PCS Success Story: मध्य प्रदेश के किसान परिवार से आने वाले सोनू कर्मी ने गरीबी, बीमारी और तानों से हार मानने के बजाय दिन-रात कड़ी मेहनत करना चुना। बिना कोचिंग, कॉलेज का इंटरनेट इस्तेमाल करके सेल्फ स्टडी की और MPPSC PCS परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल करके DPS बने थे।

मध्य प्रदेश के किसान परिवार से आते हैं सोनू कर्मी
डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता, सब कुछ बर्बाद हो गया
किसान पिता बेटों को डॉक्टर बनाना चाहते थे। उन्होंने PMT की तैयारी भी की। लेकिन बड़ी असफलता मिली। जोश टॉक को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने संघर्ष की कहानी बयां की है। उन्होंने बताया कि प्री-मेडिकल टेस्ट (PMT) की तैयारी के लिए उन्हें घर छोड़ना पड़ा।
वे इंदौर चले गए, लेकिन वहां के माहौल और संसाधनों की तुलना में खुद को कम समझा और बुरी तरह टूट गए। बहुत कोशिश की फिर भी उससे उभर नहीं पाए। पीलिया होने की वजह से पढ़ाई छोड़कर वापस घर लौटना पड़ा। एक साल की बर्बादी और बड़ी असफलता ने उन्हें डिप्रेशन में डाल दिया था।
ताने देते थे लोग, जिंदगी खत्म करने के विचार आने लगे थे
यह वो मुश्किल दौर था जब सोनू न सिर्फ लोगों के ताने सह रहे थे, बल्कि खुद अंदर से टूट चुके थे। यहां तक कि आत्महत्या तक के ख्याल आने लगे थे। लोग कहने लगे थे कि बड़ा हीरो बनने चला था, अब समझ आया। तब परिवार के सपोर्ट ने उन्हें वापस खड़े होने में मदद की।
बी-फार्मा के साथ सरकारी नौकरी की तैयारी
मेडिकल फील्ड में जाने के लिए उन्होंने सागर जिले के कॉलेज में बी-फार्मा में एडमिशन ले लिया। पढ़ाई के साथ परिवार को आर्थिक तंगी से निकालने के लिए उन्होंने सरकारी नौकरी तैयारी भी शुरू कर दी। वे सप्ताह में एक दिन सिर्फ सरकारी नौकरी की तैयारी करते थे। यहीं से उन्होंने सिविल सेवा में जाने का सपना देखा था।
बिना कोचिंग की MPPSC PCS की तैयारी
मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने टफ शेड्यूल फॉलो किया। दिन में 16 से 18 घंटे पढ़ाई की। जितनी जरूरत होती थी सिर्फ उतनी नींद ली। सिर्फ जिंदा रहने लायक खाना खाया। भूख-प्यास भूलकर प्रिपरेशन पर फोकस किया। मंहगी कोचिंग के पैसे नहीं थे, इसलिए कॉलेज की लाइब्रेरी में घंटों पढ़ाई की और इंटरनेट का इस्तेमाल करके खुद नोट्स बनाए।
MP PCS में 18वीं रैंक लाकर बने थे DSP
एमपी पीसीएस क्रैक करना आसान नहीं था। पहले प्रयास में असफलता हाथ लगी थी। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों से सीखकर दूसरे प्रयास में MPPSC PCS 2015 परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल करके DSP बने। वे कहते हैं कि मां को ये भी नहीं पता था कि डीएसपी क्या होता है। सिर्फ इतना पता था कि पुलिस की नौकरी लगी है। सोनू कुर्मी की स्टेट सिविल सेवा परीक्षा पास करने की यह जर्नी साबित करती है कि बुलंद हौसलें और कठिन परिश्रम से हर जंग जीती जा सकती है।
(All Photos Credit: FB/snkurmi)
