Market Outlook: Middle East तनाव, महंगा Crude और Share Market… आगे क्या होगा?
Market Outlook: इस हफ्ते की शुरुआत वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच हुई है, लेकिन भारतीय शेयर बाजार ने अब तक उम्मीद से ज्यादा मजबूती दिखाई है। Middle East में बढ़ते तनाव, अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ती टकराव की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद बाजार पूरी तरह दबाव में नहीं आया है।

हालांकि कारोबार के दौरान बाजार में गिरावट देखने को मिली और निवेशकों की चिंता बढ़ी, लेकिन अब तक बाजार ने अपने अहम सपोर्ट लेवल को बचाकर रखा है।
Middle East में हालात अभी भी सामान्य नहीं हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है और दोनों देशों की ओर से जवाबी कार्रवाई का दौर जारी है। इस भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
क्रूड ऑयल की कीमतें करीब 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं। अब निवेशकों को डर है कि अगर तनाव और बढ़ा तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा सकती हैं। ऐसा होने पर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं और शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ सकता है।
बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक तनाव का असर एशियाई बाजारों पर भी साफ दिखाई दिया। ज्यादातर प्रमुख एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते नजर आए। भारतीय शेयर बाजार में भी शुरुआती कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली।
निवेशकों ने जोखिम वाले एसेट्स में खरीदारी से दूरी बनाई, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।
कारोबार के दौरान निफ्टी और बैंक निफ्टी दोनों ही लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का दबाव ज्यादा देखने को मिला, जिससे बैंक निफ्टी में अच्छी-खासी गिरावट दर्ज हुई।
हालांकि गिरावट के बावजूद बाजार में घबराहट वाली स्थिति नहीं दिखी। निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह टूटा नहीं है।
बाजार में सबसे सकारात्मक बात यह रही कि गिरावट के बावजूद बुल्स ने अपनी पकड़ बनाए रखी। जिस स्तर को बाजार के लिए मजबूत सपोर्ट माना जा रहा था, वह अब तक कायम है।
यही वजह है कि लगातार वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह टूटता नजर नहीं आ रहा। निवेशकों का मनोबल अभी भी बना हुआ है और हर गिरावट पर खरीदारी देखने को मिल रही है।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर Middle East के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों की चाल पर रहेगी। यदि तनाव और बढ़ता है तथा क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार जाता है, तो भारतीय बाजार में भी अस्थिरता बढ़ सकती है।
फिलहाल, बाजार दबाव में जरूर है, लेकिन बुल्स की मजबूती यह संकेत दे रही है कि निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। आने वाले सत्रों में वैश्विक घटनाक्रम ही बाजार की दिशा तय करेंगे।