Up:दो अफसरों की लड़ाई में खुला 12 करोड़ का खेल, ओईएफ में भ्रष्टाचार की परतें उजागर; अब आया नया अपडेट – Rift Between Two Officers Exposes 12 Crore Corruption Scam In Oef


रक्षा मंत्रालय के अधीन हजरतपुर (फिरोजाबाद) स्थित आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) में सामने आए 12 करोड़ रुपये के टेंडर और रिश्वत घोटाले की परतें दो अधिकारियों की आपसी रार के कारण खुली हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, करीब एक साल पहले यहाँ तैनात एक वर्तमान अधिकारी की तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) अमित सिंह से ठन गई थी।

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इसके बाद उस अधिकारी ने फैक्टरी में चल रहे फर्जी टेंडर खेल, दक्षिण कोरिया की हवाई यात्राओं और प्रतिबंधित दायरे में अवैध निर्माणों के सबूत जुटाकर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और रक्षा मंत्रालय को भेज दिए, जिसके आधार पर सीबीआई ने तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह समेत 10 आरोपियों पर चार एफआईआर दर्ज कीं।

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सीबीआई की चौथी एफआईआर के मुताबिक, कांच-चूड़ी कारोबारी राजकुमार मित्तल ने 30 लाख की रिश्वत देकर कारखाने की दीवार से महज 20 फीट की दूरी पर 18 फीट ऊंची और 300 मीटर लंबी अवैध कंक्रीट की दीवार बनवाई थी। अब नया इनपुट यह है कि इसी प्रतिबंधित दायरे में एक अन्य रसूखदार व्यवसायी के प्लॉट पर एक और पक्का निर्माण खड़ा किया गया है।

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इस पूरे खेल का एक मुख्य किरदार संतोष कुमार बघेल (निवासी उसायनी, टूंडला) है, जो कभी फैक्टरी परिसर में सब्जी और परचून बेचता था। तत्कालीन सीजीएम अमित सिंह से नजदीकी बढ़ने के बाद अफसरों ने उसे डमी ठेकेदार के रूप में इस्तेमाल किया। संतोष की फर्म ”मैसर्स एमएसएम एंटरप्राइजेज” के पास कोई तकनीकी योग्यता या अनुभव न होने के बावजूद, उसे वर्ष 2020 से 2025 के बीच 5.67 करोड़ रुपये के कुल 129 टेंडर दे दिए गए, जिसका वित्तीय नियंत्रण भ्रष्ट अधिकारी ही कर रहे थे।

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इस साठगांठ से संतोष की माली हालत भी तेजी से बदली; उसने गांव में आलीशान मकान बनवाया और दो कारें खरीदीं, जिनमें से एक कार उसने ओईएफ फैक्टरी में ही किराए पर लगवा दी।

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