जागरण संवाददाता, गयाजी। बिहार के गांवों में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही। खेतों की मेड़ों पर दौड़ने वाले बच्चे, खुले मैदान में कबड्डी और फुटबाल खेलने वाले युवा तथा सीमित संसाधनों में क्रिकेट, वालीबाल और तीरंदाजी में हुनर दिखाने वाले खिलाड़ी अब अपनी प्रतिभा को नई पहचान दिला सकेंगे।
बिहार सरकार का खेल विभाग और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (बीएसएसए) ग्रामीण खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए बड़ा अभियान चला रहा है।
इसके तहत प्रत्येक पंचायत में ग्राम पंचायत खेल क्लब का गठन किया जा रहा है। गयाजी जिले में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है और एक जुलाई से 15 अगस्त तक ऑनलाइन सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है।
खेल विभाग का उद्देश्य केवल प्रतियोगिताएं कराना नहीं, बल्कि गांवों में ऐसा खेल वातावरण तैयार करना है, जहां हर बच्चे को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।
गांवों से शुरू होगी खिलाड़ियों की नई यात्रा
विभाग का मानना है कि गांवों में मौजूद प्रतिभाओं को यदि सही मंच और संसाधन मिलें तो वे प्रखंड, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
पंचायत स्तर पर खिलाड़ियों की पहचान और प्रशिक्षण की व्यवस्था होने से ग्रामीण युवाओं के लिए आगे बढ़ने के नए रास्ते खुलेंगे।
जिला खेल पदाधिकारी नेहा कुमारी ने बताया कि पंचायत खेल क्लब ग्रामीण युवाओं को एक संगठित मंच उपलब्ध कराएंगे।
प्रत्येक पंचायत में अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और सदस्य मिलकर खेल गतिविधियों का संचालन करेंगे। इससे गांवों में नियमित अभ्यास और प्रतियोगिताओं का आयोजन आसान होगा।
ऑनलाइन पंजीकरण से जुड़ेंगे खिलाड़ी
खिलाड़ियों को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद वे अपने पंचायत खेल क्लब के सदस्य बन जाएंगे और खेल विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे खिलाड़ियों का डेटा तैयार होगा और प्रतिभाओं की पहचान करने में आसानी होगी।
खेल विभाग का मानना है कि तकनीक के जरिए ग्रामीण प्रतिभाओं को राज्य स्तरीय खेल व्यवस्था से जोड़ना अधिक प्रभावी साबित होगा। इससे खिलाड़ियों को समय पर सूचना और अवसर मिल सकेंगे।
एथलेटिक्स से तीरंदाजी तक कई खेलों पर रहेगा फोकस
पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय और प्रतिस्पर्धी दोनों तरह के खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
इनमें एथलेटिक्स, फुटबाल, क्रिकेट, कबड्डी, वालीबाल, खो-खो, हैंडबाल, हाकी, बैडमिंटन, तीरंदाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, योग और पारंपरिक ग्रामीण खेल शामिल हैं।
इन खेलों के माध्यम से बच्चों और युवाओं में फिटनेस, अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी। साथ ही उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए स्थानीय स्तर पर ही मंच मिलेगा।
दो अक्टूबर से शुरू होगा पंचायत खेल महोत्सव
सदस्यता अभियान समाप्त होने के बाद दो अक्टूबर 2026 से पंचायत स्तरीय खेल महोत्सव की शुरुआत होगी। यह प्रतियोगिता अगले वर्ष मार्च तक चलेगी।
पंचायत स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी प्रखंड, जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे।
खेल विभाग का मानना है कि यदि प्रतिभाओं की पहचान गांव से शुरू होगी, तो बिहार को भविष्य में और बेहतर खिलाड़ी मिल सकेंगे। इससे ग्रामीण युवाओं के सपनों को भी नई उड़ान मिलेगी।
खिलाड़ियों को मिलेगा प्रशिक्षण और खेल सामग्री
खेल विभाग का लक्ष्य केवल खिलाड़ियों का पंजीकरण करना नहीं है। पंचायत खेल क्लबों के माध्यम से खिलाड़ियों को खेल सामग्री उपलब्ध कराने, नियमित अभ्यास कराने और प्रतियोगिताओं से जोड़ने की भी योजना बनाई गई है।
इस पहल से गांवों में खेल सुविधाओं का विस्तार होगा और आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
गया में प्रतिभा की नहीं, अवसर की रही कमी
गया जिला एथलेटिक्स, तीरंदाजी, फुटबाल, कबड्डी, क्रिकेट और वालीबाल जैसे खेलों में लगातार प्रतिभाएं देता रहा है।
कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में अनेक खिलाड़ियों की यात्रा बीच में ही रुक जाती है।
यदि पंचायत स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं और प्रशिक्षण की व्यवस्था हो, तो गया के गांव भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार कर सकते हैं।
खेल बन रहा युवाओं के लिए करियर का नया विकल्प
आज खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि करियर का मजबूत विकल्प भी बन चुका है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां, छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता और सम्मान मिलता है।
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ऐसे में पंचायत खेल क्लब ग्रामीण युवाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं और उन्हें अपने सपनों को साकार करने का मौका दे सकते हैं।
मजबूत होगी गांवों की खेल संस्कृति
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर बच्चे और युवा शाम के समय खुले मैदानों में खेलते दिखाई देते हैं। पंचायत खेल क्लब बनने के बाद इन गतिविधियों को संगठित स्वरूप मिलेगा और खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी।
नियमित प्रतियोगिताओं और अभ्यास से युवाओं का जुड़ाव खेलों से बढ़ेगा, जिससे नशे और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूरी बनाने में भी मदद मिलेगी। इस तरह खेल गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास का नया माध्यम बन सकते हैं।