अध्यक्ष के आवास तक पहुंच चुकी है. कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
आयोग के अध्यक्ष और राज्य के मुख्य सचिव रहे एल खियांग्ते के ऊपर गिरफ्तारी के बादल मंडराने लगे हैं. छात्रों के आंदोलन और सियासी ड्रामा के बीच राज्य सरकार जेपीएससी की गंभीरता से जांच में जुटी है. इसके बावजूद विपक्ष और छात्र संगठन इसकी जांच सीबीआई से कराने की लगातार मांग कर रहे हैं.
एल खियांग्ते भी नहीं सुधार पाए आयोग का कामकाज (Etv Bharat)
जेपीएससी अध्यक्ष एल खियांग्ते ने तोड़ा हेमंत सरकार का भरोसा
कभी सरकार के बेहद करीब माने जाने वाले वरिष्ठ अधिकारी एल खियांग्ते ने जब जेपीएससी का कामकाज संभाला तो उम्मीद की जा रही थी कि आयोग पर पूर्व में लगे दाग-धब्बे खत्म होंगे. तेजी से साफ-सुथरी परीक्षा आयोजित होगी. छात्रों को सरकारी नौकरी पाने का अवसर मिलेगा, मगर ऐसा हुआ नहीं.
1988 बैच के आईएएस रहे एल खियांग्ते एक समय मुख्य सचिव, गृह सचिव से लेकर हेमंत सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी निभा रहे थे. सरकार में इतनी पकड़ थी कि जेपीएससी में कई महीनों से खाली अध्यक्ष पद को भरने के लिए उनकी सेवानिवृत्ति का इंतजार किया जाता रहा. आखिरकार 27 फरवरी 2025 को एल. खियांग्ते को झारखंड लोक सेवा आयोग का चेयरमैन बनाया गया. कार्यभार संभालते ही लंबित परीक्षाओं को आयोजित करने में तेजी आई, मगर समय के साथ परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें आने लगीं. यहां तक कि परीक्षा लेने वाली निजी एजेंसी भी सीआईडी के रडार पर आ गई.
सरकार मानती हाई कोर्ट का आदेश तो नहीं बढ़ता विवाद
झारखंड हाईकोर्ट ने पिछले साल हाईस्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा 2016 के मामले में जेपीएससी और जेएसएससी को ग्रीवांस सेल बनाने का आदेश दिया था. इस सेल के जरिए परीक्षा और परिणाम से संबंधित शिकायतों की जांच एक अलग समिति करती, जो अदालत की निगरानी में काम करती.
मगर, सरकार ने इस आदेश को अनसुना कर दिया और इस फैसले के खिलाफ डबल बेंच में चली गई. अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव कहते हैं कि यदि सरकार झारखंड हाईकोर्ट के आदेश का पालन कर लेती तो आज जो छात्रों का विवाद रिजल्ट को लेकर उठा है, उसका उचित फोरम मिल जाता और परेशानी काफी हद तक दूर हो जाती. उन्होंने कहा कि 1 सितंबर 2025 को झारखंड हाईकोर्ट के सिंगल बेंच द्वारा दिए गए फैसले को यदि सरकार मान लेती तो आज यह नौबत नहीं होती.
जेपीएससी को लेकर सियासी बयानबाजी
जेपीएससी को लेकर झारखंड में सियासत चरम पर है. एक तरफ सरकार जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी और आयोग के कामकाज पर उठ रहे सवालों की जांच करने में जुटी है, वहीं इसको लेकर सियासत भी जमकर हो रही है. छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर रही विपक्षी दल भाजपा इस बहाने सरकार को घेरने में जुटी है.
बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल वर्णवाल ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि एल खियांग्ते को आगे कर सरकार अपना बचाव कर रही है. उन्होंने कहा कि जेपीएससी हमेशा से विवादों में रही है और हद तो यह हो गई कि एल खियांग्ते के आने के बाद इसमें जमकर भ्रष्टाचार हुआ. जब यह लगा कि सरकार फंसने जा रही है तो इसकी जांच सीआईडी से कराने के बहाने एल खियांग्ते को मोहरा बना दिया गया. उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि आखिर इसकी जांच सीबीआई से कराने से सरकार क्यों भाग रही है.
इधर, सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सीआईडी जांच को सही मानते हुए कहा है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले चाहे कोई भी हो, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. प्रदेश कांग्रेस महासचिव राकेश सिन्हा ने बीजेपी की मांग को ठुकराते हुए कहा कि जब सीआईडी अच्छा काम कर रही है तो सीबीआई जांच की कोई आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले चाहे आयोग के अध्यक्ष ही क्यों न हों, उन पर भी कार्रवाई की गई है और छापेमारी हुई है. आवश्यकता पड़ेगी तो गिरफ्तारी भी होगी.
जेपीएससी विवाद: क्यों हो रही रद्द करने की मांग
14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा इस साल 19 अप्रैल को आयोजित हुई थी, जिसका परिणाम बीते 2 जुलाई को आया था. आयोग द्वारा मुख्य परीक्षा इसी महीने आयोजित होने थे, मगर इन सबके बीच अभ्यर्थियों ने आंदोलन शुरू किया और रिजल्ट को लेकर सवाल उठने लगे.
अभ्यर्थियों ने आयोग पर ज्यादा नंबर लाने वाले छात्रों का चयन नहीं होने का आरोप लगाते हुए लोकभवन से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई. छात्रों ने कहा कि कम नंबर लाने वालों को नौकरी मिल गई. इस भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है. इधर, एबीवीपी के छात्रों की मांग है कि परीक्षा रिजल्ट को रद्द किया जाए और फिर से निष्पक्ष तरीके से परीक्षा हो.
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