India UNSC Bid: UNSC की अस्थायी सदस्यता हासिल करने के मामले में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। भारत को इससे पहले आठ बार दो-दो साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चुना गया है। लेकिन इस बार का मुकाबला कठिन हो गया है।
हाइलाइट्स
- भारत ने UNSC की अस्थाई सदस्यता के लिए दावेदारी पेश किया
- ताजिकिस्तान भारत के मुकाबले उम्मीद, OIC का समर्थन हासिल
- भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का समर्थन

हालांकि वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव और ऐतिहासिक ट्रैक रिकॉर्ड के मामले में भारत का पलड़ा भारी दिख रहा है लेकिन 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) का समर्थन मिलने के बाद ताजिकिस्तान भी एक बेहद मजबूत दावेदार बन गया है। कौन चुना जाएगा इसके लिए जून 2027 में चुनाव आयोजित किए जाएंगे। ऐसे में दोनों देशों की ताकत और कमजोरियों के बारे में जानना जरूरी हो जाता है। किसका पलड़ा भारी है और किसकी दावेदारी कमजोर पड़ सकती है इस रिपोर्ट में हम जानने की कोशिश करते हैं।
भारत 8 बार बन चुका है UNSC का अस्थाई सदस्य
UNSC की अस्थायी सदस्यता हासिल करने के मामले में भारत का ट्रैक रिकॉर्ड शानदार रहा है। भारत को इससे पहले आठ बार दो-दो साल के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चुना गया है। 1950–51, 1967–68, 1972–73, 1977–78, 1984–85, 1991–92, 2011–12 और 2021–22 में भारत यूएनएससी का अस्थाई सदस्य रह चुका है। इस तरह भारत ने अस्थायी सदस्य के तौर पर कुल 16 साल काम किया है।
भारत को ज्यादातर यूरोपीय देश, अपने पड़ोसी देशों, कैरिबियाई और द्वीपीय देशों, दक्षिण अमेरिकी देशों, खाड़ी देशों और कई अफ्रीकी देशों का समर्थन मिलने की भी उम्मीद है। भारत को पिछले सभी चुनावों में लगातार भारी समर्थन मिला है। भारत ने जब 2011–12 के कार्यकाल के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी उस वक्त 190 में से 187 वोट और 2021–22 के कार्यकाल के लिए 193 में से 184 वोट मिले थे।
भारत बनाम ताजिकिस्तान, कूटनीतिक ताकत
- भारत को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ज्यादातर यूरोपीय देश और फिजी का समर्थन हासिल है। ज्यादातर प्रभावशाली देशों ने भारत का समर्थन कर दिया है।
- ताजिकिस्तान को इस्लामिक देशों के संगठन OIC ने अपना समर्थन दे दिया है। इसमें 57 सदस्य होते हैं। यानि ताजिकिस्तान को एक साथ 57 देशों का एकमुश्त वोट मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
- भारत के पास 8 बार यूएनएससी की अस्थाई सदस्यता रही है इस लिहाज से अनुभव के मामले में ताजिकिस्तान पर बढ़त हासिल है जबकि ताजिकिस्तान पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहा है।
- भारत की वैश्विक छवि ताजिकिस्तान के मुकाबले मजबूत है। भारत को ग्लोबल साउथ की आवाज माना जाता है। वहीं मध्य एशिया में ताजिकिस्तान को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक देश माना जाता है लेकिन इसका वैश्विक प्रभाव भारत के मुकाबले सीमित है।
भारत का पलड़ा कहां भारी दिख रहा?
कूटनीतिक मजबूती- भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस्लामिक देशों में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस महीने कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की यात्रा की है। माना जा रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भारत के पक्ष में वोट डाल सकते हैं। ओआईसी में भारत की सेंधमारी तय मानी जा रही है।
जीतने के लिए दो तिहाई बहुमत जरूरी- यूएनएससी की अस्थाई सदस्यता हासिल करने के लिए 193 देशों में से 129 देशों का समर्थन जरूरी है। भारत के मजबूत कूटनीतिक और रणनीतिक संबंध उसे 129 वोट हासिल करने में मदद कर सकते हैं।
भारत को कहां टक्कर दे रहा ताजिकिस्तान?
इस्लामिक देशों का एकमुश्त वोट- ताजिकिस्तान को 57 इस्लामिक देशों का एकमुश्त वोट मिल सकता है। 57 देशों का एक वोटबैंक की तरह ताजिकिस्तान के पक्ष में मतदान करना भारत के 129 वोट पाने के लक्ष्य में एक बाधा बन सकता है। इसी का तोड़ निकालने के लिए जयशंकर इस्लामिक देशों में कैंपेन चला रहे हैं।
ताजिकिस्तान के साथ सहानुभूति- ताजिकिस्तान इससे पहले कभी भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं रहा है। इसलिए उसे कुछ सहानुभूति वोट भी मिल सकते हैं।
ताजिकिस्तान पर भारत को बढ़त लेकिन करनी होगी मेहनत
भारत के पास मजबूत वैश्विक साख, कूटनीतिक आक्रामकता और बड़े लोकतांत्रिक देशों का समर्थन हासिल है इसलिए ताजिकिस्तान के मुकाबले भारत को मजबूत बढ़त हासिल है। लेकिन मामला दो तिहाई बहुमत हासिल करने का है। इस्लामिक देशों के ताजिकिस्तान को समर्थन करने के बाद भारत के लिए मुकाबला मुश्किल हो गया है।
पाकिस्तान इसमें बड़ी भूमिका निभा रहा है। उसने ताजिकिस्तान का समर्थन किया है। भारत को और मेहनत करने की जरूरत होगी और अफ्रीकी, लैटिन अमेरिकी और खाड़ी देशों में मजबूत कैम्पेन चलाना होगा। खासकर खाड़ी देशों में अगर भारत की सेंधमारी कामयाब रहती हो तो 129 की सीमा रेखा को भारत पार सकता है।
