
ईंट के भट्टे पर हुआ था जन्म, वहीं बिता बचपन
सतीश, उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उनका जन्म ईंट के भट्टे पर ही हुआ था। जोश टॉक को दिए एक इंटरव्यू में संघर्ष से सफलता तक की कहानी बताई है। वे बताते हैं कि उनका पूरा परिवार प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करता था।
न स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी थी और न शिक्षा का माहौल था। उनका जन्म भी ईंट के भट्टे पर ही हुआ था। पहले मिट्टी खेलते थे, फिर वही तकदीर बन गई थी। परिवार में नौ बहन-भाई थे और तंगहाली इतनी थी कि एक जोड़ी कपड़े के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।
(फोटो सोर्स- Pexels)
ईंट ढोई, शादियों में लाइट उठाई, फिर वो एक थप्पड़
सतीश बताते हैं कि वो ऐसे परिवेश से आते हैं जहां माता-पिता यह देखते हैं कि बच्चा वजन उठाने लायक हो गया है तो उसे काम पर लगा दो, पढ़ाई-लिखाई तो बहुत दौर की बात थी। जैसे ही होश संभाला, वो भी ईंट के भट्टे पर मजदूरी का काम करने लगे। दिन में ईंट ढोने का काम और रात में शादियों में लाइट उठाने का काम किया।
एक बार एक पार्टी में वे जब लाइट उठा रहे थे तब लाइट का तार हाथ से छूट गया। तब वहां मौजूद एक शख्स ने सभी के सामने एक जोरदार थप्पड़ मार दिया। यह थप्पड़ सिर्फ सतीश के गाल पर नहीं, बल्कि उनके आत्म-सम्मान पर लगा था। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि उन्हें इस तरह जीवन नहीं काटना है और इस अपमानजनक स्थिति से बाहर निकलता है।
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दिन में बेलदारी और रात में पढ़ाई
उन परिस्थितियों से निकलना आसान नहीं था। फिर भी सतीश ने हार नहीं मानी। उन्होंने पिता के साथ बेलदारी का काम किया। वे दिनभर मेहनत करते थे और शाम को पढ़ाई करते थे। थकान और दर्द की वजह से शरीर आराम चाहता था। लेकिन दिमाग और खुद से किया वादा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता था। थक्कर चूर होने के बावजूद रोज शाम को साइकिल चलाकर ट्यूशन पढ़ने जाते थे। वे कहते हैं कि वो समय दर्दनाक था, फिर भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ।
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पिता के निधन के बाद टूट गए थे सतीश
एक तरफ जीवन में संघर्ष कम नहीं हो रहा था, तो दूसरी ओर पिता की कैंसर जैसी गंभीर बीमारी उन्हें अंदर से तोड़ रही थी। साल 2018-19 का समय उनके लिए सबसे कठिन था। मजदूरी के साथ स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे। घर आकर पिता की सेवा करते थे।
10 मार्च 2019 को उनके पिता का निधन हो गया और उस दिन घर में एक रुपया भी नहीं था। पिता के जाने के बाद सतीश और उनका परिवार टूट गया था। सतीश डिप्रेशन में चले गए थे।
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एसएससी एग्जाम क्रैक कर बने अफसर
साल 2019-20 में सतीश ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने रात-रातभर जाकर पढ़ाई की। सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलताएं मिली। मैथ्स ने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया। लोग ताने देने लगे थे कि कहां सरकारी नौकरी के चक्कर में पड़े हो। फिर भी सतीश ने हार नहीं मानी। सतीश कहते हैं जब भी वे निराश होते थे तो ‘रुक जाना नहीं’ गाना सुनते थे, जिससे उन्हें मोटिवेशन मिलती थी। उन्हें मेहनत करना नहीं छोड़ा।
साल 2021 में, सतीश को संघर्ष और कड़ी मेहनत फल मिला। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा (SSC CGL) पास करके वे असिस्टेंट अकाउंटेंट ऑफिसर (AAO) बन गए। जिस दिन एसएससी की रिजल्ट आया वे अपनी मां के गले लगकर घंटों तक रोए।
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