Real Estate Outlook: 2026 में घर खरीदने में मुनाफा या होगा घाटे का सौदा?
Real Estate Outlook: भारत का रियल एस्टेट सेक्टर पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में है। कहीं रिपोर्ट्स में बूम की बात हो रही है तो कहीं स्लोडाउन की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी घर खरीदना सही रहेगा या इंतजार करना चाहिए?

The Wealth Company के Fund Manager भव्य बागरेचा के मुताबिक, मौजूदा समय में रियल एस्टेट सेक्टर किसी बड़े संकट में नहीं बल्कि Consolidation Phase से गुजर रहा है। यानी बाजार खुद को बदलती मांग और खरीदारों की पसंद के अनुसार ढाल रहा है। उनका मानना है कि भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है।
एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिल रहा है कि खरीदार अब प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। ₹1.5 करोड़ से ऊपर के घरों की मांग और सप्लाई दोनों मजबूत बनी हुई हैं।
वहीं दूसरी तरफ Affordable Housing Segment कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। बढ़ती जमीन की कीमतें, निर्माण लागत और सीमित सप्लाई के कारण इस वर्ग में घर खरीदना पहले की तुलना में मुश्किल होता जा रहा है।
हालांकि एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाएं, एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क और नए ग्रोथ कॉरिडोर भविष्य में इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
इस सवाल का जवाब पूरी तरह “हां” या “ना” में नहीं है।
भव्य बागरेचा के अनुसार, कुछ बड़े शहरों के चुनिंदा माइक्रो मार्केट्स में पिछले एक साल के दौरान 10% से 20% तक कीमतें बढ़ी हैं, जिससे Affordability प्रभावित हुई है।
लेकिन पूरे भारत की तस्वीर अलग है। जिन इलाकों में नया इंफ्रास्ट्रक्चर, एयरपोर्ट, मेट्रो या इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बन रहे हैं, वहां भविष्य में बेहतर अवसर देखने को मिल सकते हैं। इसलिए केवल कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय लोकेशन और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना ज्यादा जरूरी है।
अगर मकसद खुद रहने के लिए घर खरीदना है तो फैसला अलग होगा, लेकिन निवेश की बात करें तो भावनाओं से ज्यादा रिटर्न पर ध्यान देना चाहिए।
एक्सपर्ट के मुताबिक निवेशकों को दो चीजें देखनी चाहिए-
- Capital Appreciation
- Rental Income
यदि आपका लक्ष्य लंबी अवधि में संपत्ति की कीमत बढ़ने का फायदा उठाना है, तो नए ग्रोथ कॉरिडोर और अच्छी लोकेशन वाले रेजिडेंशियल प्लॉट बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
वहीं नियमित किराये की आय चाहने वाले निवेशकों के लिए Commercial Real Estate अधिक आकर्षक साबित हो सकता है, जहां 7-8% तक वार्षिक Rental Yield मिलने की संभावना रहती है।
हर निवेशक के पास करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खरीदने का बजट नहीं होता। ऐसे में REITs (Real Estate Investment Trusts) एक बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं।
REITs के जरिए निवेशक कम राशि से भी कमर्शियल रियल एस्टेट में निवेश कर सकते हैं। इसमें बेहतर Liquidity, Transparency और Stock Market जैसी आसान खरीद-बिक्री की सुविधा भी मिलती है।
जो निवेशक बिना प्रॉपर्टी मैनेजमेंट की परेशानी के रियल एस्टेट का फायदा उठाना चाहते हैं, उनके लिए REITs एक उपयोगी विकल्प हो सकते हैं।
एक्सपर्ट का मानना है कि केवल मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु ही नहीं, बल्कि कई Tier-1 और Tier-2 शहर भी तेजी से उभर रहे हैं।
लखनऊ, जयपुर, पुणे, इंदौर जैसे शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी पार्क, डेटा सेंटर, इंडस्ट्रियल हब और नए कॉरिडोर विकसित हो रहे हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।
रियल एस्टेट में निवेश केवल लोकेशन देखकर नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेश से पहले डेवलपर की विश्वसनीयता, प्रोजेक्ट की कानूनी स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रगति, टैक्सेशन, स्टाम्प ड्यूटी और भविष्य में Exit की संभावनाओं का पूरा आकलन जरूर करें। खासकर ऐसे प्रोजेक्ट्स से बचें जहां केवल घोषणाएं हुई हों लेकिन जमीन पर काम शुरू न हुआ हो।
रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर भले ही बाजार में अलग-अलग राय मौजूद हो, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी अभी भी मजबूत बनी हुई है। सही लोकेशन, भरोसेमंद डेवलपर और स्पष्ट निवेश उद्देश्य के साथ किया गया निवेश आने वाले वर्षों में बेहतर रिटर्न दे सकता है। हालांकि जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय पूरी Due Diligence और वित्तीय सलाहकार की राय लेना हमेशा बेहतर रणनीति होगी।