बारामूला में कस्टोडियन जमीन रैकेट का पर्दाफाश, फर्जी अदालती आदेशों के खेल में तीन कोर्ट कर्मचारी नामजद


जागरण संवाददाता, बारामूला। उत्तरी कश्मीर के न्यायिक और राजस्व विभागों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब बारामूला पुलिस स्टेशन ने कस्टोडियन संपत्ति के अवैध हस्तांतरण से जुड़े एक बड़े ज़मीन रैकेट का पर्दाफाश किया।

इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत FIR संख्या 99/2026 दर्ज की है। यह कार्रवाई आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी, जालसाजी और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोपों के तहत की गई है।

ऐसे सामने आया पूरा मामला

यह पूरा घटनाक्रम तब उजागर हुआ जब एंटी-करप्शन ब्यूरो ने ‘राबिया राशिद बनाम आबिदा मलिक’ नामक एक सिविल केस के अंतिम फ़ैसले और डिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की सर्टिफ़ाइड कॉपियां मांगीं। इस केस का फैसला कथित तौर पर 22 जनवरी 2021 को हुआ था।

जब इस संबंध में डिस्ट्रिक्ट रिकॉर्ड रूम में पड़ताल की गई, तो वहां इस केस से जुड़ा कोई भी न्यायिक रिकॉर्ड मौजूद ही नहीं था। इसके बाद, जांच के दौरान ACB अधिकारी ने उन सर्टिफाइड कॉपियों की फोटोकॉपी पेश कीं, जिन पर सब-जज के हस्ताक्षर थे और जिन्हें कथित रूप से 28 जून 2025 को रिकॉर्ड रूम से जारी किया गया था। मूल रिकॉर्ड गायब होने से इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

उच्च स्तरीय जांच में हुआ बड़ा खुलासा

दस्तावेज़ संदिग्ध मिलने पर बारामूला के सब-जज (न्यायिक मजिस्ट्रेट) माजिद फारूक मीर ने इसकी सूचना प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज को दी। इसके बाद एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के माध्यम से एक विस्तृत जांच कराई गई।

जांच में यह पाया गया कि आरोपी कर्मचारियों ने सब-जज को गुमराह करके चालाकी से इन नकली सर्टिफ़ाइड कॉपियों पर उनके हस्ताक्षर ले लिए थे, जबकि असलियत में ऐसा कोई सिविल केस अदालत में कभी दायर या तय ही नहीं हुआ था। इसे न्याय व्यवस्था और अदालती रिकॉर्ड की पवित्रता के साथ एक बड़ा धोखा माना गया है।

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इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज के निर्देश पर सब-जज ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर कोर्ट के तीन कर्मचारियों को नामजद किया गया है:

1. अब्दुल अहद लोन (सीनियर असिस्टेंट)
2. निसार अहमद भट (ऑर्डरली)
3. बशीर अहमद पीर (ऑर्डरली)

शिकायत के मुताबिक, इन जाली दस्तावेज़ों का सीधा फायदा रबिया मंज़ूर (निवासी शेइपोरा, पट्टन) और आबिदा मलिक (अब मृत, निवासी चिनार कॉलोनी, बाघाट, बरज़ुल्ला) को पहुंचाया गया था।

बड़े जमीन रैकेट की आशंका, पुलिस जांच जारी

सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि क्या इन जाली अदालती दस्तावेज़ों का इस्तेमाल कस्टोडियन प्रॉपर्टी का म्यूटेशन या मालिकाना हक बदलने के लिए किया गया था।

पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी कर्मचारियों अब्दुल अहद लोन और निसार अहमद भट को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया है, जबकि तीसरे आरोपी बशीर अहमद पीर की गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है।

बारामूला पुलिस स्टेशन इस पूरे साज़िश के पीछे के अन्य मददगारों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रहा है। साथ ही इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इसी तरह के हथकंडों का इस्तेमाल करके अन्य जमीनों के सौदों में भी धोखाधड़ी की गई है, जिससे इस मामले का दायरा और बढ़ सकता है।



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