Moradabad Land Scam: 76 लोगों ने मिलकर हड़प ली 729 बीघा सरकारी जमीन; डॉक्टर, प्रधान और लेखपाल का खेल उजागर


जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मंडल में नदी किनारे जमीन के फर्जी पट्टों का खेल गहराता जा रहा है। संभल, अमरोहा और मुरादाबाद में 1488 बीघा में 101 फर्जी पट्टे मिल चुके हैं। नया मामला करीब 729 बीघा जमीन पर 70 लोगों के नाम फर्जी पट्टों का है। इस जमीन पर पलेज (बेल वाली फसल खीरा, तरबूज और खरबूजा), रेत खनन व खेती होती है।

यहां प्रधान, उसके बहनोई लेखपाल व परिवार के लोगों के नाम पर ही 300 बीघा जमीन के पट्टे हुए। अधिकांश जमीन के पट्टे दूसरे गांवों के रहने वाले लोगों के नाम पर भी किए गए हैं। मामला प्रशासन तक पहुंचा तो जांच शुरू करा दी गई है।

1985 में क्षेत्र में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई। ग्राम सभा मुस्तफापुर को दो भागों (गांव मुस्तफापुर मजरा खंडसाल व दूसरा मुस्तफापुर एतमाली) में विभाजित किया गया। 2008 में चकबंदी प्रक्रिया में तेजी आई। नदी की रेतीली जमीन, झील, तालाब आदि की जमीन राजस्व रिकार्ड में श्रेणी-छह में दर्ज होती हैं। इस जमीन की खरीद-फरोख्त प्रतिबंधित है।

चकबंदी के दौरान संबंधित दस्तावेजों को नजरअंदाज कर चकबंदी विभाग ने रेत-पानी की जमीनों पर अवैध पट्टे मान्य कर दिए गए। शिकायत के अनुसार 2012-14 के बीच तत्कालीन प्रधान हमसिरत व उनके बहनोई लेखपाल हामिद हुसैन ने 729 बीघा जमीन के पट्टों की फाइल अवैध रूप से चकबंदी विभाग से भी अनुमोदन कराकर खुद समेत 76 लोगों के नाम पट्टे काट दिए।

सबसे बड़ी बात यह है कि लाभ पाने वाले अधिकांश किसान पड़ोसी गांव के हैं। लेखपाल हामिद ने पत्नी व बेटों के नाम भी करीब 50 बीघा जमीन के पट्टे कराकर चकबंदी अधिकारियों से अनुमोदित कराये गए। बीवीपुर के जिस परिवार के नाम करीब 300 बीघा जमीन का पट्टा हुआ, उसके मुखिया डाॅ. मुशाहिद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक हैं।

इनका आवास बीवीपुर की जगह मुस्तफापुर दिखाया। मुशाहिद के भाई जाकिर 2011-15 तक ग्राम प्रधान रह चुके हैं। जाकिर की पत्नी रेशमा, चचेरे भाई मासूक की पत्नी फरमीदा के नाम भी पट्टा है। डीएम डा.राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि प्रकरण संज्ञान में आ गया है। जांच भी शुरू करा दी गई है। दोषियों पर जल्द ही कार्रवाई होगी।



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