Modi Melbourne Rally,’भारतीयों के वोट के लिए प्रचार’, मोदी की मेलबर्न रैली पर भड़का ऑस्ट्रेलियाई मीडिया, एंथनी अल्बनीज को घेरा – australian media criticise modi albanese rally in melbourne james morrow says australia got played – Other countries News


Modi Melbourne Rally: स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया पर आलोचक तर्क दे रहे थे कि एंथनी अल्बनीज स्थानीय चुनावों से पहले ऑस्ट्रेलिया में तेजी से बढ़ रही भारतीय मूल की आबादी को लुभाने के लिए इस विशाल रैली का इस्तेमाल कर रहे थे और उन्होंने द्विपक्षीय समझौतों की असलियत पर भी सवाल उठाए हैं।

हाइलाइट्स

  • ऑस्ट्रेलियन मीडिया में मोदी की मेलबर्ल रैली की आलोचना
  • स्काई न्यूज के पत्रकार ने ‘वोट बैंक की राजनीति’ कहा
  • ऑस्ट्रेलियन पीएम पर ‘भारतीयों के वोट’ के लिए रैली का आरोप

Modi Albanese rally
ऑस्ट्रेलियन मीडिया में मोदी की मेलबर्न रैली की आलोचना
कैनबरा: ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में मेलबर्न में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की संयुक्त रैली की कड़ी आलोचना की जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के रूढ़िवादी पत्रकारों का कहना है कि ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री ने ‘भारतीय मूल के लोगों को वोट के मकसद से इस रैली का आयोजन किया गया था।’ स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया जैसे मीडिया आउटलेट्स ने ऑस्ट्रेलियान पीएम अल्बनीज का मजाक उड़ाते हुए कहा है कि वे मोदी के पीछे ‘किसी रैश’ यानि ‘त्वचा की समस्या’ की तरह पड़े हुए थे और भारतीय मूल के लोगों के वोट पाने की कोशिश कर रहे थे।

स्काई न्यूज ऑस्ट्रेलिया पर आलोचक तर्क दे रहे थे कि एंथनी अल्बनीज स्थानीय चुनावों से पहले ऑस्ट्रेलिया में तेजी से बढ़ रही भारतीय मूल की आबादी को लुभाने के लिए इस विशाल रैली का इस्तेमाल कर रहे थे और उन्होंने द्विपक्षीय समझौतों की असलियत पर भी सवाल उठाए हैं। इसके अलावा 7NEWS का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें मोदी के बिना स्क्रिप्ट वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचने की बात को उजागर किया गया था।

मोदी-अल्बनीज की रैली पर ऑस्ट्रेलियन मीडिया में सवाल

स्काई न्यूज के होस्ट जेम्स मोरो ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दिखाई देने की आलोचना की है। उनका तर्क है कि अल्बनीज ने विक्टोरिया चुनाव से पहले ऑस्ट्रेलिया में भारतीय वोटरों को लुभाने के लिए इस कार्यक्रम का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा ‘भारत के प्रधानमंत्री मोदी के लिए मेलबर्न में रैली का आयोजन किया गया और इसे हमारे प्रधानमंत्री होस्ट कर रहे थे। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे और इसमें टेलर स्विफ्ट के प्रोग्राम से ज्यादा भीड़ मौजूद था।’
उन्होंने कहा ‘रैली में हमारे प्रधानमंत्री ने नरेन्द्र मोदी की जमकर तारीफ की। एंथनी अल्बनीज पीएम मोदी की सेल्फी ले रहे थे। इसमें विक्टोरिया के नेता मौजूद थे और विक्टोरिया में पूरे ऑस्ट्रेलिया के सबसे ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं।’ उन्होंने आगे कहा ‘मेरी बातों को गलत तरीके से नहीं लिया जाए। भारतीय काफी मेहनती हैं और पूरी मेहनत से ऑस्ट्रेलिया के विकास में योगदान दे रहे हैं लेकिन ये काफी विचित्र हैं कि हमारे प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया में एक विदेशी नेता के साथ राजनीतिक कार्यक्रम कर रहे हैं और उस मोदी के साथ जिसके ऊपर भारत में हिंदुत्व की राजनीति करने का आरोप लगते हैं।’

‘मोदी को देखकर अति-उत्साहित थे ऑस्ट्रेलियन पीएम’

पत्रकार जेम्स मोरो ने कहा कि नरेन्द्र मोदी को देखकर ऑस्ट्रेलिया के पीएम उति-उत्साहित दे रहे थे। ऑस्ट्रेलियाई विश्लेषकों जैसे रेडब्रिज ग्रुप के पोलस्टर का हवाला देते हुए बताया है कि पिछले चुनावों में लगभग 85% भारतीय प्रवासियों ने लेबर पार्टी (अल्बनीज की पार्टी) को वोट दिया था। इसलिए अल्बनीज और विक्टोरिया की प्रीमियर जसिंटा एलन इस बड़े वोट बैंक को रिझाने के लिए इतने बड़े पैमाने पर सरकारी और टैक्सपेयर्स के पैसे का इस्तेमाल करके रेड कार्पेट बिछा रहे थे।

अभिजात शेखर आजाद

लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।

अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।

विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।

पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।

पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।

अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें