Saudi Expert On India Uae Brahmos Deal,भारत की मिसाइल डिप्लोमेसी का खाड़ी में डंका, UAE को ब्रह्मोस मिलने से सऊदी के एक्सपर्ट्स की दिलचस्प प्रतिक्रिया – saudi experts believes brahmos export to uae boost gcc security saw india as emerging defence supplier – Uae News
Saudi Experts on BrahMos: सऊदी अरब के डिफेंस एक्सपर्ट्स जो चर्चा कर रहे हैं उसमें कई बातें महत्वपूर्ण हैं। एक बात ये कि खाड़ी के देश अपने अपने रक्षा संबंध में विविधता ला रहे हैं और किसी एक देश पर निर्भरता कम कर रहे हैं। भारत को लेकर उनकी धारणा बदली है।
हाइलाइट्स
सऊदी अरब में भारत-UAE संभावित ब्रह्नोस सौदे पर चर्चा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा होगी मजबूत
UAE भारत से ब्रह्मोस और आकाशतीर सिस्टम खरीद सकता है
भारत-UAE ब्रह्मोस मिसाइल डील की खाड़ी देशों में चर्चा।
रियाद/अबू धाबी: भारत और संयुक्त अरब अमीरात के संभावित ब्रह्मोस मिसाइल डील को लेकर सऊदी अरब में काफी चर्चा की जा रही है। सऊदी अरब के डिफेंस एनालिस्ट काफी करीब से इस सौदे पर नजर रख रहे हैं। हालांकि अभी तक ना तो भारत और ना ही यूएई ने इस डील को लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ कहा है लेकिन सऊदी अरब के डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर संयुक्त अरब अमीरात भारतीय ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदता है तो खाड़ी देशों की सुरक्षा और मजबूत होगी।
हालांकि सऊदी अरब ने भी सार्वजनिक तौर पर इस संभावित डील को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। लेकिन खाड़ी देशों के रक्षा विश्लेषक और रणनीतिक मामलों के जानकार आम तौर पर इस संभावना को रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा आधुनिकीकरण और सामूहिक खाड़ी सुरक्षा के व्यापक नजरिए से देख रहे हैं। उनका मानना है कि यूएई का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा सऊदी अरब के खिलाफ नहीं है और ना रियाद को इससे चिंतित होने की जरूरत है।
भारत को अत्याधुनिक सैन्य सप्लायर के तौर पर देख रहा सऊदी
सऊदी अरब के डिफेंस एक्सपर्ट्स जो चर्चा कर रहे हैं उसमें कई बातें महत्वपूर्ण हैं। एक बात ये कि खाड़ी के देश अपने अपने रक्षा संबंध में विविधता ला रहे हैं और किसी एक देश पर निर्भरता कम कर रहे हैं। उनका मानना है कि हालिया क्षेत्रीय संघर्षों खासकर ईरान और ईरान के प्रॉक्सी के हमलों, जिनमें ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है उसने यह साबित कर दिया है कि सिर्फ पश्चिमी सिस्टम पर निर्भर रहने के बजाय और साझेदार बनाने की जरूरत है। इसके तहत एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाना काफी जरूरी है। इसके अलावा सऊदी अरब के एक्सपर्ट यूएई के संभावित ब्रह्मोस और आकाशतीर एयर डिफेंस सौदे को इस संदर्भ में देख रहे हैं कि भारत अब एक अत्याधुनिक सैन्य तकनीक वाला देश बन चुका है और वो अब एक सप्लायर की भूमिका में आ चुका है। क्षेत्रीय जानकारों का कहना है कि भारत का रक्षा निर्यात अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों के स्थापित सप्लायर्स के अलावा खरीद का एक अतिरिक्त विकल्प देता है। विश्लेषक यह भी बताते हैं कि भारत का बढ़ता रक्षा औद्योगिक आधार और अपने देश में बने सिस्टम के निर्यात की इच्छा ने एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के तौर पर उसकी विश्वसनीयता को मजबूत किया है।
सऊदी के लिए खतरा नहीं भारत-यूएई डिफेंस डील
सऊदी अरब के रक्षा विशेषज्ञ UAE को ब्रह्मोस मिसाइलें दिए जाने की संभावना को सऊदी की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा नहीं मानते हैं। इसके बजाय वे इसे गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) की सामूहिक सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने वाले कदम के तौर पर देखते हैं। सऊदी अरब और UAE के बीच गहरे सैन्य सहयोग को देखते हुए UAE की बेहतर क्षमताएं होर्मुज जलडमरूमध्य और व्यापक अरब खाड़ी के आसपास के अहम समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने में मदद कर सकती हैं। ये इलाके क्षेत्रीय और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
लेखक के बारे मेंअभिजात शेखर आजादअभिजात शेखर आजाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में इंटरनेशनल अफेयर्स, डिफेंस जर्नलिस्ट हैं। उनके पास अलग अलग न्यूज चैनलों और डिजिटल पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। वे अंतरराष्ट्रीय राजनीति (International Politics), वैश्विक कूटनीति (Global Diplomacy) और रक्षा रणनीति (Defense Strategy) के विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने इन वर्षों में 3 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध, इजरायल-हमास युद्ध, मिडिल ईस्ट, अफगानिस्तान युद्ध, ISIS के खिलाफ संघर्ष, भारत पाकिस्तान संघर्ष जैसे अहम अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं को कवर किया है।
अभिजात शेखर आजाद वैश्विक राजनीति का विश्लेषण करते हैं और भारत पर उसका क्या असर होगा, इसका एनालिसिस करते हुए विश्लेषणात्मक स्टोरी लिखते हैं। इसके अलावा इंटरनेशनल डिफेंस सेक्टर पर उनकी खास नजर होती है। हथियारों की खरीद बिक्री, अंतर्राष्ट्रीय हथियार व्यापार पर वो करीबी नजर रखते हैं। रक्षा जगत में अंदरूनी पहुंच होने की वजह से डिफेंस मामलों पर उनकी सटीक खबरों का काफी प्रभाव है।
विशेषज्ञता- इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के साथ साथ डिफेंस सेक्टर की खबरों के विश्लेषण में अच्छी पकड़। भारतीय वायुसेना और नौसेना और डिफेंस इंटेलिजेंस में पैठ। जियो-पॉलिटिक्स को लेकर अभिजात शेखर आजाद के अनुमान अकसर सही साबित होते हैं। उनकी विशेषज्ञता केवल समाचार रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वे जटिल अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भारतीय दर्शकों के लिए सरल और प्रभावी ढंग से समझाने के लिए जाने जाते हैं। राफेल डील से लेकर अत्याधुनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी और वैश्विक शक्ति संतुलन पर सैकड़ों विश्लेषणात्मक लेख।
पत्रकारिता अनुभव: अभिजात शेखर आजाद के पत्रकारिता में करीब 17 सालों का अनुभव है। उन्होंने 2009 से पत्रकारिता में अपना कैरियर शुरू किया था और उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग में अच्छी पकड़ बनाई। उन्होंने समाचार प्लस और ज़ी मीडिया जैसे संस्थानों में काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातक किया है।
पुरस्कार: अभिजात को ज़ी मीडिया में बेहतरीन लेखन के लिए ‘बेस्ट राइटर’ अवार्ड मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें दो बार ENBA अवार्ड भी मिला है।
अभिजात के खास इंटरव्यू:
अभिजात शेखर आजाद का ‘बॉर्डर-डिफेंस’ नाम से साप्ताहिक वीडियो इंटरव्यू आता है, जिसमें वो सैन्य अधिकारियों और डिप्लोमेट्स से बात करते हैं। उन्होंने कई बड़े चेहरे जैसे DRDO के वैज्ञानिक और ब्रह्मोस मिसाइल बनाने वाले वैज्ञानिक अतुल दिनकर राणे, डीआरडीओ वैज्ञानिक हरि बाबू चौरसिया, भारतीय सेना के पूर्व आर्मी चीफ वेद मलिक, लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन, लेफ्टिनेंट जनरल संजय वर्मा, एयर मार्शल रवि कपूर, एयर फोर्स अधिकारी विजयेन्द्र के ठाकुर, फाइटर पायलट आरके नारंग, डिप्लोमेट एसडी मुनि, डिप्लोमेट सी उदय भाष्कर, डिप्लोमेट अनिल त्रिगुणायत, डिप्लोमेस रोबिंदर सचदेव, नौसेना कैप्टन श्याम कुमार समेत कई एयरफोर्स और नौसेना अधिकारियों का इंटरव्यू ले चुके हैं।… और पढ़ें