NTA के 47 अफसर बर्खास्त, छात्र आंदोलन के बीच सरकार का बड़ा फैसला; केस भी दर्ज होगा, National Hindi News


नीट पेपर लीक मामले में NTA ने बड़ा ऐक्शन लिया है। एजेंसी ने इस मामले से जुड़े अपने 47 अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इतना ही जिन अधिकारियों के ऊपर आरोप सामने आए हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही करने का फैसला लिया गया है।

नीट पेपर लीक और बढ़ते छात्र आंदोलन के बीच सरकार लगातार ऐक्शन में है। सूत्रों के मुताबिक शुक्रवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी(NTA) ने नीट पेपर लीक से जुड़े 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। इतना ही नहीं एजेंसी ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ आई रिपोर्ट्स के आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला लिया है।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार की तरफ से यह फैसला नीट पेपर लीक मामले में छात्रों के बीच उठ रहे उबाल को लेकर हुआ है। इससे पहले ही गुरुवार को केंद्र सरकार ने बड़ा फेरबदल करते हुए 17 आईएएस अधिकारियों का फेरबदल किया था। इसमें उच्च शिक्षा विभाग के मौजूदा सचिव को उनके पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह पर 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया गया है।

पेपर लीक के खिलाफ ऐक्शन में सरकार

जंतर-मंतर पर जारी प्रोटेस्ट के बीच सरकार ने पेपर माफिया पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करते हुए ऐक्शन लेना शुरू कर दिया है। कल देर रात पीएम मोदी की तरफ से जारी किए गए वीडियो के बाद आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पेपर लीक से जुड़े बिल के ड्राफ्ट को मंजूरी दी गई। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बिल में पेपर लीक के आरोपियों के ऊपर अधिकतम 10 करोड़ रुपए का जुर्माना शामिल है। इसके अलावा दोषी पाए जाने वाले को कम से कम पांच और ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक की सजा देने का प्रावधान है। इन दोनों दी स्थितियों में जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

बता दें, वर्तमान में भारतीय कानून के हिसाब से पेपर लीक के दोषी को केवल तीन से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या संगठित पेपर लीक नेटवर्क में पकड़ा जाता है, तो उसको दस साल की जेल और एक करोड़ का जुर्माना लग सकता है। हालांकि, इसके बाद भी पेपर लीक की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं। इसलिए केंद्र सरकार इनको और भी ज्यादा मजबूत कर रही है।

अपडेट की जा रही है।



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