गौतम अडानी समूह का अब रियल एस्टेट में भी दबदबा बढ़ने लगा है। दरअसल, इस साल भारतीय रियल एस्टेट कंपनियों में अडानी प्रॉपर्टीज की वैल्यूएशन में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई है। वैल्यूएशन में इस जबरदस्त बढ़ोतरी ने गौतम अडानी और उनके परिवार को पहली बार हुरुन इंडिया रियल एस्टेट की रिच लिस्ट में पहला स्थान मिला है। इसी के साथ उन्होंने DLF के मालिक राजीव सिंह और उनके परिवार के अलावा लोढ़ा डेवलपर्स के मंगल प्रभात लोढ़ा को पीछे छोड़ दिया है।
किसकी कितनी दौलत?
अडानी की बात करें तो उनकी रियल एस्टेट संपत्ति ₹90,400 करोड़ है जो पिछले साल के मुकाबले 73% ज्यादा है। यह रैंकिंग अडानी प्रॉपर्टीज में परिवार की पूरी हिस्सेदारी को दिखाती है। राजीव सिंह और उनका परिवार 90,200 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर आ गया है। मार्केट में आई गिरावट के कारण उनकी संपत्ति में 29 प्रतिशत की कमी आई है। मंगल प्रभात लोढ़ा और उनका परिवार 67,700 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर है। पिछले साल के मुकाबले उनकी संपत्ति में 27 प्रतिशत की कमी आई है और वे एक पायदान नीचे खिसके हैं।
क्या है रिपोर्ट में?
2026 ग्रोहे-हुरुन इंडिया रियल एस्टेट 150 रिपोर्ट बताती है कि अडानी प्रॉपर्टीज की वैल्यू एक साल में 72.5% बढ़कर ₹90,400 करोड़ पहुंच गई। इस दौरान कंपनी ने करीब ₹38,000 करोड़ की नई वैल्यू जोड़ी, जो इस साल रियल एस्टेट सेक्टर में सबसे अधिक है। लिस्ट में अडानी प्रॉपर्टीज देश की चौथी सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी है। DLF अभी भी देश की सबसे मूल्यवान रियल एस्टेट कंपनी बनी हुई है। हालांकि, इस समूह का वैल्यूएशन साल-दर-साल 29.3% गिरा है।
वहीं, लोढ़ा डेवलपर्स दूसरे और इंडियन होटल्स कंपनी तीसरे स्थान पर हैं। इन दोनों कंपनियों की भी हालत खराब रही और वैल्यूएशन क्रमश: 32.2% और 13.9% गिर गया है। अगर अडानी प्रॉपर्टीज की बात करें तो यह भारत की सबसे मूल्यवान अनलिस्टेड रियल एस्टेट डेवलपर का अपना दर्जा भी बनाए रखा है। बता दें कि वर्तमान में अडानी प्रॉपर्टीज शेयर बाजार में लिस्ट नहीं है। यह कंपनी अडानी समूह की लीडिंग अडानी एंटरप्राइजेज के अधीन काम करती है।
हुरुन का मानना है कि अडानी समूह भविष्य में भारत का सबसे बड़ा रियल एस्टेट कारोबार खड़ा कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी समूह ने अपनी रियल एस्टेट गतिविधियों को अडानी प्रॉपर्टीज के तहत इंटीग्रेट किया है, जिससे कंपनी की वैल्यू में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। लिस्ट में शामिल 151 कंपनियों की कुल वैल्यूएशन सिर्फ 2% बढ़कर ₹16.5 लाख करोड़ हो गई, जो नौ साल पहले रैंकिंग शुरू होने के बाद से सबसे धीमी ग्रोथ है। पिछले साल की लिस्ट में 14% की ग्रोथ दर्ज की गई थी।