Success Story: भट्टे पर ईंट ढोने वाला बना अफसर, अपमान के थप्पड़ के बाद ठाना- बेइज्जती भरी जिंदगी से निकलना है – success story of ssc cgl from brick kiln laborer to officer a slap of humiliation became the turning point of satish life


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भट्टे पर ईंट ढोने वाले यूपी के सतीश ने साल 2021 में एसएससी एग्जाम पास करके सरकारी नौकरी हासिल की थी। (फोटो सोर्स- यूट्यूब/जोश टॉक और Pexels)
Success Story of SSC CGL: ईंट के जिस भट्टे पर जन्म हुआ, वही पूरी दुनिया हो गई थी। हाथों में किताबों की जगह मिट्टी और ईंटें होती थीं। एक टाइम का खाना और एक जोड़ी कपड़ों में जीवन चल रहा था। ऐसे हालातों में पले-बढ़े सतीश आज सरकारी अफसर हैं। उनकी सक्सेस स्टोरी साबित करती है कि अगर इरादा पक्का और खुद पर विश्वास हो तो गरीबी और हालात कभी भी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकते।

ईंट के भट्टे पर हुआ था जन्म, वहीं बिता बचपन

ईंट के भट्टे पर हुआ था जन्म, वहीं बिता बचपन

सतीश, उत्तर प्रदेश के संभल जिले के बेहद गरीब परिवार से आते हैं। उनका जन्म ईंट के भट्टे पर ही हुआ था। जोश टॉक को दिए एक इंटरव्यू में संघर्ष से सफलता तक की कहानी बताई है। वे बताते हैं कि उनका पूरा परिवार प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करता था।

न स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी थी और न शिक्षा का माहौल था। उनका जन्म भी ईंट के भट्टे पर ही हुआ था। पहले मिट्टी खेलते थे, फिर वही तकदीर बन गई थी। परिवार में नौ बहन-भाई थे और तंगहाली इतनी थी कि एक जोड़ी कपड़े के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।

(फोटो सोर्स- Pexels)

ईंट ढोई, शादियों में लाइट उठाई, फिर वो एक थप्पड़

ईंट ढोई, शादियों में लाइट उठाई, फिर वो एक थप्पड़

सतीश बताते हैं कि वो ऐसे परिवेश से आते हैं जहां माता-पिता यह देखते हैं कि बच्चा वजन उठाने लायक हो गया है तो उसे काम पर लगा दो, पढ़ाई-लिखाई तो बहुत दौर की बात थी। जैसे ही होश संभाला, वो भी ईंट के भट्टे पर मजदूरी का काम करने लगे। दिन में ईंट ढोने का काम और रात में शादियों में लाइट उठाने का काम किया।

एक बार एक पार्टी में वे जब लाइट उठा रहे थे तब लाइट का तार हाथ से छूट गया। तब वहां मौजूद एक शख्स ने सभी के सामने एक जोरदार थप्पड़ मार दिया। यह थप्पड़ सिर्फ सतीश के गाल पर नहीं, बल्कि उनके आत्म-सम्मान पर लगा था। उसी दिन उन्होंने ठान लिया कि उन्हें इस तरह जीवन नहीं काटना है और इस अपमानजनक स्थिति से बाहर निकलता है।

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दिन में बेलदारी और रात में पढ़ाई

दिन में बेलदारी और रात में पढ़ाई

उन परिस्थितियों से निकलना आसान नहीं था। फिर भी सतीश ने हार नहीं मानी। उन्होंने पिता के साथ बेलदारी का काम किया। वे दिनभर मेहनत करते थे और शाम को पढ़ाई करते थे। थकान और दर्द की वजह से शरीर आराम चाहता था। लेकिन दिमाग और खुद से किया वादा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता था। थक्कर चूर होने के बावजूद रोज शाम को साइकिल चलाकर ट्यूशन पढ़ने जाते थे। वे कहते हैं कि वो समय दर्दनाक था, फिर भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ।

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पिता के निधन के बाद टूट गए थे सतीश

पिता के निधन के बाद टूट गए थे सतीश

एक तरफ जीवन में संघर्ष कम नहीं हो रहा था, तो दूसरी ओर पिता की कैंसर जैसी गंभीर बीमारी उन्हें अंदर से तोड़ रही थी। साल 2018-19 का समय उनके लिए सबसे कठिन था। मजदूरी के साथ स्कूल की पढ़ाई कर रहे थे। घर आकर पिता की सेवा करते थे।

10 मार्च 2019 को उनके पिता का निधन हो गया और उस दिन घर में एक रुपया भी नहीं था। पिता के जाने के बाद सतीश और उनका परिवार टूट गया था। सतीश डिप्रेशन में चले गए थे।

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एसएससी एग्जाम क्रैक कर बने अफसर

एसएससी एग्जाम क्रैक कर बने अफसर

साल 2019-20 में सतीश ने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने रात-रातभर जाकर पढ़ाई की। सरकारी नौकरी की तैयारी के दौरान उन्हें कई बार असफलताएं मिली। मैथ्स ने उन्हें सबसे ज्यादा परेशान किया। लोग ताने देने लगे थे कि कहां सरकारी नौकरी के चक्कर में पड़े हो। फिर भी सतीश ने हार नहीं मानी। सतीश कहते हैं जब भी वे निराश होते थे तो ‘रुक जाना नहीं’ गाना सुनते थे, जिससे उन्हें मोटिवेशन मिलती थी। उन्हें मेहनत करना नहीं छोड़ा।

साल 2021 में, सतीश को संघर्ष और कड़ी मेहनत फल मिला। कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल परीक्षा (SSC CGL) पास करके वे असिस्टेंट अकाउंटेंट ऑफिसर (AAO) बन गए। जिस दिन एसएससी की रिजल्ट आया वे अपनी मां के गले लगकर घंटों तक रोए।
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अमन कुमार

लेखक के बारे मेंअमन कुमारअमन कुमार, डिजिटल में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में नवभारतटाइम्स.कॉम में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रॉड्यूसर पद पर हैं। शिक्षा और रोजगार जगत की खबरों के अनुभवी लेखक अमन को न्यूज वर्ल्ड में करीब 10 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है। वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। साल 2015 में साधना न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत करते हुए टीवी चैनल आउटपुट डेस्क और ‘मानव को शांति कहां’ मासिक पत्रिका से लेखन शैली को समझा। इसके बाद लाइव न्यूज हिंदी (लाइव इंडिया), जनसत्ता.कॉम, आजतक जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में रहकर ग्राउंड रिपोर्टिंग के साथ वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे। कई साल के अनुभव से अमन पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं। अमन रिपोर्ट्स बेस्ड, सटीक और विश्वसनीय जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाने में विश्वास रखते हैं। उनकी प्राथमिकता यूजर्स तक सही जानकारी को सरल शब्दों में समझाना रही है।

अमन, शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों जैसे स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षा, प्रवेश परीक्षा, सरकारी नौकरी, सरकारी रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स एंड ऑप्शंस, करेंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज, सक्सेस स्टोरीज समेत कई टॉपिक्स पर गहरी सोच और समझ के साथ व्यापक कवरेज करते हैं। टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स, करियर काउंसलर की सलाह और टिप्स के जरिए स्कूल की खबरों से लेकर IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT, CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर काम करते हैं। इसके अलावा एसससी, यूपीएससी, बैंक, पुलिस समेत भारत और राज्य स्तर की सरकारी नौकरियों के बारे में विस्तार और गहराई से लिखते हैं।

गवर्नमेंट जॉब, प्राइवेट जॉब, स्कूल एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक की फील्ड में काम करते हुए अमन ने भारत के प्रमुख शिक्षा बोर्ड CBSE के एग्जाम कंट्रोलर डॉ. संयम भारद्वाज, दिल्ली यूनिवर्सिटी की डीन ऑफ एडमिशन्स प्रोफेसर हनीत गांधी और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का खास इंटरव्यू कर स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी कंटेंट वाले ऑथेंटिक आर्टिकल्स लिखे हैं। इसके अलावा ABVP और NSUI जैसे छात्र संगठनों के प्रवक्ताओं का इंटरव्यू लिया है। सीबीएसई, रीट, नीट, यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले टॉपर्स से बातचीत कर रिपोर्ट तैयार करते रहे हैं। ताकि उनके टिप्स और सलाह से बाकी युवाओं के करियर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।

दिल्ली में जन्मे अमन कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. भीमराव आंबेडकर कॉलेज से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में B.A. ऑनर्स की डिग्री हासिल की। फिर डीयू के साउथ कैंपस से हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। उसके बाद गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। ये डिग्रियां अमन को हिंदी पत्रकारिता की वो एक्सपर्टीज देती हैं जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल (5 Ws+1H) यानी क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे के पैमानों के आधार पर न्यूज राइटिंग के लिए जरूरी हैं

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