हरियाणा का “वॉलीबॉल” विलेज (ETV Bharat)
कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले का ऐतिहासिक गांव अमीन (अभिमन्युपुर) आज देश के खेल मानचित्र पर किसी परिचय का मोहताज नहीं है. करीब 8 हजार की आबादी वाले इस गांव को यदि भारतीय वॉलीबॉल का हब कहा जाए, तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. यहां की मिट्टी में कुछ ऐसा है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा मानो वॉलीबॉल के गुर लेकर ही पैदा होता है. पिछले पांच दशकों से इस गांव की हर गली और मैदान से सिर्फ एक ही आवाज गूंजती है और वो है “वॉलीबॉल!” की.
हर घर में वॉलीबॉल का खिलाड़ी : अमीन गांव की सबसे बड़ी खूबी ये है कि यहां के लगभग हर घर में वॉलीबॉल का खिलाड़ी मिल जाएगा. ये खेल यहां सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया और परंपरा बन चुका है. एक दौर ऐसा भी था जब भारतीय राष्ट्रीय टीम और हरियाणा राज्य की टीम के आधे से ज्यादा खिलाड़ी अकेले इसी गांव से हुआ करते थे. आज देश का ऐसा कोई भी सरकारी विभाग नहीं है, जहां खेल कोटे से इस गांव का खिलाड़ी तैनात न हो.
हरियाणा का “वॉलीबॉल” विलेज (ETV Bharat)
बेटियों ने भी गाड़े सफलता के झंडे : एक समय था जब इस गांव के मैदानों पर शुरू में पुरुष ही खेलते थे , लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां की बेटियों ने खेल की पूरी तस्वीर ही बदल दी है. गांव की तीन बेटियां पूनम, रिंकल और महक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं, जबकि 20 से अधिक लड़कियां नेशनल खेल चुकी हैं और सरकारी नौकरी प्राप्त कर चुकी है. हाल ही में गांव की खिलाड़ी महक ने चीन में आयोजित ‘स्कूल वर्ल्ड चैंपियनशिप’ में भाग लेकर न सिर्फ गांव का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है. वहीं, सीनियर नेशनल खिलाड़ी रिंकल वर्तमान में कुरुक्षेत्र के डीसी कार्यालय में और वंदना (नेशनल खिलाड़ी) NIT कुरुक्षेत्र के PWD विभाग में खेल कोटे से सरकारी नौकरी कर देश की सेवा कर रही हैं.

दूसरे गांवों के बच्चे भी पहुंच रहे ट्रेनिंग लेने (ETV Bharat)
अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके खिलाड़ी : अमीन गांव में वॉलीबॉल सिखाने वाली महिला कोच रजनी ने कहा कि इस छोटे से गांव ने देश को जो दिया है, वो बड़े-बड़े शहरों के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी नहीं दे पाते. गांव के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी डॉ. दलेल सिंह को वॉलीबॉल में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित ‘अर्जुन अवॉर्ड’ से नवाजा जा चुका है. गांव से अब तक करीब 20 खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और 200 से अधिक खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं. वॉलीबॉल के दम पर गांव के 200 से ज्यादा युवाओं को अलग-अलग सरकारी विभागों में खेल कोटे के तहत नौकरियां मिली हुई हैं. उन्होंने कहा कि उनके गांव में कोई ऐसा घर नहीं होगा जिसमें कोई वॉलीबॉल का खिलाड़ी ना हो. हर घर में स्टेट लेवल से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी मिलेंगे और वॉलीबॉल की वजह से ही लगभग हर घर में सरकारी नौकरी खिलाड़ियों को मिली हुई है.

अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके खिलाड़ी (ETV Bharat)
सरकारी नौकरियों का ‘शॉर्टकट’ बना खेल का मैदान : आज के दौर में जहां युवा सरकारी नौकरी के लिए सालों-साल कोचिंग सेंटरों में चप्पलें घिसते हैं, वहीं अमीन गांव के युवाओं ने इसका रास्ता खेल के मैदान से निकाला है. वॉलीबॉल कोच शिवकुमार ने बताया कि इस गांव के 200 से ज़्यादा लोग आज खेल कोटे के दम पर देश के अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पुलिस, रेलवे, प्रशासनिक दफ्तर से लेकर सेना तक ऐसा कोई महकमा नहीं है जहां अमीन गांव का कोई खिलाड़ी तैनात ना हो. उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भी उनके स्टेडियम में 200 खिलाड़ी है, जो सुबह शाम प्रैक्टिस करने के लिए आते हैं और कड़ी मेहनत कर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं.

वॉलीबॉल के बारे में समझाती कोच रजनी (ETV Bharat)
द्रोणाचार्य की भूमिका में गांव के ही अपने ‘गुरु’ : इस सफलता की बुनियाद को मजबूत रखने का काम यहां के स्थानीय कोच कर रहे हैं, जो खुद कभी इसी मैदान की मिट्टी से तपकर निकले हैं. गांव की ही बेटी रजनी पिछले 12 सालों से खेल विभाग में कोच के पद पर तैनात हैं और अपने ही गांव की नर्सरी में बच्चों को तराश रही हैं. उनकी देखरेख में खिलाड़ियों का 8वां बैच तैयार हो रहा है. वॉलीबॉल कोटे से हरियाणा पुलिस और फिर खेल विभाग में कोच बने शिवकुमार आज सुबह-शाम स्टेडियम में बच्चों को पसीना बहाना सिखाते हैं. अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी महक ने बताया कि वो सुबह और शाम तीन-तीन घंटे की कड़ी प्रैक्टिस करती हैं और कोचों के बेहतरीन मार्गदर्शन की बदौलत उन्हें सफलता मिल रही है.

खेल की बदौलत हर घर में है नौकरी (ETV Bharat)
आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत : अमीन गांव के स्टेडियम और यहां की खेल नर्सरी की धाक इतनी है कि अब दूसरे गांवों के बच्चे भी यहां कोचिंग लेने आ रहे हैं. पास के गांव ‘खेड़ी रामनगर’ से रोजाना 5 किलोमीटर का सफर तय करके आने वाली उभरती खिलाड़ी वीतिका मैहला कहती हैं कि वे यहां कोच रजनी से बेहतरीन ट्रेनिंग पाकर देश के लिए मेडल जीतने का सपना देख रही हैं.

बेटियों ने भी गाड़े सफलता के झंडे (ETV Bharat)
गांव बना रोल मॉडल : कुरुक्षेत्र का अमीन (अभिमन्युपुर) गांव इस बात की जीती-जागती मिसाल है कि यदि सही मार्गदर्शन, जुनून और खेल संस्कृति हो, तो मंजिल मिल ही जाती है. ये गांव देश के अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए एक रोल मॉडल है, जो दिखाता है कि खेल कैसे युवाओं की ज़िंदगी को बदल रहा है और उन्हें मेडल्स के साथ सरकारी नौकरियां भी दिलवा रहा है.

वॉलीबॉल के गुर सीखते बच्चे (ETV Bharat)

बच्चों को ट्रेनिंग देती महिला कोच रजनी (ETV Bharat)

हर घर में वॉलीबॉल का खिलाड़ी (ETV Bharat)

वॉलीबॉल खेलते बच्चे (ETV Bharat)
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