Lakhisarai News: खेतों में जहां-तहां बालू को डंप कर की जा रही बिक्री, वसूला जा रहा मनमाना कीमत

Lakhisarai News: मनोज कुमार, लखीसराय। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्त पाबंदी और मानसून में नदियों से बालू खनन पर रोक के बावजूद जिले में बालू का अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है। बाढ़ और बारिश के बहाने नदियों से दूर ग्रामीण इलाकों में डंप किए गए अवैध बालू को अब आसमान छूती कीमतों पर बेचा जा रहा है। खनन माफियाओं ने सरकारी नियमों की अनदेखी करते हुए किऊल नदी के तटीय इलाकों, खेतों को अवैध भंडारण का सुरक्षित अड्डा बना लिया है। नियमों के मुताबिक मानसून के दौरान जलीय जीवों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए नदियों से बालू के उठाव पर पूरी तरह रोक लगा दिया जाता है। लेकिन बालू माफियाओं ने इस नो माइनिंग पीरियड को कमाई का सबसे बड़ा जरिया बना लिया है। रोक लागू होने से ठीक पहले किऊल नदी से लाखों सीएफटी बालू निकालकर ग्रामीण इलाकों में डंप कर लिया गया था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, माफियाओं ने इस अवैध भंडारण के लिए आबादी से दूर खेतों सुनसान रास्तों और बंद पड़ी राइस मिलों व फैक्ट्रियों का इस्तेमाल किया है। दिन के उजाले में जहां सन्नाटा पसरा रहता है वहीं रात के अंधेरे में इन ठिकानों से ट्रैक्टरों और ट्रकों के जरिए बालू की तस्करी की जा रही है।
पाँच गुना दामों पर ब्लैक मार्केटिंग:
बारिश के मौसम में निर्माण कार्यों के लिए बालू की किल्लत का फायदा सीधे तौर पर माफिया उठा रहे हैं। जो बालू आम दिनों में सामान्य कीमतों पर मिल जाता उसे अब ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। माफियाओं की इस चांदी से जहां एक तरफ आम जनता की जेब कट रही है वहीं दूसरी तरफ सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की भारी क्षति हो रही है। बिना किसी वैध चालान और रॉयल्टी के रोजाना लाखों रुपये का बालू बाजार में खपाया जा रहा है।
खाकी और खनन विभाग की मौन सहमति:
इस पूरे खेल में सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका पर खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्य सड़कों से लेकर देहाती इलाकों तक रोजाना दर्जनों ओवरलोडेड गाड़ियां गुजरती हैं लेकिन पुलिस और खनन विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।जमीन पर दिख रही हकीकत साफ गवाही देती है कि बिना निचले स्तर की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर अवैध भंडारण और उसकी बेधड़क सप्लाय मुमकिन नहीं है। छापेमारी के नाम पर महज खानापूर्ति होती है जबकि मुख्य सिंडिकेट पुलिस की पहुंच से दूर महफूज बैठा है।
कोट-
मानसून में बालू घाटों से उठाव कानूनन अपराध है। जिन संवेदकों के पास टेंडर था उनके द्वारा किए गए स्टॉक की जांच के लिए खनन विभाग को निर्देशित किया गया है। जहां भी अवैध डंपिंग की सूचना मिल रही है वहां टीम भेजकर जांच कराई जाएगी। नियमानुसार अधिकृत स्टॉक पॉइंट से बालू की बिक्री पर वैध चालान देना अनिवार्य है। हालिया वाहन चेकिंग के दौरान पकड़े गए कुछ ट्रैक्टर चालकों द्वारा जमुई जिले का चालान दिखाया गया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मैंने खुद जमुई एसपी से कोऑर्डिनेशन स्थापित किया है। दोनों जिलों की सीमा पर जल्द ही संयुक्त छापेमारी की जाएगी। नियम तोड़ने वाले माफियाओं और संवेदकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। – प्रेरणा कुमार, एसपी लखीसराय
सामान्य प्रश्न
✦लखीसराय में बालू का अवैध कारोबार किससे जुड़ा है?−
लखीसराय में बालू का अवैध कारोबार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की सख्त पाबंदी के बावजूद जारी है।
✦बारिश के मौसम में बालू की किल्लत का कौन फायदा उठा रहा है?+
✦स्थानीय प्रशासन की भूमिका क्या है?+
✦अवैध डंपिंग की सूचना मिलने पर क्या कार्रवाई होगी?+
