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ईरानी मीडिया और सरकार समर्थक टिप्पणीकारों ने अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की मौत पर खुलकर ख़ुशी जताई.
उन्होंने ग्राहम को ‘ईरान का सबसे बड़ा दुश्मन और इसराइल का मज़बूत समर्थक’ बताया.
अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क़रीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम का शनिवार को 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था.
लिंडसे ग्राहम के निधन की पुष्टि उनके कार्यालय ने आधिकारिक बयान जारी कर की. कहा गया कि ग्राहम की मौत ‘बीमारी की वजह’ से हुई है.
उधर, ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में उनका (ग्राहम का) मज़ाक उड़ाया गया. कई जगह उनकी मौत को इसराइली सरकार के लिए बड़ा झटका और ईरान की प्रतीकात्मक जीत बताया गया.
सरकारी न्यूज़ चैनल आईआरआईएनएन ने सबसे ज़्यादा जश्न वाला रुख़ अपनाया.
एक एंकर ने कहा कि “जंग समर्थक और ईरान विरोधी” अमेरिकी सीनेटर “दुनिया छोड़ गए”. उन्होंने इस ख़बर पर ईरानी जनता को बधाई भी दी.
‘ईरान के दुश्मन की मौत’

कट्टरपंथी शिक्षाविद और राजनीतिक टिप्पणीकार फ़ुआद इज़ादी ने अर्ध-सरकारी आईएसएनए न्यूज़ एजेंसी से कहा कि “ज़ायोनिज़्म (यहूदी राष्ट्रवादी आंदोलन और राजनीतिक विचारधारा ) ने अमेरिकी कांग्रेस में अपने सबसे अहम समर्थकों में से एक को खो दिया है.”
उनका कहना था कि ग्राहम की मौत अमेरिका में इसराइल के समर्थकों के लिए बड़ा नुक़सान है.
ईरानी मीडिया की ज़्यादातर रिपोर्टों में ग्राहम की मौत को सिर्फ़ एक बड़े अमेरिकी नेता का निधन नहीं बताया गया. इसे ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की खुलकर वकालत करने वाले सबसे मुखर नेताओं में से एक का अंत बताया गया.
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रूढ़िवादी और कट्टरपंथी मीडिया ने भी यही बात दोहराई. स्टूडेंट न्यूज़ नेटवर्क (एसएनएन) ने लिखा कि “जो व्यक्ति ईरान के लोगों को तबाह करना चाहता था, वह ख़ुद ही ख़त्म हो गया.”
उसने यह भी कहा कि कई लोगों ने ईरान को मिटाने की कोशिश की. लेकिन ईरान आज पहले से ज़्यादा मज़बूत और गर्व के साथ खड़ा है. जबकि वे लोग ख़ुद ज़मीन के नीचे दफ़न हो चुके हैं.
रूढ़िवादी मेहर न्यूज़ एजेंसी ने लिखा कि ग्राहम “ईरान को तबाह करने का अपना सपना क़ब्र तक ले गए.” एजेंसी ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की उनकी लंबे समय से की जा रही वकालत का भी ज़िक्र किया.
सरकारी मीडिया ने दूसरे देशों की प्रतिक्रियाएं भी दिखाईं. आईआरआईबी न्यूज़ एजेंसी ने अमेरिकी मुस्लिम लेखक उमर सुलेमान की एक्स पर की गई टिप्पणी दोबारा प्रकाशित की. उन्होंने लिखा कि उनकी इच्छा है कि ग्राहम “ग़ज़ा में जिन बर्बादियों को बनाने में आपने मदद की, उन्हीं बर्बादियों में हमेशा के लिए रहें.”
रविवार शाम के न्यूज़ बुलेटिन में सरकारी नेटवर्क टू टीवी ने एक रिपोर्ट दिखाई. इसमें कहा गया कि “ज़ायोनिस्ट ग्राहम की मौत पर शोक मना रहे हैं.” रिपोर्ट में ग्राहम को अमेरिका में इसराइल का “सबसे मज़बूत सहयोगी” बताया गया.
ट्रंप के मुखर विरोधी से कट्टर समर्थक तक
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गेब्रिएला पोमरॉय और साक्षी वेंकटरमण
रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के क़रीबी सहयोगी थे. उनके दफ़्तर के मुताबिक़, शनिवार शाम एक “अचानक एक बीमारी” के बाद उनकी मौत हुई.
लिंडसे ग्राहम 2002 में सीनेट के लिए चुने गए थे. वह साउथ कैरोलाइना से सीनेटर थे.
विदेश नीति के मामलों में उन्हें अमेरिका की सबसे प्रभावशाली आवाज़ों में गिना जाता था. वह अक्सर विदेशों में अमेरिकी सैन्य दख़ल का समर्थन करते थे.
डोनाल्ड ट्रंप ने ग्राहम को “सच्चा अमेरिकी देशभक्त” बताया. उन्होंने कहा कि उनकी कमी बहुत महसूस की जाएगी.

ग्राहम के प्रवक्ता ने बयान में कहा कि शुरुआती मेडिकल जाँच से पता चलता है कि उनकी मौत दिल की एक अहम धमनी, यानी महाधमनी (एओर्टा), के फटने से हुई.
ग्राहम अभी हाल ही में यूक्रेन की राजधानी कीएव से लौटे थे. वहाँ उन्होंने शुक्रवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात की थी. उनकी यात्रा से पहले उनकी सेहत संबंधी किसी समस्या की जानकारी नहीं थी.
ट्रंप ने एनबीसी न्यूज़ से कहा कि मौत से कुछ घंटे पहले उनकी ग्राहम से बात हुई थी. उन्होंने कहा कि ग्राहम की आवाज़ ठीक लग रही थी. हालांकि वह थोड़े थके हुए लग रहे थे.
ट्रंप ने कहा, “वह कई मायनों में बहुत मज़बूत इंसान थे. अगर उन्हें लगता था कि वह सही हैं, तो विरोध के बावजूद अपने फ़ैसले पर डटे रहते थे. लेकिन वह अच्छे इंसान भी थे.”
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ग्राहम पहले डोनाल्ड ट्रंप के बड़े आलोचक थे. 2015 में उन्होंने ट्रंप को “नस्ली भेदभाव भड़काने वाला, विदेशियों से नफ़रत करने वाला और धार्मिक कट्टरपंथी” कहा था.
2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ग्राहम ने कहा था, “अगर हमने ट्रंप को उम्मीदवार बनाया, तो हमारी बुरी हार होगी. और उसके हम ख़ुद ज़िम्मेदार होंगे.”
2021 में अमेरिकी संसद भवन पर हुए दंगों के बाद ग्राहम ने सीनेट में कहा, “ट्रंप और मैंने साथ में लंबा सफ़र तय किया है. मुझे अफ़सोस है कि इसका अंत इस तरह हो रहा है.”
उन्होंने कहा, “मैं अब उनके साथ नहीं हूँ. अब बहुत हो चुका.”
लेकिन समय के साथ ट्रंप के प्रति उनका रुख़ नरम पड़ गया.
2021 में महाभियोग के मुक़दमे के दौरान उन्होंने ट्रंप को दोषी ठहराने के ख़िलाफ़ वोट दिया. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने ट्रंप का समर्थन भी किया.
ग्राहम ने ट्रंप के समर्थन की कई वजहें बताईं. इनमें अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर उनकी नीतियां, ईरान के ताक़तवर सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी की हत्या, और रूढ़िवादी जजों की नियुक्ति शामिल थीं.
2023 में ग्राहम ने बीबीसी से कहा, “डोनाल्ड ट्रंप का एक अंधेरा पक्ष भी है. लेकिन वह एक बहुत अच्छे राष्ट्रपति भी रहे. मैं उनके साथ हूँ, क्योंकि मैंने देखा है कि उन्होंने क्या किया.”
इसराइली समर्थक और ईरान विरोधी
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लिंडसे ग्राहम विदेश नीति में सख़्त रुख़ रखने के लिए जाने जाते थे. वह इसराइल के मज़बूत समर्थक थे. वो ईरान के ख़िलाफ़ जंग का भी समर्थन करते थे.
पिछले महीने उन्होंने सीबीएस से कहा था कि अगर ईरान, होर्मुज़ स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण नहीं मानता, तो अमेरिका उसे “पूरी तरह तबाह” कर देगा. यह उनके आख़िरी टीवी इंटरव्यू में से एक था.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि “लिंडसे समझते थे कि इसराइल और अमेरिका की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है.”
उन्होंने कहा कि इसराइल ने “अपने सबसे बड़े दोस्तों में से एक” को खो दिया है.
ग्राहम ने 2001 में 11 सितंबर के आतंकी हमलों के बाद इराक़ के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के पक्ष में भी वोट दिया था.
2021 में वह अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के भी विरोध में थे. उन्होंने इसे “अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दुखद और ख़तरनाक घटना” बताया था.
उन्होंने यह भी कहा था, “दुनियाभर के जिहादी जश्न मना रहे हैं. अमेरिका को अब कमज़ोर माना जाएगा.”
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